{"_id":"597adab54f1c1b2c648b4ab8","slug":"five-big-challenges-in-front-of-nitish-kumar-being-chief-minister-of-bihar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आसान नहीं नीतीश की राह, सामने हैं पांच बड़ी चुनौतियां","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
आसान नहीं नीतीश की राह, सामने हैं पांच बड़ी चुनौतियां
आसिफ़ इक़बाल, नई दिल्ली
Updated Fri, 28 Jul 2017 12:03 PM IST
विज्ञापन
नीतीश कुमार
अपना इस्तीफा देकर बिहार की राजनीति में भूचाल लाने वाले नीतीश कुमार की राह भविष्य में आसान नहीं है। कुर्सी की चाहत में उन्होंने भले ही महागठबंधन को तोड़ दिया हो, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने कड़ी चुनौतियां पेश आ सकती हैं, जो उनकी राजनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका अदा करेंगीं।
1- वोटबैंक का खिसकना
2014 में हुए विधानसभा चुनाव में साम्प्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होकर महागठबंधन बनाया गया था, जिसकी वजह से नीतीश को काफी संख्या में मुस्लिम वोट मिला था। बीजेपी के साथ दोबारा जाने से मुस्लिम वोटर दूर होगा, जो आने वाले समय में समीकरण बदल सकता है।
विज्ञापन
1- वोटबैंक का खिसकना
2014 में हुए विधानसभा चुनाव में साम्प्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होकर महागठबंधन बनाया गया था, जिसकी वजह से नीतीश को काफी संख्या में मुस्लिम वोट मिला था। बीजेपी के साथ दोबारा जाने से मुस्लिम वोटर दूर होगा, जो आने वाले समय में समीकरण बदल सकता है।
विज्ञापन
Trending Videos
बीजेपी की बढ़ सकती हैं शर्तें
नीतीश कुमार
2- बीजेपी की बढ़ सकती हैं शर्तें
2005 में जब नीतीश ने बीजेपी से मिलकर सरकार बनाई थी तब उनका सत्ता में ज्यादा हिस्सा था। चूंकि अब समीकरण कुछ और हैं तो 2019 के आम चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी खुद बड़ा हिस्सा रखने का दावा कर सकती है।
2005 में जब नीतीश ने बीजेपी से मिलकर सरकार बनाई थी तब उनका सत्ता में ज्यादा हिस्सा था। चूंकि अब समीकरण कुछ और हैं तो 2019 के आम चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी खुद बड़ा हिस्सा रखने का दावा कर सकती है।
विज्ञापन
मोदी-शाह से सामंजस्य बैठाना
नीतीश कुमार
3- मोदी-शाह से सामंजस्य बैठाना
नीतीश के एनडीए से बेहतर रिश्ते रहे हैं, तब एनडीए अटल-आडवाणी युग वाली थी। अब समीकरण कुछ और हैं। मोदी युग से पहले वो बीजेपी से अलग हो गए थे। अब दौर मोदी-अमित शाह का है, ऐसे में उनसे अच्छी केमिस्ट्री बनाना भी नीतीश के सामने प्रमुख चुनौती होगी।
नीतीश के एनडीए से बेहतर रिश्ते रहे हैं, तब एनडीए अटल-आडवाणी युग वाली थी। अब समीकरण कुछ और हैं। मोदी युग से पहले वो बीजेपी से अलग हो गए थे। अब दौर मोदी-अमित शाह का है, ऐसे में उनसे अच्छी केमिस्ट्री बनाना भी नीतीश के सामने प्रमुख चुनौती होगी।
जनता का विश्वास पाना
4- जनता का विश्वास पाना
सत्ता के लालच में बार-बार पाला बदलना नीतीश की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। पहले भाजपा को छोड़कर राजद के साथ और अब राजद को छोड़कर बीजेपी के साथ जाने वाले नीतीश कुमार पर अवसरवादिता का बड़ा आरोप है। इस छवि से बाहर निकलना नीतीश के सामने सबसे एक बड़ी चुनौती होगी।
सत्ता के लालच में बार-बार पाला बदलना नीतीश की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। पहले भाजपा को छोड़कर राजद के साथ और अब राजद को छोड़कर बीजेपी के साथ जाने वाले नीतीश कुमार पर अवसरवादिता का बड़ा आरोप है। इस छवि से बाहर निकलना नीतीश के सामने सबसे एक बड़ी चुनौती होगी।
सुशासन बाबू की छवि बरकरार रखना
5- सुशासन बाबू की छवि बरकरार रखना
जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होकर नीतीश ने लालू का साथ छोड़ा है, वही भ्रष्टाचार का जिन्न उन्हें आगे परेशान कर सकता है। अब बीजेपी के साथ आने पर उनके सुशासन एजेंडे पर सबकी नजर रहेगी और नीतीश को साफ-सुथरा मंत्रिमंडल तैयार करना होगा
जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होकर नीतीश ने लालू का साथ छोड़ा है, वही भ्रष्टाचार का जिन्न उन्हें आगे परेशान कर सकता है। अब बीजेपी के साथ आने पर उनके सुशासन एजेंडे पर सबकी नजर रहेगी और नीतीश को साफ-सुथरा मंत्रिमंडल तैयार करना होगा