किसान आंदोलन: कृषि मंत्री तोमर बोले, प्रस्तावों पर नहीं मिला जवाब, हम कानून में बदलाव को तैयार
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देश में लगभग दो हफ्तों से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सरकार और किसान संगठनों के नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हम किसानों से बातकर समस्या का समाधान चाहते हैं। किसानों की सभी समस्याओं पर विचार कर रहे हैं। तोमर ने कहा कि हमने किसानों से पूछा कि कृषि उपज खरीदी बिक्री की एपीएमसी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या करना चाहिए, इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
कृषि मंत्री ने कहा, 'हमने उन्हें (किसानों) को प्रस्ताव दिया है। उन्होंने इस पर चर्चा की लेकिन हमें उनसे कोई जवाब नहीं मिला है। हमें मीडिया के माध्यम से पता चला कि उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। कल मैंने कहा था कि अगर वे चाहते हैं, तो हम निश्चित रूप से प्रस्ताव के बारे में बात कर सकते हैं। हमें उनसे अभी बातचीत का प्रस्ताव मिलना बाकी है। जैसे ही हमें उनसे प्रस्ताव मिलेगा हम तैयार हो जाएंगे।'
In our proposal, we have made an effort to suggest a solution to their objections. They should leave agitation and take the path of discussion. Govt is ready for talks: Agriculture Minister Narendra Singh Tomar #FarmLaws https://t.co/g6hApHGNRl
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 11, 2020
समाधान मिलने की जताई उम्मीद
तोमर ने कहा, 'मुझे लगता है कि समाधान मिल जाएगा। मैं आशावादी हूं। मैं किसान संगठनों से आग्रह करना चाहूंगा कि वे गतिरोध छोड़ें। सरकार ने उन्हें एक प्रस्ताव भेजा है। यदि उन्हें किसी अधिनियम के प्रावधानों पर आपत्ति है, तो इस पर चर्चा हो सकती है। अपने प्रस्ताव में, हमने उनकी आपत्तियों के समाधान का सुझाव देने का प्रयास किया है। उन्हें आंदोलन छोड़कर चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए। सरकार वार्ता के लिए तैयार है।'
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए कानून बहुत विचार-विमर्श के बाद बनाए गए हैं, जो किसानों के जीवन में बदलाव लाएंगे, जो उनके साथ हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए हैं। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि किसान बेहतर जीवन जी सकें और लाभकारी कृषि में लिप्त हो सकें। सरकार वार्ता के बाद कानून में सुधार करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि हमने किसानों को जो सुझाव भेजे हैं, उसमें एपीएमसी मंडी के बाहर प्राइवेट मंडियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर किसानों के डर को दूर किया गया है। राज्य सरकारों को अधिकार है कि वे प्राइवेट मंडियों के पंजीकरण और टैक्स पर फैसला ले सकती हैं। हमें ये लगता था कि गांव में किसान के सबसे नजदीक अगर मजिस्ट्रियल पावर वाला अधिकारी एसडीएम है, क्योंकि अगर छोटा किसान न्यायालय जाएगा, तो वहां उसका खर्च भी होगा और समय भी लगेगा, लेकिन अगर किसी किसान को न्यायालय में जाना है तो इसका विकल्प भी हम दे सकते हैं।
समर्थन मूल्य प्रणाली जारी रहेगी
तोमर ने कहा, 'प्रधानमंत्री जी और मैंने बार-बार ये कहा है कि समर्थन मूल्य प्रणाली यानी एमएसपी चलती रहेगी, इस पर कोई खतरा नहीं है। इस वर्ष भी एमएसपी पर फसलों की खरीद बहुत अच्छे से हुई है। एमएसपी को हमने ही डेढ़ गुना किया है। अगर एमएसपी को लेकर उनके मन में कोई शंका है तो हम लिखित आश्वासन देने को भी तैयार हैं।'