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Dolphin: देश में 6300 से अधिक डॉल्फिन, यूपी में सर्वाधिक 2397 तो पंजाब में तीन; जानें अन्य राज्यों का हाल

Tue, 04 Mar 2025 12:25 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 04 Mar 2025 12:25 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर इस पहले सर्वे की रिपोर्ट जारी की। यह सर्वेक्षण आठ राज्यों की 28 नदियों में फैले 8,507 किलोमीटर के क्षेत्र में किया गया। गंगा नदी की डॉल्फिन, जो अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जानी जाती है, भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली और इसकी सहायक नदियों में पाई जाती है।

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First-ever survey finds over 6,300 river dolphins in country; highest in UP
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

देश की नदियों में डॉल्फिन का पहला सर्वे जारी हुआ है। इसके मुताबिक देश में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी तंत्र में 6324 डॉल्फिन हैं और इनमें सबसे अधिक 2,397 उत्तर प्रदश में हैं। इसके बाद बिहार में 2,220 और पश्चिम बंगाल में 815 डॉल्फिन पाई गईं। अन्य राज्यों में असम में 635, झारखंड में 162, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में 95 डॉल्फिन दर्ज की गईं। पंजाब में इनकी संख्या सबसे कम रही, जहां केवल 3 डॉल्फिन पाई गईं। इस उपलब्धि को सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकार की अटूट प्रतिबद्धता और सतत प्रयासों का नतीजा बताया है। उन्होंने प्रदेश वासियों एवं प्रकृति प्रेमियों को बधाई भी दी। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर इस पहले सर्वे की रिपोर्ट जारी की। यह सर्वेक्षण आठ राज्यों की 28 नदियों में फैले 8,507 किलोमीटर के क्षेत्र में किया गया। गंगा नदी की डॉल्फिन, जो अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जानी जाती है, भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली और इसकी सहायक नदियों में पाई जाती है। भारत में सिंधु नदी प्रणाली में गंगा नदी की डॉल्फिन की एक छोटी आबादी पाई जाती है, जो गंगा नदी डॉल्फिन की एक करीबी रिश्तेदार है।

‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ के हिस्से के रूप में, आठ राज्यों - उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब में नदी डॉल्फिन की आबादी का अनुमान लगाने के लिए पहली बार एक व्यापक सर्वेक्षण किया गया था। भारत में नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन की जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, यह विश्व के सबसे बड़े ताजे पानी के सर्वेक्षणों में से एक है, जिसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र में गंगा नदी डॉल्फिन की संपूर्ण शृंखला व व्यास नदी में सिंधु नदी डॉल्फिन को शामिल किया गया है। सर्वेक्षण में 6,324 गंगा नदी डॉल्फिन (रेंज: 5,977-6,688) और तीन सिंधु नदी डॉल्फिन होने का अनुमान लगाया गया। ये दोनों स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र के जैव-सूचक मानी जाती हैं। हालांकि ये प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणी में आती हैं और इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में सूचीबद्ध किया गया है।
 

2020 में शुरू हुई ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2020 को डॉल्फिन और अन्य जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट डॉल्फिन की घोषणा की। डॉल्फिन की आबादी की निगरानी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से नदी डॉल्फिन के लिए, जिनकी वृद्धि दर धीमी है और जो दुनिया के कुछ सबसे खतरे वाले आवासों में रहती हैं। सर्वे के दौरान 58 नदियों का मूल्यांकन किया गया। इनमें से 28 नदियों का नाव से सक्रिय रूप से सर्वेक्षण किया गया, जबकि 30 का अध्ययन सड़क सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया, जिसमें उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां ऐतिहासिक रूप से गंगा नदी डॉल्फिन देखी गई थी।

 

 डॉल्फिन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण
रिपोर्ट के अनुसार डॉल्फिन एक ‘अंब्रेला प्रजाति’ के रूप में कार्य करती हैं, जिसका संरक्षण इनके आवास और जैव विविधता पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस परियोजना का उद्देश्य नदी और समुद्री डॉल्फिनों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संरक्षित करना और सभी संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाना है। जिन प्रजातियों के संरक्षण से उनके आवास में रहने वाली दूसरी प्रजातियों का भी संरक्षण होता है, उन्हें अंब्रेला यानी छाता प्रजाति कहते हैं।

अभी भी डॉल्फिन के आवास, प्रजनन व्यवहार पर है सीमित जानकारी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉल्फिनों के आवास, प्रजनन स्थल, गतिविधियों और शिकार करने की आदतों को लेकर अभी भी सीमित जानकारी उपलब्ध है। हालांकि, कुछ शोधों से पता चला है कि ये प्रजातियां संगम स्थलों, नदी के मोड़ों और मध्य-धारा के द्वीपों को पसंद करती हैं। 20वीं सदी के अंत तक गंगा नदी में डॉल्फिनों की संख्या 4 से 5 हजार के बीच थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 1,800 रह गई है। 1980 के बाद से करीब 500 ज्ञात मौतें मत्स्य पालन में गलती से फंसने या शिकार के कारण हुई हैं।
 

सिंधु नदी डॉल्फिन केवल ब्यास नदी में पाई जाती है
रिपोर्ट के अनुसार भारत में सिंधु नदी डॉल्फिन केवल ब्यास नदी में मौजूद है और इसकी संख्या काफी कम है, जिससे इसके संरक्षण की सख्त जरूरत है। यह प्रजाति हर साल केवल एक या दो बच्चों को जन्म देती है, जो आमतौर पर गर्मी के महीनों में पैदा होते हैं। नवजात डॉल्फिन की लंबाई करीब 111 से 116.3 सेंटीमीटर (43.7 से 45.7 इंच) होती है और उनका वजन लगभग 10 से 20 किलोग्राम (22 से 44 पाउंड) के बीच होता है।
 

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