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तीनों कानूनों पर रोक से मकसद पूरा, मानें किसान, घर लौटें: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 13 Jan 2021 03:21 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 13 Jan 2021 03:21 AM IST
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Farmers Protest Supreme Court passing orders stay on all three agricultural laws appeal to farmers to return home
किसान आंदोलन - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, हम किसानों के प्रदर्शन से नहीं रोक रहे हैं। मगर, अदालत ने अप्रत्याशित आदेश पारित कर तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है। इससे यह माना जाना चाहिए कि फिलहाल प्रदर्शन कर रहे किसानों का उद्देश्य पूरा हो गया है। संगठनों को अपने सदस्यों को वापस घर लौटने के लिए कहना चाहिए। उन्हें आजीविका की ओर लौट जाना चाहिए। पिछले 48 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन और कई दौर की बातचीत के बावजूद केंद्र सरकार को मिली असफलता के बाद शीर्ष अदालत ने यह निर्णय लिया है।

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मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा कि अब किसानों को खुद की और दूसरों की जान की भी रक्षा करनी चाहिए। तीनों कानूनों पर रोक का जब फैसला आया तो वकील एमएल शर्मा ने खुश होकर सुप्रीम कोर्ट में कहा, चीफ जस्टिस एसए बोबडे साक्षात भगवान हैं। शर्मा लगातार केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे।
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वहीं, कोर्ट किसान संगठनों के एक और वकील विकास सिंह ने जब कहा कि किसानों को अपने प्रदर्शन के लिए प्रमुख जगह चाहिए, नहीं तो आंदोलन का कोई मतलब नहीं रहेगा। रामलीला मैदान या बोट क्लब पर प्रदर्शन की मंजूरी मिलनी चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा, किसान दिल्ली के पुलिस आयुक्त से रामलीला मैदान या किसी और जगह पर प्रदर्शन के लिए इजाजत मांगें।
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प्रदर्शन में खालिस्तानी कर चुके हैं घुसपैठ, कोर्ट ने मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के बीच प्रतिबंधित संगठनों के मौजूद होने के आरोप पर केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, खुफिया ब्यूरो के जरूरी इनपुट के साथ हम बुधवार को हलफनामा देंगे। दरअसल, कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फॉर्मर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा, हमारे मुवक्किल इस केस में कृषि कानूनों के समर्थन में दखल देना चाहते हैं। एसोसिएशन ने जो अर्जी दी है, उसमें आरोप लगाया गया है कि सिख फॉर जस्टिस जैसे समूह इन प्रदर्शनों में शामिल हैं।

नरसिम्हा ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधित संगठन भी किसानों के बीच हैं। तब सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या ये आरोप सही हैं? इस पर वेणुगोपाल ने कहा, हमें बताया गया है कि खालिस्तानी इन प्रदर्शनों में घुसपैठ कर चुके हैं। सीजेआई ने कहा, अगर कोई प्रतिबंधित संगठन घुसपैठ की है और कोई यह आरोप ऑन रिकॉर्ड लगा रहा है तो आप इसकी पुष्टि करें। आप बुधवार तक हलफनामा दें।

...तो न जाने क्या हो जाएगा
इससे पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, गणतंत्र दिवस परेड निश्चित रूप से बेदाग होनी चाहिए। तब सीजेआई ने कहा, वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने मंगलवार की सुनवाई के दौरान कहा था कि कोई ट्रैक्टर रैली नहीं होगी। इस पर साल्वे ने कहा, दवे आज मौजूद नहीं हैं और दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में एक अर्जी दी है।

इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि जब एक लाख लोगों का हुजूम गणतंत्र दिवस के दिन शहर में घुसेगा तो कोई नहीं जानता है कि क्या हो जाएगा? इस पर सीजेआई ने कहा, यह पुलिस की शक्ति है कि वह इसे नियंत्रित करे और जांचे कि किसी प्रदर्शनकारी के पास हथियार तो नहीं है। इसके बाद पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई अगले सोमवार को तय कर दी।

प्रधानमंत्री से चर्चा के लिए नहीं कह सकते
आदेश सुनाए जाने से पहले कानूनों को चुनौती देने वाले वरिष्ठ वकील एमएल शर्मा ने कहा, किसान कह रहे हैं कि कई लोग चर्चा करने आए, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं आए, जो मुख्य व्यक्ति हैं। इस पर सीजेआई ने कहा, हम प्रधानमंत्री से बैठक में जाने को नहीं कह सकते। वे इसमें पक्षकार नहीं हैं। प्रधानमंत्री के दूसरे अफसर यहां पर मौजूद हैं।


बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे लौटेंगे
वहीं, एक और वकील एपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि किसानों ने कहा है कि वे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों को वापस भेजने को तैयार हैं। इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा, हम रिकॉर्ड में लेकर इस बात की तारीफ करना चाहते हैं।

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