{"_id":"65c35f738cdfaf4247073cb7","slug":"first-ever-european-union-india-track-1-5-dialog-on-february-8-in-new-delhi-2024-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-EU: 'भारत-ईयू ट्रैक 1.5 वार्ता' आठ फरवरी को दिल्ली में, मानव रहित हवाई तकनीक के खतरों पर चर्चा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
India-EU: 'भारत-ईयू ट्रैक 1.5 वार्ता' आठ फरवरी को दिल्ली में, मानव रहित हवाई तकनीक के खतरों पर चर्चा
Wed, 07 Feb 2024 04:20 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 07 Feb 2024 04:20 PM IST
सार
भारत-यूरोपीय संघ(ईयू) ट्रैक 1.5 वार्ता आठ फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होगी।
विज्ञापन
यूरोपीय संघ और भारत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पहली भारत-यूरोपीय संघ(ईयू) ट्रैक 1.5 वार्ता आठ फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होगी। इस दौरान मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) तकनीक से जुड़े वर्तमान और उभरते खतरों को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश की जाएगी। साथ ही यूरोपीय संघ और भारत के प्रतिभागी क्षेत्रों में यूएएस खतरों से निपटने के लिए नियामक, सामरिक और खोजी प्रतिक्रियाओं के संबंध में चर्चा होने की संभावनाएं हैं।
विज्ञापन
इस वार्ता का उद्देश्य खास तौर पर उपभोक्ता-ग्रेड यूएएस तकनीक से जुड़े वर्तमान और उभरते खतरों की सीमा को बेहतर ढंग से समझना और चरमपंथी समूहों द्वारा इसके उपयोग को रोकना है। इस वार्ता के बारे में भारत में ईयू मिशन ने भी जानकारी दी है। ईयू मिशन ने बताया कि वार्ता के दौरान यूरोपीय संघ और भारत के प्रतिनिधी यूएएस खतरों से निपटने के लिए नियामक और सामरिक प्रक्रियाओं को लेकर रणनीति बनाएंगे।
विज्ञापन
यह बैठक यूरोपीय संघ और भारत के बीच जारी आतंकवाद रोधी गतिविधियों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि सुरक्षा और आतंकवादी खतरे लगातार मिश्रित प्रकृति के होते जा रहे हैं। वाणिज्यिक ड्रोन का इस्तेमाल इसका एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि एक ड्रोन पिज्जा या बिरयानी ले जा सकता है और उड़ा सकता है, तो साफ तौर से उनका उपयोग हथियार या विस्फोटकले जाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे में बहुत तेजी से विकसित हो रहे इस क्षेत्र में ड्रोन के खतरों का मुकाबला करने के लिए यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच जानकारी और अनुभव की साझेदारी प्रासंगिक और अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन