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आग लगने में किसी साजिश की आशंका से इनकार नहीं

Tue, 31 May 2016 10:05 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला
शशिधर पाठक/ अमर उजाला Updated Tue, 31 May 2016 10:05 PM IST
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fire in pulgaon army ammo depot
- फोटो : ANI
महाराष्ट्र में नागपुर के पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े हथियार डिपो में आग लगने से दो अधिकारियों सहित 17 लोगों की मौत हो गई है। इस मामले में ले. जनरल टी डेकोना, पूर्व महानिदेशक, आर्डिनेंस ने अमर उजाला संवाददाता शशिधर पाठक से बातचीत में कहा कि प्रथमदृष्टया जो जानकारी मिल रही है, उससे साफ है कि जब आग लगी तो आयुध डिपो बंद था। यानी कोई गोला-बारूद ले जाने या फिर किसी गतिविधि (हैंडलिंग) के दौरान यह हादसा नहीं हुआ। दूसरा यह कि पुलगांव में 15 स्थायी शेड हैं और उनमें से सिर्फ एक ही शेड में आग लगी। यह फैलकर दूसरे शेड तक नहीं पहुंची। इसकी एक वजह एक शेड के बाद खड़ी की गई मिट्टी की दीवार और अन्य उपाय हो सकती हैं। वहां एक शेड में 400 टन ही गोला-बारूद या हथियार हैं, इसलिए इससे अधिक का नुकसान नहीं हुआ है।
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उन्होंने कहा कि अब यह बात अलग है कि जिस शेड में आग लगी, उसमें हथियार (आयातित, स्वदेशी या फिर अपनी आयु पूरी कर चुके) रखे थे। लेकिन घटना को देखते हुए, आग को लेकर किसी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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मैं खुद पुलगांव डिपो में भी तैनात रहा हूं। डिपो में आग लगने की जांच में शामिल रहा हूं। अभी तक टीवी पर आ रही खबरों से यही लग रहा है कि जब आग लगी तो वह बहुत भयानक नहीं थी। इसलिए फायर फाइटिंग सदस्य और क्विक रिस्पांस टीम वहां पहुंची। उसने आग बुझाने के उपाय शुरू ही किए थे कि अचानक विस्फोट हो गया। यही वजह है कि इस डिपो में आग लगने के बाद इतने अधिक लोग मारे गए और घायल हुए। आप देखेंगे तो पाएंगे कि अभी तक किसी भी आयुध डिपो में आग लगने से इतने सैन्य कर्मी और आग बुझाने वाले कर्मी उसकी चपेट में नहीं आए हैं। इसलिए यह हादसा काफी कुछ इशारा भी कर रहा है। सेना ने जांच शुरू कर दी है और मुझे उम्मीद है कि जांच अधिकारी, खुफिया एजेंसी के लोग इसका पता लगा लेंगे।
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डेकोना ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आग लगाने की साजिश नहीं होती। लालगढ़ जट्टा डिपो में यही कारण था। एक डंप से आग लगी और दूसरे में फैल गई थी। सौ डंप जलकर खाक हो गए थे। भरतपुर डिपो में आग लगने का कारण कुछ और था। दरअसल पहले 60 प्रतिशत गोला-बारूद डिपो क्षेत्र में खुले में तिरपाल आदि से ढक कर रखे होते थे। तब आग आसानी से लग जाती थी। अब 90 प्रतिशत गोला-बारूद स्थायी पक्के डिपो में रखे हैं। इसलिए अब इसकी संभावना काफी कम है। इस आग का कारण भी जांच नतीजे के बाद ही सामने आएगा।

ले. जनरल रणवीर सिंह, महानिदेशक, सैन्य आपरेशनल महानिदेशालय (डीजीएमओ), भारतीय सेना ने बताया कि पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े हथियार डिपो में आग लगने की सूचना मिलते ही फायर फाइटिंग (दमकल कर्मी) टीम और क्विक रिएक्शन टीम ने तत्काल इस पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए। यह डिपो करीब 7,000 एकड़ में फैला है। फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है। यह केवल एक ही शेड (डंपिंग यार्ड) तक केंद्रित है और इसमें अति संवेदनशील हथियार रखे हुए थे।

पहले भी हो चुकी है आयुध डिपो में आग लगने की घटनाएं

fire in pulgaon army ammo depot
वर्धा जिले के पुलगांव में स्थित केंद्रीय आयुध डिपो भारत का सबसे बड़ा आयुध डिपो है। यह डिपो करीब 10 हजार एकड़ एरिया में फैला है। पुलगांव नागपुर से 110 किलोमीटर दूर है। फैक्ट्रियों में बनाए जाने वाले हर तरह के हथियार और गोला बारूद पहले यहां आते हैं, उसके बाद दूसरे डिपो में सप्लाई की जाती है। यहां गोला बारूद और आर्टिलरी के प्रयोग में लाए जाने वाले बारूद का स्टोरेज भी किया जाता है। यहां पर ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर एके-47 जैसे हथियार एवं गोला-बारूद रखे जाते हैं। अपनी निर्धारित अवधि पार कर चुके हथियारों को नष्ट करने का काम भी इसी आयुध डिपो में होते हैं।

अतीत में आयुध डिपो में आग लगने की घटनाएं
- तीन अप्रैल 2015 : श्रीगंगानगर जिले में लालगढ़ जाटान सैन्य क्षेत्र स्थित आयुध भंडार में आग लगी।
- नवंबर 2010 : पश्चिम बंगाल के बीनागुरी आयुध प्वाइंट में आग लगी, जिसमें 19 मीट्रिक टन बारूद नष्ट हो गया। हालांकि यह बारूद इस्तेमाल लायक नहीं था।
- 27 मार्च 2010 : पश्चिम बंगाल के पानागढ़ आयुध डिपो में आग लगी, जिसमें 332 मीट्रिक टन बारूद नष्ट हो गया।
-11 अगस्त 2007 : जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में खांडरू फील्ड आर्डनेंस डिपो में आग लगी। इसमें 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 लोग घायल हो गए।
- जून 2001 : शकूरबस्ती के आयुध डिपो में आग लगी।
- अप्रैल 2001 : पठानकोट के आयुध डिपो में आग लगी।
- 28 मई 2000 : कानपुर स्थित केंद्रीय आयुध भंडार में आग लगी।
- अप्रैल 2000 : भरतपुर के आयुध डिपो में आग लगी। इसमें 393 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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