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Finance Minister: 'ये नाटक कर रहे हैं', इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी के विरोध पर विपक्ष पर बरसीं वित्त मंत्री

Thu, 08 Aug 2024 08:06 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 08 Aug 2024 08:06 AM IST
सार

वित्त मंत्री ने कहा कि जिन नेताओं को जीवन और चिकित्सा बीमा के प्रीमियम पर जीएसटी के फैसले पर आपत्ति है, पहले उन्हें अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों से चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि जीएसटी परिषद की बैठक में उन्होंने भी अपनी राय दी थी।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : संसद टीवी

विस्तार

जीवन और चिकित्सा बीमा के प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के फैसले के चलते विपक्ष के निशाने पर आईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को जीवन और चिकित्सा बीमा के प्रीमियम पर जीएसटी के फैसले पर आपत्ति है, पहले उन्हें अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों से चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि जीएसटी परिषद की बैठक में उन्होंने भी अपनी राय दी थी।
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'यह विपक्ष का दोहरा मापदंड'
जीएसटी प्रीमियम पर बढ़ रहे विरोध के बीच सरकार ने साफ किया है कि प्रीमियम पर जीएसटी लगाने का फैसला जीएसटी काउंसिल का था। वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि 'जीएसटी आने से पहले भी मेडिकल इंश्योरेंस पर टैक्स था। यह कोई नया टैक्स नहीं है और यह सभी राज्यों में है।' वित्त मंत्री ने कहा कि 'यहां विरोध करने वालों ने, क्या उन्होंने अपने राज्यों में इस कर को हटाने के बारे में चर्चा की? क्या उन्होंने अपने-अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों को इस बारे में लिखा और उनसे इसे जीएसटी परिषद में उठाने के लिए कहा, जहां राज्यों की हिस्सेदारी दो तिहाई है? नहीं, लेकिन वे यहां विरोध कर रहे हैं। यह उनका दोहरा मापदंड है, यह उनका नाटक है।' 
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी जताई आपत्ति
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी जीवन और चिकित्सा बीमा प्रीमियम पर जीएसटी लगाने का विरोध करने वालों में शामिल हैं। गडकरी ने इसे लेकर वित्त मंत्री को पत्र भी लिखा है। 28 जुलाई को लिखे पत्र में गडकरी ने नागपुर में जीवन बीमा निगम कर्मचारी संघ की चिंताओं को उठाया था और कहा था कि बीमा पर जीएसटी लगाना 'जीवन की अनिश्चितताओं पर कर लगाने' के समान है। साथ ही, चिकित्सा बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी इस व्यवसाय के विकास के लिए बाधक साबित हो सकता है, जबकि यह क्षेत्र सामाजिक रूप से जरूरी है। पत्र में गडकरी ने बीमा प्रीमियम पर जीएसटी को वापस लेने के फैसले पर विचार करने की अपील की।
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राहुल गांधी ने बताया था सरकार की असंवेदनशील सोच
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भाजपा हर आपदा में 'कर अवसर' तलाशती है, जो कि उनकी असंवेदनशील सोच को दर्शाता है। राहुल गांधी ने लिखा कि 'मोदी सरकार ने उन लोगों से भी 24,000 करोड़ रुपये लूट लिए हैं, जो स्वास्थ्य संकट की स्थिति में किसी के सामने झुकने से बचने के लिए एक-एक पैसा बचाते हैं।' 


गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को बताया था कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और री-प्रीमियम से जीएसटी संग्रह के रूप में कुल 24,529.14 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी संग्रह 5,354 करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 7,638 करोड़ रुपये हो गया और वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह 8,262 करोड़ रुपये हो गया। 
 
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