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पहली बार किसी ट्रांसजेंडर को महिला कांग्रेस में मिला अहम पद
Tue, 08 Jan 2019 07:10 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 08 Jan 2019 07:10 PM IST
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भारत की सबसे प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर पत्रकार और कार्यकर्ता अप्सरा रेड्डी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अखिल भारतीय महिला कांग्रेस (एआईएमसी) की राष्ट्रीय महासचिव घोषित किया है। एक ट्रांसजेंडर महिला के रूप में अप्सरा अपने कॉलेज के दिनों में सामाजिक सक्रियता में शामिल रहीं और उन्होंने चाइल्ड रेप के हाई-प्रोफाइल मामलों को भी उठाया और तमिलनाडु में एक मीडिया सनसनी पैदा की।
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सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय आवाज और पत्रकारिता में ब्रांड बनने के बाद वो अमित शाह से मिलकर भाजपा में शामिल हो गईं। पर एक महीने के भीतर ही उन्होंने पद छोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा में स्वतंत्र विचारों वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता द्वारा अप्सरा को राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका दी गई। एआईडीएमके में आपस में मतभेद होने तक अप्सरा ने उस भूमिका को जारी रखा।
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कांग्रेस द्वार राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने पर अप्सरा ने कहा कि मैं एक ऐसी पृष्ठभूमि से आती हूं जहां मैं कई पूर्वाग्रहों और अन्याय से काफी पहले ही परिचित थी। पाखंड और भेदभाव ने ही मुझे अन्याय के खिलाफ काम करने के लिए प्रेरित किया। भारत को ऐसी ताकतों द्वारा शासित किया जा रहा है जो महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की तुलना में धार्मिक पहचान पर अधिक महत्व रखती हैं।
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कांग्रेस वास्तव में एक ऐसी पार्टी है जिसने भारत का निर्माण किया। राहुल गांधी का महिलाओं के निष्पक्ष प्रतिनिधित्व, महिला-केंद्रित घोषणापत्र और गतिशीलता के प्रति प्रतिबद्धता वास्तव में प्रेरणादायक है और मुझे उनके नेतृत्व में देश भर में महिलाओं की सेवा करने में खुशी होगी।
उन्होंने कहा कि “मानव विकास रिपोर्ट के लिंग असमानता सूचकांक के अनुसार 40% से अधिक भारतीय महिलाएं अपने पति या परिवार के सदस्यों के हाथों दुर्व्यवहार, उपेक्षा या हिंसा का शिकार होती हैं। बालिका दुष्कर्म एक सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। महिलाओं को अपराधों और दुर्व्यवहार से बचाने के लिए हमें उनकी आवाज़ों को अपनाने की ज़रूरत है।
ट्रांसजेंडर बिल के बारे में बात करते हुए अप्सरा कहती हैं, '' बीजेपी सरकार का हमारे प्रति यह संरक्षणवादी रवैया है। हमें दान की आवश्यकता नहीं है, हमें असमानता को दूर करने के लिए सहायता की आवश्यकता है जो हमें बहुत लंबे समय तक मिली थी।