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Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई व्यवस्था पर उठे सवाल, किसान बोले- अपने फैसले पर पुनर्विचार करे उच्चतम न्यायालय

Tue, 12 Jan 2021 07:42 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 12 Jan 2021 07:42 PM IST
सार

  • किसान नेताओं, विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी पर उठाया सवाल
  • कांग्रेस पार्टी ने भी बताया किसानों के लिए छलावा
  • कहा तीनों कृषि कानूनों के समर्थक कमेटी के सदस्य कैसे कर पाएंगे किसानों के साथ न्याय

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Farmers Protest: farmers, experts and congress party appealed Supreme Court to reconsider its decision about members of the committee
supreme court - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन को देखते हुए केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्षस्थ अदालत ने इस मामले के समाधान तक तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने मामले के तर्कसंगत समाधान की दिशा में कदम उठाते हुए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से किसान संगठन और किसानी मामलों के विशेषज्ञ सहमत नहीं है।

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मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता ने भी उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई कमेटी के चारों नामों पर सवाल उठाया है। इसे किसानों के साथ छलावा बताया है और कहा कि इस कमेटी से किसानों के मामले में न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य भूपिंदर सिंह मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डा. प्रमोद कुमार जोशी (अंतरराष्ट्रीय खाद्यनीति अनुसंधान संस्थान) और अनिल घनवट (शिवकेरी संगठन, महाराष्ट्र) शामिल हैं।
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सुरजेवाला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने किसान आंदोलन के विरोध में जाने वालों को ही इस कमेटी में नामित किया है। इन चारों लोगों ने किसान आंदोलन के विरोध और कृषि कानूनों के समर्थन में लेख लिखे हैं और इसे सही कदम बताया। ऐसे में इनसे कैसे न्याय मिलने की दिशा में सही तरीके से रिपोर्ट तैयार करने की उम्मीद की जा सकती है।

किसने दिए उच्चतम न्यायालय को ये नाम?

किसान मामलों के विशेषज्ञ चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह को भी कमेटी के नामों पर हैरत हो रही है। चौधरी का कहना है कि आखिर पांच मिनट में कैसे उच्तम न्यायालय ने ये नाम तय कर दिए। किसने शीर्षस्थ अदालत को ये नाम दिए? चौधरी का कहना है कि चारों लोग तो पहले से ही तीनों कानूनों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। फिर इसमें किसान की आवाज कैसे आ सकेगी? पुष्पेन्द्र सिंह कहते हैं कि यह तो कमेटी के नाम किसानों के साथ धोखा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यह भी बात समझ में नहीं आई कि किसानों को प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान जैसे स्थान देने के मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर निर्णय लेंगे। चौधरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। ऐसा न हुआ तो लोगों का न्यायपालिका से भरोसा उठने लगेगा।

क्या खत्म हो जाएगा किसान आंदोलन?

उच्चतम न्यायालय द्वारा कानूनों को लागू करने पर रोक लगाने और चार सदस्यीय कमेटी बनाने से क्या किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा? इसके जवाब में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कहते हैं कि तीनों कानूनों के रद्द होने तक किसान आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी हमने, किसान संगठनों ने शीर्षस्थ अदालत का फैसला नहीं पढ़ा है। इसे पढ़कर किसान नेता आगे की रणनीति पर विचार करेंगे, लेकिन एक बात साफ है कि यह आंदोलन हमारी (किसानों की) मांग पूरी होने तक जारी रहेगा।

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