फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Felicitating convicts in Bilkis Bano case was in `absolute bad taste', says judge who presided over trial

Bilkis Bano Case: 11 आरोपियों को सजा सुनाने वाले रिटायर्ड जज बोले, रिहा हुए दोषियों का सम्मान करना गलत

Tue, 23 Aug 2022 10:22 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Amit Mandal Updated Tue, 23 Aug 2022 10:22 PM IST
सार

साल्वी ने संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कहा कि लेकिन उनका सत्कार करना बिल्कुल गलत है। दोषियों को खुद बधाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए थी। 

विज्ञापन
Felicitating convicts in Bilkis Bano case was in `absolute bad taste', says judge who presided over trial
बिलकिस बानो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सजा में छूट देना सरकार के अधिकार में है, लेकिन बिलकिस बानो मामले के दोषियों का कुछ लोगों द्वारा सम्मान करना बिल्कुल भी सही नहीं था, 14 साल पहले उन्हें दोषी ठहराने वाले न्यायाधीश ने मंगलवार को यह टिप्पणी की। 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो के सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले ने नाराजगी पैदा की है। इनकी रिहाई पर स्थानीय नेताओं द्वारा अभिनंदन किया गया था।

विज्ञापन


पूर्व जज साल्वी बोले, मेरा फैसला मेरा कर्तव्य था 
यूनाइटेड अगेंस्ट इनजस्टिस एंड डिस्क्रिमिनेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम 'सॉलिडैरिटी विद बिलकिस बानो' में सेवानिवृत्त न्यायाधीश यू डी साल्वी ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मैंने (उन्हें दोषी ठहराने में) कुछ खास किया। मेरा फैसला मेरा कर्तव्य था। जस्टिस साल्वी ने कहा कि राज्य को छूट देने का अधिकार है। यह कानून के तहत राज्य को दी गई शक्ति है। उन्होंने कहा कि वह दोषियों को समय से पहले रिहा करने के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि मैंने संबंधित रिपोर्ट नहीं देखी है और न ही मुझे कुछ नहीं पता है कि किन तथ्यों पर विचार किया गया। साल्वी ने संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कहा कि लेकिन उनका सत्कार करना बिल्कुल गलत है। दोषियों को खुद बधाई स्वीकार नहीं करनी चाहिए थी। 
विज्ञापन


इस साल 15 अगस्त को गुजरात सरकार द्वारा उनकी रिहाई की अनुमति दिए जाने के बाद 11 दोषियों को गोधरा उप-जेल से बाहर कर दिया गया। बानो द्वारा दावा किए जाने के बाद कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं, 2004 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुकदमे को मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया था। साल्वी की अध्यक्षता में यहां सीबीआई मामलों की एक विशेष अदालत ने आरोपियों को 21 जनवरी, 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साल्वी ने यह भी कहा कि वह अपने फैसले को फिर से पढ़ना चाहता हैं क्योंकि यह बहुत समय पहले की बात है, लेकिन फैसला उपलब्ध नहीं है। गुजरात सरकार द्वारा दोषियों को दी गई छूट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed