कृषि कानूनों की कमियां बताने के लिए हर गांव में राशन-पानी के साथ 10 दिन गुजारेंगे 15 किसान
संयुक्त किसान मोर्चा आठ मार्च को महिला दिवस को 'महिला किसान दिवस' के रूप में मनाएगा। इस दौरान देशभर के सभी संयुक्त किसान मोर्चा के धरना स्थल आठ मार्च को महिलाओं द्वारा संचालित होंगे...
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केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का हल्ला बोल जारी है। देशभर में किसान नेता महापंचायत को संबोधित कर रहे हैं। वहीं अब किसान संगठनों ने गांवों तक पकड़ बनाने और आंदोलन को मजबूत करने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब किसान संगठनों से जुड़े किसान राज्यों के चुनिंदा गांवों में पहुंचेंगे। वहां करीब 10 दिन रुकेंगे। इसी तरह की छोटी-छोटी टोलियां राज्यों के कई गांवों तक पहुंचेंगी।
भारतीय किसान यूनियन के सह मीडिया प्रभारी सौरभ उपाध्याय ने अमर उजाला को बताया कि गाजीपुर बार्डर के आसपास के गांवों से इनकी शुरुआत हो चुकी है। धीरे-धीरे ये पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी शुरू किया जाएगा। इसमें 15 किसान एक गांव, एक ट्रैक्टर और राशन पानी के साथ 10 दिन गुजारेंगे। इस दौरान वे गांवों में चौपाल लगाकर कृषि कानूनों की कमियां किसानों को बताएंगे। किसानों की कई टोलियां गांव-गांव घूमकर और वहां लोगों को बारी-बारी से अपनी बात समझाकर वापस लौट जाएंगी। यह सिलसिला लगातार चलेगा।
प्रदर्शन स्थलों पर घट रही किसानों की संख्या
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर 100 दिनों से किसानों का धरना प्रदर्शन जारी है। इसी बीच प्रदर्शनकारियों की घटती संख्या ने संयुक्त किसान मोर्चा की भी चिंता भी बढ़ा दी है। दिल्ली की सीमा से सटे सिंघु, टीकरी, शाहजहांपुर के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर भी तेजी से प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या में कमी आ रही है। हालांकि किसान संगठनों का दावा है कि किसान लोग जुट रहे हैं। जल्द ही किसान पहले की तरफ बॉर्डर पर नजर आएंगे।
कृषि कानूनों के विरोध में किसान छह मार्च को किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी दिखाने के लिए अपने घर और कार्यालयों पर काले झंडे लहराएंगे। इसके अलावा कुंडली-मानेसर पलवल एक्सप्रेस-वे (KMP) पर पांच घंटे की नाकेबंदी भी करेंगे। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा आठ मार्च को महिला दिवस को 'महिला किसान दिवस' के रूप में मनाएगा। इस दौरान देशभर के सभी संयुक्त किसान मोर्चा के धरना स्थल आठ मार्च को महिलाओं द्वारा संचालित होंगे।