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आंदोलन के लिए जान देने वाले अन्नदाताओं को आज श्रद्धांजलि देंगे किसान, देश भर में होंगी सभाएं
Sun, 20 Dec 2020 12:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 20 Dec 2020 12:28 AM IST
सार
- देश के सभी जिलों, तहसील व गांवों में श्रद्धांजलि सभाएं होंगी
- दिल्ली के धरना स्थलों पर होगा मुख्य कार्यक्रम
- संयुक्त किसान मोर्चा ने आयोजन के लिए एक पोस्टर भी जारी किया है
- सभाओं में आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी
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सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
समूचे उत्तर भारत में चल रही शीत लहर के बीच किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। कड़ाके की ठंड में भी किसानों ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद की हुई है। इस बीच आंदोलन के दौरान जान गंंवाने वाले किसानों को याद किया जाएगा।
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किसान संगठनों ने रविवार काे पूर्व घोषित देशव्यापी श्रद्धांजलि सभा के बारे में भी आपस में चर्चा की। किसान नेताओं का मानना है कि खेती-किसानी बचाने के लिए करीब 30 किसानों ने अपने जान दी है। इनकी याद में होने वाली श्रद्धांजलि सभाओं से देश के हर गांव का किसान आंदोलन से जुड़ जाएगा।
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि रविवार को देश के सभी जिलों, तहसील व गांवों में श्रद्धांजलि सभाएं होंगी। इसमे आंदोलन के दौरान जान गंंवाने वालों को याद किया जाएगा। जबकि भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के ओंकार सिंह ने बताया कि किसानों की याद में 11 बजे से एक बजे के बीच श्रद्धांजलि सभाएं होंगी।
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इससे देश का हर किसान आंदोलन से जुड़ जाएगा और तीनो कानूनों के खिलाफ मजबूती से वह अपनी आवाज रखेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार के आयोजन के लिए एक पोस्टर भी जारी किया है। इसमें आंदोलन में जान गंंवाने वाले किसानों की तस्वीरें लगी हैं। इसे अलग-अलग माध्यमों से पूरे देश में भेजा रहा है।
दूसरी तरफ सिंधु, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर के धरना स्थलों पर सभाएं होंगी। मुख्य आयोजन सिंघु बॉर्डर पर होगा। यहां किसान संगठनों के नेता मौजूद रहेंगे। किसान जान देने वाले अपने भाइयों को श्रद्धांजलि देंगे और सरकार के रवैए पर चर्चा करेंगे। श्रद्धांजलि सभा खत्म होने के बाद आखिर में सिंघु बॉर्डर पर दोपहर बाद दो बजे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं की बैठक होगी।
इसमें आंदोलन के आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार हर तरीके से आंदोलन को तोड़ने की कोशिश कर रही है लेकिन आंदोलन हर दिन ज्यादा बड़ा होता जा रहा है। रविवार की देशव्यापी मुहिम से सरकार को पता चल जाएगा कि किसानों का आंदोलन किस स्तर पर जमीन से जुड़ा हुआ है।
उत्पीड़न नहीं रुका तो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे बंद : वीएम सिंह
यूपी गेट पर शनिवार शाम किसान संगठन ने प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार को किसानों का उत्पीड़न बंद करने को कहा। चेतावनी दी कि यदि किसानों को रोका गया और उनके परिवारों पर किसी तरह का दबाव बनाया गया तो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सभी 14 लेन बंद कर दी जाएंगी। राकेश टिकैत व अन्य किसानों के साथ संयुक्त वार्ता में किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि पुलिस प्रशासन आंदोलन में आने वाले किसानों को जगह-जगह रोक रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया जा रहा है।
आंदोलन में बैठे किसानों की गाड़ियों के नंबर के आधार पर पुलिस उनके घर जाकर परिवार पर किसानों को वापस बुलाने का दबाव बना रही है। संगठन ने किसानों के उत्पीड़न के समाधान के लिए मेरठ कमिश्नर और पुलिस अधिकारियों को रविवार सुबह वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।