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कृषि कानूनों की वापसी का फैसला: किसान बोले- एमएसपी का मुद्दा अभी बाकी है, गारंटी मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई

Fri, 19 Nov 2021 02:36 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 19 Nov 2021 02:36 PM IST
सार

शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' ने चर्चा करते हुए कहा, ये जीत अभी अधूरी है लड़ाई अभी बाकी है। सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनाव का दबाव, पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और राष्ट्रव्यापी होता आंदोलन, इन तमाम कारणों को महसूस करते हुए इन काले कानूनों को वापस लिया है। पंजाब और हरियाणा राज्य चाहते थे कि ये तीनों काले कानून वापस हो जाएं, शेष भारत के राज्यों की मांग थी कि एमएसपी गारंटी का कानून बनाए जाए...

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Farmers said, MSP issue is still pending, fight will continue till guarantee is given by centre
किसान नेता शिव कुमार कक्का - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के किसानों के हठ के आगे आखिरकार केंद्र की मोदी सरकार को झुकना पड़ा। पीएम मोदी ने प्रकाश पर्व के दिन विवादित कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है। पीएम ने किसानों से अपने घर लौटने की अपील भी की है। इन सबके बीच किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे किसान आंदोलन तत्काल वापस लेने के मूड में नहीं हैं।

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मोदी सरकार के कृषि किसानों को वापस लेने के फैसले पर अमर उजाला ने संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य और किसान आंदोलन के प्रमुख नेता शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' से चर्चा की। अमर उजाला से बातचीत में शिवकुमार शर्मा ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों के वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार इन कानूनों के कारणों बहुत दबाव में थी। सरकार साल भर में अपना बहुत नुकसान करवा चुकी है। आगे सरकार को आगे भी इससे ज्यादा नुकसान होने की संभावना थी। इसलिए सरकार ने ये फैसला लिया है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, भाजपा सांसद वरुण गांधी समेत कई भाजपा सांसद भी सरकार के इन काले कानून के खिलाफ बोल रहे थे। सरकार ने एमएसपी के गारंटी के कानून की बात अभी नहीं की है। हमारी दो प्रमुख मांग थी एक, सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लें और दूसरी, एमएसपी पर गारंटी का कानून बनाए और जब तक सरकार एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनाती है तब तक किसान आंदोलन चलता रहेगा।
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अभी 50 फीसदी मांग ही हुई पूरी

शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' ने चर्चा करते हुए कहा, ये जीत अभी अधूरी है लड़ाई अभी बाकी है। सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनाव का दबाव, पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और राष्ट्रव्यापी होता आंदोलन, इन तमाम कारणों को महसूस करते हुए इन काले कानूनों को वापस लिया है। पंजाब और हरियाणा राज्य चाहते थे कि ये तीनों काले कानून वापस हो जाएं, शेष भारत के राज्यों की मांग थी कि एमएसपी गारंटी का कानून बनाए जाए। शुरू से ही ये दोनों मांगें किसान संगठनों के लिए बराबर रही हैं। अभी 50 फीसदी मामला ही तय हुआ है जबकि 50 फीसदी मांगें अभी हमारी बाकी हैं। अभी आंदोलन वापस नहीं होगा फिलहाल ये जारी रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा की कमेटी में कल निर्णय होगा कि आगे की रणनीति क्या होगी।

एमएसपी पर गारंटी कानून बनाए सरकार

एमएसपी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमेटी बनाने के फैसले पर किसान नेता शिवकुमार शर्मा कहते हैं कि कमेटियों के परिणाम कभी अच्छे नहीं रहे हैं। आजादी के बाद से किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए पांच आयोग बन चुके हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने आयोगों की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। हमारा यह मानना है कि एमएसपी पर गारंटी कानून बना दें। अगर सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया है तो हम सरकार को धन्यवाद देते हैं और अब एमएसपी पर गारंटी कानून बना दें, उसके बाद किसान आंदोलन समाप्त होगा जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही एलान कर दिया था कि हम 2024 तक बैठेंगे। काले कानूनों को वापस लेने को लेकर किसान तप और तपस्या कर रहे थे और अब जब तक एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बन जाता तब तक हम बैठे रहेंगे।

संघ के संगठन भी कर रहे थे विरोध

आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ ने इन कानूनों का विरोध भी किया और ज्ञापन भी दिया था। उन्होंने भी मांग करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों में सुधार की जरूरत है। इन कानून का किसान विरोध कर रहे हैं। संगठन का तर्क था कि केंद्र सरकार को प्रमुख कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान का प्रावधान जोड़ने के लिए या तो एक नया कानून लाना चाहिए या पिछले साल बनाए गए कृषि-विपणन कानूनों में बदलाव करना चाहिए।

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