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Subsidy: कृषि मंत्री शिवराज का अन्नदाताओं को वादा, सीधे बैंक खातों में आएगी खाद सब्सिडी! सरकार ने की ये तैयारी

Mon, 27 Jan 2025 06:40 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 27 Jan 2025 06:40 PM IST
सार

Fertilizer subsidy:  केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि,उर्वरक सब्सिडी को डायरेक्ट किसानों के बैंक अकाउंट में देने का विचार चल रहा है। अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी किसानों की बजाय सीधे रासायनिक खाद बनाने वाली कंपनियों को जाती है।

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Fertilizer subsidy will come directly in farmers's bank account,  government made this preparation
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के किसानों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक बड़ा तोहफा देने जा रही है। यह ऐसा तोहफा होगा जिसमें उनके बैंक खाते में पीएम सम्मान निधि के अलावा भी सीधे पैसा किसानों के खाते में आएगा। दरअसल, केंद्र सरकार बड़ी-बड़ी उर्वरक कंपनियों को फर्टिलाइजर सब्सिडी देने की बजाय अब उसे सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में देने की तैयारी कर रही है।
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को अपने आवास पर किसानों से संवाद के दौरान इस बात की जानकारी दी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि,उर्वरक सब्सिडी को डायरेक्ट किसानों के बैंक अकाउंट में देने का विचार चल रहा है। अभी करीब 2 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी किसानों की बजाय सीधे रासायनिक खाद बनाने वाली कंपनियों को जाती है।  इसी सब्सिडी की वजह से ही यूरिया की बोरी 265 रुपये में मिलती है। जबकि सब्सिडी न हो तो वही बोरी 2,400 रुपए में आएगी। लेकिन, अभी दिक्कत यह है कि यूरिया और डीएपी का उपयोग अन्य जगहों में भी हो जाता है। ऐसे में हम कोशिश करेंगे कि विश्वस्त तंत्र बन जाए तो किसान के खातों में ही सब्सिडी मिले।
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चौहान ने कहा कि, सरकार अभी पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 10 करोड़ किसानों को सालाना छह-छह हजार रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में देती है। लेकिन फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए अभी और काम करना होगा। यह देखना होगा कि किसके पास कितनी खेती है। उस आधार पर उसे खाद की सब्सिडी मिले।  पीएम किसान योजना के तहत सालाना 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर फर्टिलाइजर सब्सिडी के 2 लाख करोड़ रुपये और डायरेक्ट किसानों को मिलेंगे तो उनका बैंक बैलेंस और बढ़ जाएगा।  
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चौहान ने कहा, हमारी चीज सस्ती बिकती है लेकिन दिल्ली में आकर महंगी हो जाती है। किसान के घर से बिकने वाली कृषि उपज का दाम और उपभोक्ता द्वारा भुगतान की जाने वाली रकम के अंतर को हम काम करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। किसान दिल्ली में अपनी उपज बेचे और जो भाड़ा लगता है उसमें आधा केंद्र और आधा राज्य सरकार दे दे, इस पर विचार हो रहा है। किसान अकेले मेहनत नहीं करता बल्कि उसका पूरा परिवार मेहनत करता है। कई बार हम मौसम पर निर्भर रहते हैं। हमारी फसल भी खराब होती है, लेकिन कई बार उसे सही दाम नहीं मिलता। इसलिए हम नीतिगत बदलाव करके किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। अब हम इस तरह की व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसान अपना कृषि उत्पाद सीधे किसानों को बेच सके। 



 
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