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Hindi News ›   India News ›   First training center started in JNCASR Bangalore for the treatment and diagnosis of corona infection

कोरोना संक्रमण के उपचार और निदान के लिए बंगलूरू में पहला प्रशिक्षण केंद्र शुरू

Wed, 24 Jun 2020 06:28 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 24 Jun 2020 06:28 AM IST
सार

  • जेएनसीएएसआर के बंगलूरू कैंपस में शुरू हुआ पहला प्रशिक्षण केंद्र
  • एक सप्ताह के क्रैश कोर्स में निदान से लेकर संक्रमण से बचाव तक की ट्रेनिंग

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First training center started in JNCASR Bangalore for the treatment and diagnosis of corona infection
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जेएनसीएएसआर के बंगलूरू स्थित जक्कुर परिसर में कोरोना संक्रमण के उपचार को लेकर एक प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। इससे कोरोना संक्रमण के उपचार और विस्तार को काबू करने में मदद मिलेगी।

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इसकी शुरुआत जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च- जेएनसीएएसआर बंगलूरू जो कि साइंस और तकनीकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है द्वारा की गई है। एक सप्ताह के क्रैश कोर्स का मकसद संक्रमण की पहचान से लेकर उपचार तक की ट्रेनिंग देकर कुशल संक्रमण उपचारकों की खेप को तैयार करना है। 
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पहला बैच ले चुका प्रशिक्षण
पहला बैच 16 जून से 22 जून तक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है। कोरोना संक्रमण के लिए काम करने वालों को समूहों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसमें एक बैच में छह से 10 प्रशिक्षु रखे गए हैं। इन्हें कोरोना संक्रमण की पहचान, जांच और उपचार तथा इसमें बरती जाने वाली सावधानियों के बावत ट्रेंड किया गया है।

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देश में प्रशिक्षित स्टाफ की कमी 

इस प्रशिक्षण में वास्तविक समय में पीसीआर जैसी मॉलीक्यूलर आधारित डॉयगनोस्टिक टेक्निक अपनाई जाती है, जो कि खासी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा महामारी के फैलाव को रोकने के लिए इसकी वास्तविक रूप से ट्रैकिंग भी अनिवार्य है। क्योंकि भारत में अभी तक संक्रमण की लड़ाई लड़ने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। ऐसे में देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए जेएनसीएएसआर की पहल खासी सार्थक कही जा सकती है।

एक सप्ताह का प्रशिक्षण
एक सप्ताह तक चलने वाले प्रशिक्षण को कक्षा की पढ़ाई और वास्तविक स्थितियों में उपचार दोनों शामिल है। इसके अलावा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रयोगशाला में संक्रमण की जांच से लेकर उपचार तक में बरती जाने वाली सावधानियों तक तो शामिल किया गया है।

ताकि पाठ्यक्रम को पूरी तरह के प्रैक्टिकल रखा जाए जिससे ट्रेनिंग लेने वाले प्रशिक्षुओं के लिए वास्तविक समय में इसकी उपयोगिता साबित हो सके। इसके लिए प्रसंस्करण की शिक्षा भी दी जा रही है। इसके लिए संक्रमण के उपचार के दौरान डेटा विश्लेषण और ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल को भी इसमें शामिल किया गया है। 

डीएसटी के सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि कुल मिलाकर यह क्रैश कोर्स देश में कोरोना संक्रमण की जंग लड़ने वालों के लिए उपयोगी सत्र के साथ पूरी तरह से वास्तविक स्थितियों के अनुरूप है। जिससे इसमें ट्रेनिंग लेने वालों को इसके प्रयोग में आसानी होगी। 

कौन ले सकता है प्रशिक्षण

साइंस और तकनीकी विभाग के अनुसार इस कोर्स के लिए मेडिकल में स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री करने वाले युवा आवदेन कर सकते हैं। प्रयोगशाला परीक्षण एमएलटी डिग्री भारत में किसी भी चिकित्सा संस्थान द्वारा ली गई हो, इसके अलावा वर्तमान में कोरोना संक्रमण के उपचार में लगे और प्रयोगशालाओं में जांच करने वालों को इसके लिए विशेष रूप से आवेदन के लिए आमंत्रित किया जाता है। पंजीकरण कराने वालों को रहने-खाने के साथ उपयुक्त पारिश्रमिक भी दिया जाएगा।  

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