दो राज्य मंत्रियों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर आज करेंगे बैठक
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर आज दो राज्य मंत्रियों कैलाश चौधरी और पुरुषोत्तम रूपाला के साथ बैठक करेंगे। बता दें कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का समर्थन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली को घेरकर बॉर्डरों पर हजारों किसान डटे हैं।
वहीं देश के तमाम राजनीतिक दल आठ दिसंबर को किसानों के 'भारत बंद' के आह्वान के पक्ष में मैदान में उतर आए हैं। वहीं, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति के बाद आम आदमी पार्टी ने भी बंद के पूर्ण समर्थन का एलान कर दिया है।
Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar (in file photo) to hold a meeting with MoS Kailash Choudhary and MoS Parshottam Rupala today pic.twitter.com/bCkHrDMmVq
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 6, 2020
प्रदर्शनकारी किसान असली किसान नहीं लगते- कैलाश चौधरी
उधर, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने दिल्ली में जारी किसान आंदोलन को लेकर कहा है कि प्रदर्शनकारी किसान असली किसान नहीं लगते। असली किसान तो खेत में काम कर रहा है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह किसानों को भड़का रहा है। चौधरी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार लिखित में दे सकती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बरकरार रखा जाएगा। चौधरी ने आंदोलन कर रहे किसानों को लेकर बयान में कहा, 'मुझे नहीं लगता ये असली किसान हैं। जो असली किसान हैं वे अपने खेत में काम कर रहे हैं।'
किसानों से उम्मीद अशांति नहीं फैलने देंगे
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री चौधरी ने आगे कहा कि मुझे प्रधानमंत्री मोदी और किसानों में विश्वास है। मुझे विश्वास है कि किसान कोई ऐसा फैसला नहीं लेंगे, जिससे देश में अशांति का माहौल बने। इन कानूनों से किसानों को आजादी मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता कि असली किसान, जो अपने खेत में काम कर रहा है, वो इस आंदोलन को लेकर चिंतित है।
भारत बंद को कांग्रेस का समर्थन
उधर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस अपने हर ऑफिस में आठ दिसंबर को प्रदर्शन करेगी। इधर कैलाश चौधरी ने कहा कि भारत बंद होने की वजह से देश को आर्थिक नुकसान होगा। चौधरी ने कहा कि कल जो बैठकें हुईं, उस पर किसानों के सुझाव पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने आगे कहा कि किसानों को यह सोचना चाहिए कि कैसे उनका राजनीतिकरण हो रहा है और लोगों को फुसलाया जा रहा है।