भारत को कमजोर आंकने वालों के कारण हुई डीयू में हिंसा: जेटली
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लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के साउथ एशिया सेंटर में शनिवार को छात्रों के एक सवाल पर वित्त मंत्री ने यह बात कही। छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में पिछले दिनों आइसा और एबीवीपी के छात्रों के बीच झपड़ के बारे में उनकी प्रतिक्रिया पूछी थी। उन्होंने कहा कि कोई भी विचार जो देश को अलग-अलग करने की बात करता है, उससे वह नफरत करते हैं। जेटली ने कहा कि वह निजी तौर पर भारत और किसी भी समाज में बोलने की आजादी पर चर्चा के पक्षधर हैं।
'अलगाववादी और घोर वामपंथी एक ही भाषा बोल रहे'
लेकिन अगर आपको लगता है कि आपको देश की संप्रभुता पर चोट करने के लिए बोलने की आजादी दी गई तो उसे रोकने के लिए बोलने की आजादी का सामना करने को तैयार रहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि भारत को टुकड़े-टुकड़े में बांटने की बात करने के लिए बोलने की आजादी का तर्क दिया जा रहा है और जो इसका विरोध कर रहे हैं उन पर बोलने की आजादी को बाधित करने का आरोप लगाया जा रहा है। लेकिन यह पता होना चाहिए कि उनके पास भी बोलने की आजादी है।
उन्होंने हालांकि आगे कहा कि हिंसा कोई तरीका नहीं है। किसी भी समूह को हिंसा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सत्ता को कमजोर समझने वालों के बीच एक तरह का गठजोड़ है। अलगाववादी और घोर वामपंथी एक ही भाषा बोल रहे हैं।