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समाधान: कोरोना से हो रहा डायबिटीज और घट रही जिंदगी? चिकित्सा विशेषज्ञ ने दिए ये जवाब

Sat, 05 Jun 2021 03:31 PM IST
सुरेंद्र जोशी आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 05 Jun 2021 03:31 PM IST
सार

कोरोना में डायबिटिज के मरीज की बढ़ाती है दिक्कतें। कोरोना से डायबिटीज होने के नहीं है पुख्ता प्रमाण। अनियंत्रित शुगर कोविड संक्रमण में हो सकती है घातक।
 

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Solution: Diabetes and life decreasing due to corona? Medical expert gave these answers
डायबिटिज और कोरोना - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिन मरीजों को एक बार कोरोना हो गया, उनमें शुगर की बीमारी हो रही है। ऐसा होने से लोग ज्यादा दिनों तक जी नहीं पाएंगे, ऐसी तमाम बातें और आशंकाएं कुछ समय से पूरे देश में लोगों को डरा रही हैं। हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। कम से कम मेडिकल साइंस में कोरोना की वजह से मरीजों में शुगर की बीमारी हो गई हो, इसके अब तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। 

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यह कहना है दिल्ली एम्स के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के प्रोफेसर निखिल टंडन का। प्रोफेसर निखिल ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में ऐसे बहुत सारे सवालों के जवाब दिए, जो लोगों को इस बीमारी के दौर में न सिर्फ जागरूक करने वाले हैं बल्कि उनको सेहतमंद भी बनाएंगे।
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सवाल: क्या यह सच है कि जिन मरीजों को कोरोना हुआ है, उनमें शुगर की बीमारी हो रही है?
जवाब: मेडिकल साइंस में तो ऐसे कोई पुख्ता प्रमाण अब तक सामने नहीं आए हैं। क्योंकि 50  फीसदी मरीजों में शुगर की बीमारी के लक्षण पता नहीं चलते हैं। ऐसे में लोग कोरोना से ठीक होने के बाद जब अपनी जांच करा रहे हैं तो उनको शुगर की बीमारी का पता चल रहा है। संदेश किया जाता है कि इस बीमारी की वजह से शुगर हो गई। मेडिकल साइंस में और हमारी अपनी रिसर्च में अभी तक ऐसा कोई भी केस नहीं आया है कि कोरोना की वजह से किसी को शुगर हुई हो। 

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सवाल: तो, हम कब कह सकते हैं कि कोविड मधुमेह का कारण बना है?

जवाब: कोविड के समय यदि हम एचबीए-1सी का परीक्षण करते हैं तो हमें पिछले तीन महीनों का औसत शुगर के स्तर की जानकारी मिल जाती है। यदि इसके स्तर में बढ़ोतरी हो जाती है तो इसका मतलब है कि व्यक्ति कोविड संक्रमित होने से पहले ही मधुमेह का मरीज था। यदि एचबीए-1सी सामान्य है तो हमें कोविड के ठीक होने के बाद ब्लड शुगर के स्तर की दोबारा जांच करानी चाहिए। इस दौरान स्टेरॉयड थेरेपी (यदि उपयोग की जाती है) को बंद कर दिया जाए तो उसके बाद ग्लूकोज का स्तर सामान्य हो जाएगा। यदि बीमारी से ठीक होने या स्टेरॉयड या दोनों के बंद होने के कुछ सप्ताह बाद भी ब्लड शुगर बढ़ा रहता है तो जरूर यह संभावना बढ़ जाती है कि कहीं कोविड की वजह से तो शुगर नहीं हुई। हालांकि अभी तक ऐसे केस दर्ज नहीं हुए हैं।

सवाल: क्या यह जानकारी डॉक्टरों को अपने रोगियों का इलाज करने में मदद करती है?

जवाब : सही मायने में यह परीक्षण डॉक्टरों को यह जानने में मदद करता है कि क्या कोविड 19 रोगी में ब्लड शुगर का स्तर अस्थायी है, जिसकी हमने अभी चर्चा की है। इन कारणों को समझने और बीमारी के दीर्घकालीन प्रबंधन की आवश्यकता है। पहले मामले में, जैसे ही व्यक्ति कोविड से ठीक होता है, या जब स्टेरॉयड बंद कर दिया जाता है, तो शुगर का स्तर सामान्य हो जाता है। इन रोगों को ठीक होने के बाद अपने शुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए किसी दवा की आवश्यकता नहीं होती है।

सवाल: वायरल संक्रमण से ब्लड शुगर का स्तर क्यों बढ़ जाता है?

जवाब: कोई भी संक्रमण या वायरल बुखार शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है। यह मूल रूप से उस तंत्र का परिणाम है, जिसे शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए नियोजित करता है। कुछ मामलों में उस संक्रमण के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाएं शुगर के स्तर को बढ़ा देती हैं। कोविड में कई बार गंभीर रोगियों को स्टेरॉयड देने की आवश्यकता पड़ी, जिससे रोगियों की ब्लड शुगर बढ़ गई।

सवाल: क्या डायबिटीज के चलते कोविड रोगियों का इलाज मुश्किल हुआ।

जवाब: अधिकतर मामलों में अच्छी तरह से नियंत्रित मधुमेह वाला व्यक्ति कोविड उपचार के लिए उसी तरह प्रतिक्रिया करता है जैसे एक गैर-मधुमेह रोगी करता है। हालांकि लंबे समय से और खराब नियंत्रित मधुमेह वाले लोगों में या गुर्दे या हृदय रोग जैसी मधुमेह संबंधी जटिलताओं वाले लोगों में कोविड का इलाज अधिक जटिल हो सकता है।

सवाल: मधुमेह मरीज को कोविड 19 संक्रमण हो जाता है तो गंभीर संक्रमण से बचाने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब: मधुमेह से गुर्दे, हृदय और आंखों में जटिलताएं हो सकती हैं। ऐसे रोगियों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है और उन्हें अपने ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य रखने के लिए आहार, व्यायाम और दवा के बारे में बहुत सावधानी और सतर्कता अपनानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चूंकि ऐसे रोगियों में गंभीर कोविड होने का अधिक खतरा होता है, इसलिए उन्हें टीका अवश्य लगवाना चाहिए। वैक्सीन गंभीर बीमारी और मृत्यु दर की संभावना को काफी कम कर देता है। यदि कोई मधुमेह रोगी कोविड-19 से संक्रमित होता है तो उस व्यक्ति को इसके बारे में तुरंत डॉक्टर को सूचित करना चाहिए। इससे उनके उपचार करने में डॉक्टर को अधिक सहूलियत होगी।

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