भारत बंदः किसानों ने कहा, एतिहासिक प्रदर्शन से होश में आ जाएगी केंद्र सरकार, कुछ संगठन कर रहे हैं विरोध
- पूरे देश में भारत बंद को सफल बनाने में जुटे किसान संगठन, उत्तर भारत के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका
- व्यापारी संगठन कैट, ट्रक ऑपरेटर्स संगठन एटवा, भारतीय किसान सभा, भारतीय मजदूर संघ हैं भारत बंद के विरोध में
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किसान संगठनों की तरफ से आठ दिसंबर को बुलाए गए भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। इसके कारण उत्तर भारत के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम में महाराष्ट्र और दक्षिण में तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में भी इसका अच्छा असर पड़ने की संभावना है। मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी बंद का भारी असर पड़ सकता है।
18 से ज्यादा राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने के कारण इसके काफी प्रभावी होने की संभावना है। किसानों ने कहा है कि कल के असर को देखते हुए केंद्र सरकार का यह आरोप खत्म हो जाएगा कि यह विरोध प्रदर्शन केवल हरियाणा और पंजाब तक सीमित है। वहीं,भाजपा समर्थित कुछ संगठनों ने खुद को बंद से बाहर रखने का निर्णय किया है।
कल सरकार को होश आ जाएगा
किसान आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने अमर उजाला से कहा कि किसान आंदोलन को कभी खालिस्तानी समर्थक, कभी विपक्षी राजनीतिक दलों की साजिश कहकर इसे खारिज करने की कोशिश की गई थी। लेकिन मंगलवार के भारत बंद को देखने के बाद सरकार को समझ आ जाएगा कि यह आंदोलन कौन चला रहा है। कल सरकार को होश आ जाएगा और किसानों के हित में तीनों कानूनों को वापस लेना पड़ेगा। इससे कम किसानों को कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा।
आवश्यक सेवाओं को रहेगी मंजूरी
योगेंद्र यादव ने कहा कि कुछ टिप्पणियों से लोगों को गलतफहमी हो गई है। इसे स्पष्ट कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के भारत बंद के दौरान एंबुलेंस, इमर्जेंसी सेवाओं को पूरी तरह से छूट रहेगी, लेकिन सामान्य सेवाओं से उनकी अपील रहेगी कि वे किसानों को अपना समर्थन देने के लिए सड़कों पर न निकलकर किसानों का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन और भारत बंद को केवल किसानों के हित से नहीं, बल्कि भारत के व्यापक हित से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
एक करोड़ ट्रक सड़कों पर नहीं चलेंगे
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के प्रवक्ता राजेंद्र कपूर ने कहा कि वे किसान संगठनों के साथ में हैं। उनके संगठन से जुड़े लगभग एक करोड़ ट्रक मंगलवार को सड़कों पर नहीं उतरेंगे। लेकिन चूंकि बंद केवल तीन बजे तक का रखा गया है, इसके बाद सामान्य सेवाएं बहाल हो जाएंगी। दिल्ली में चारों तरफ से ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध है, इसलिए जब तक आवाजाही सामान्य नहीं होती, राजधानी में सेवाएं प्रभावित रहेंगी।
ये संगठन भारत बंद के विरोध में
अनेक संगठन और राजनीतिक दल भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कई संगठन इस बंद के विरोध में भी हैं। व्यापारियों के बड़े संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), ट्रक ऑपरेटर्स के संगठन ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (एटवा), भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ इसके विरोध में है। कैट नेता प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि उनका संगठन भारत बंद नहीं करेगा और मंगलवार को दिल्ली के साथ-साथ देशभर में उनके संगठन से जुड़े सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहेंगे।
न्यूनतम समर्थन मूल्य लेकर बातचीत से आगे बढ़ें किसान
भारतीय किसान संघ के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष हरपाल सिंह डागर ने अमर उजाला से कहा कि इस समय सरकार दबाव में है। वह न्यूनतम समर्थन मूल्य देने को तैयार हो गई लगती है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य लेकर धरना-प्रदर्शन बंद कर देना चाहिए। इसके आगे की मांगें बातचीत के जरिए करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत बंद से किसान भाई अपने ही किसान भाइयों का नुकसान कर रहे हैं। उनका संगठन भारत बंद के पक्ष में नहीं है।