किसानों ने कहा- सरकार पूरी तैयारी के साथ नहीं आई थी इसलिए बेनतीजा रही बैठक
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किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को विज्ञान भवन में केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई समिति के साथ करीब चार घंटे चर्चा की। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में 35 सदस्य शामिल हुए थे। फिलहाल इस बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है। तीन दिसंबर को एक बार फिर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बैठक होगी।
किसानों का कहना है कि बैठक में सरकार पूरी तैयारी के साथ नहीं आई थी। इसलिए कोई निर्णय नहीं हुआ है। हमने सरकार से साफ शब्दों में कह दिया है कि केंद्र सरकार तय नहीं करेगी कि कौन सा व्यक्ति किसानों की तरफ से शामिल होगा और कौन नहीं। ये हम तय करेंगे कि हमारी तरफ से बैठक में कौन शामिल होगा।
आज हुई इस बैठक में शामिल हुए किसान नेता हरपाल सिंह ने कहा, 'सरकार इस बैठक में पूरी तैयारी के साथ नहीं आई थी। बैठक शुरू होते ही सरकारी अधिकारी हमें कृषि विधेयकों के फायदे गिनाने लग गए। वे हमें बता रहे थे कि इस कानून से किसानों का क्या फायदा होगा।'
उन्होंने कहा केंद्र सरकार के अधिकारियों की पूरी बात सुनने के बाद हमने सरकार से दो टूक कह दिया कि किसी भी कीमत पर हम ये नए कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। हरपाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक हमारी मांगे नहीं मान लेती तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
कमेटी नहीं सभी लोग करेंगे चर्चा
किसान नेता जोगिंदर सिंह ने अमर उजाला से कहा, 'पूरी बातचीत के दौरान सरकार का रवैया ठीक था, लेकिन वे हम पर बार-बार कानून को स्वीकार करने की बात थोप रहे थे। इसके चलते ही बैठक में कोई निर्णय नहीं हो सका। दोबारा हम लोगों की बैठक अब तीन दिसंबर को होगी।'
उन्होंन कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे हमने खारिज कर दिया है। हमने सरकार से कहा कि आज जितने लोग आपसे चर्चा के लिए आए हैं उतने ही अगली बार भी आएंगे। पांच चुनिंदा लोग सरकार से संवाद करेंगे बाकी सब बैठक में उपस्थित रहेंगे।'
किसान संगठनों की तरफ से केंद्र सरकार को चुनिंदा किसान नेताओं को बैठक में शामिल करने के संदर्भ में एक पत्र भी भेजा गया है।
अच्छी रही बैठक: कृषि मंत्री तोमर
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के साथ बैठक अच्छी रही। तीन दिसंबर को फिर से बातचीत करने का फैसला लिया है। हम चाहते हैं कि छोटे संगठन बनें, लेकिन किसान नेताओं की मांग है कि हर किसान से बातचीत होनी चाहिए। हमें हर किसान से बात करने में कोई परेशानी नहीं है। हम किसानों से आंदोलन खत्म कर बातचीत के लिए आने की अपील करते है।
'मंत्री जी! आप बार्डर पर आएं लंगर भी छका जाएगा'
किसान नेता सुखपाल सिंह ने अमर उजाला से कहा, बैठक के दौरान जब चाय का ब्रेक हुआ तो मंत्रियों की तरफ से नेताओं को साथ में चाय पीने का आग्रह किया गया। जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया। किसानों ने मंत्रियों से कहा कि आप लोग सिंघु बॉर्डर पर हमारे बीच आइए, चाय क्या लंगर भी छका जाएगा।
आंदोलन से दिल्ली-एनसीआर में मुश्किलों का दौर जारी
किसानों ने सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, मेरठ रोड, गाजियाबाद रोड समेत अन्य जगहों पर डेरा डाल रखा है। ट्रालियों में ही किसानों ने अपना घर बना लिया है। यहीं खाना बन रहा है तो यहीं नहाने और कपड़े धोने का इंतजाम है। जगह-जगह लंगर लग रहे हैं। धरने वाले धरने पर बैठे हैं। खाना बनाने वाले खाना बना रहे हैं। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है।
आंदेलन में शामिल सभी किसानों का कहना है कि जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी हम लोग यहां से नहीं जाएंगे। वहीं किसानों ने प्रदर्शन के लिए बुराड़ी के निरंकारी मैदान में जाने से इनकार कर दिया है। आंदोलन से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को ट्रैफिक को लेकर काफी मुश्किलें हो रही हैं। दिल्ली से गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद तक जाम ही जाम है।
गौरतलब है कि हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पिछले पांच दिनों से धरने पर है। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ उनका यह धरना मंगलवार को छठवें दिन में प्रवेश कर गया। इन कानूनों के बारे में किसानों को आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।