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अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा नहीं पार कर सकेंगे मछुआरे, मदद के लिए इसरो ने बनाया खास ‘उपकरण’

Sun, 09 Feb 2020 04:43 PM IST
आसिम खान पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 09 Feb 2020 04:43 PM IST
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Fishermen will not be able to cross international maritime boundary, ISRO has prepared module
सांकेतिक तस्वीर

श्रीलंका और पाकिस्तान से लगे गहरे समुद्र में भारतीय मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पार करने से रोकने के लिए इसरो ने ऐसा ‘उपकरण’ तैयार किया है जो उनकी नौकाओं का पता लगाकर उन्हें संदेश पहुंचाकर सावधान करेगा। नौसेना के अधिकारियों ने संसद की एक समिति को यह जानकारी दी । समिति ने पिछले दिनों संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

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रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना के अधिकारियों ने रक्षा संबंधी स्थायी समिति को बताया, ‘हमारी अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा श्रीलंका और पाकिस्तान से लगी है। उन सभी नावों में स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) लगी होती है जो नावें 20 मीटर से ऊंची होती हैं। हालांकि कुछ शरारती लोग अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा को पार कर जाते हैं। ये वही लोग होते हैं जो 20 मीटर से कम ऊंचाई वाली नौकाओं का प्रयोग करते हैं। ’
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अधिकारियों ने बताया, इसलिए भारतीय नौसेना ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर एक नई पहल की है। इसमें कहा गया है, इसरो ने अब एक मॉड्यूल तैयार किया है जिसके तहत एक ट्रांसपांडर युक्त व्यवस्था तैयार की गई है जो उन नौकाओं की स्थिति एवं स्थान का पता लगाने में मदद तो करता ही है, साथ ही उन्हें इस संबंध में संदेश भी पहुंचाता है।
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नौसेना के अधिकारियों ने समिति को बताया कि इसके जरिए हम उन्हें मौसम संबंधी संदेश भी दे सकते हैं और तूफान की आशंका होने पर उन्हें सतर्क भी किया जा सकता है । उन्होंने बताया, इसमें निगरानी की एक और सुविधा है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि वे अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा पार कर रहे हैं अथवा नहीं। यदि वे सीमा पार कर रहे हैं तो उन्हें संदेश दिए जाने की भी सुविधा है।


रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने समिति को बताया, गुजरात और तमिलनाडु में 500 मछुआरों की नौकाओं पर इसका परीक्षण भी किया गया है। वह सफल रहा है। अब शेष को भी इसके दायरे में लाया जायेगा। गौरतलब है कि हमारे देश में लगभग 2,46,000 नौकाएं हैं जो 20 मीटर से कम ऊंची हैं।

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