फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmers organizations gathered in the mood of farmers returning after Red Fort violence

लालकिले की हिंसा के बाद वापसी कर रहे किसानों की मान मनव्वल में जुटे किसान संगठन

Fri, 29 Jan 2021 05:09 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 29 Jan 2021 05:09 AM IST
विज्ञापन
Farmers organizations gathered in the mood of farmers returning after Red Fort violence
kisan bill, kisan law, farmer, kisan andolan - फोटो : amar ujala

लालकिले की हिंसा से आहत किसानों ने वापसी शुरू कर दी है। सिंघु और गाजीपुर सरीखे प्रमुख मोर्चों से किसानों के पलायन पर किसान नेता सकते में हैं। अब उन्होंने किसानों का मान मनौव्वल शुरू कर दी है।

विज्ञापन


भीड़ जुटाने के लिए हर जिले से दस ट्रैक्टर लाने की रणनीति पर काम शुरू
किसानों को बनाए एक साथ रखने और मोर्चों पर हर जिले से 10 ट्रैक्टर और 100 किसान लाने व ब्लॉक स्तर से किसानों की भीड़ जुटाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। किसानों के आंदोलन छोड़कर जाने पर संयुक्त किसान मोर्चा के जोगिंदर सिंह उगरहां ने कहा, ज्यादातर किसान 26 जनवरी के लिए आए थे, इसलिए वह वापसी कर रहे हैं। लेकिन हिंसा के चलते किसानों में नाराजगी है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा, लाल किले की हिंसा से आंदोलन को धक्का लगा है, हालांकि जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी और किसान फिर वापस आएंगे। भारतीय किसान यूनियन ने कहा, वह हालात पर नजर रखे हैं। किसान आंदोलन रुकेगा नहीं, चलता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा, हिंसा ने आंदोलन की कमर तोड़ दी है। 60 दिन से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने में भी कामयाब रहा था, किंतु अब स्थितियां अलग हैं। हालांकि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है।

तिरंगे का अपमान आंदोलन का मकसद कभी नहीं था
गाजीपुर से लौट रहे किसान स्वर्णदीप ने कहा, मंगलवार को ट्रैक्टर रैली के नाम पर हुई हिंसा और तिरंगे का अपमान किसान आंदोलन का मकसद नहीं था। इसलिए अब यहां रुकने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है।


सिंघु, गाजीपुर बॉर्डर पर तेजी से कम हो रहे किसान
किसानों का सबसे ज्यादा पलायन सिंघु और गाजीपुर सीमा से हो रहा है, जबकि आंदोलन के आगाज के साथ ही सिंघु बॉर्डर पर कम से कम 25 से 30 हजार और गाजीपुर में करीब 10 से 15  हजार की संख्या में किसान मौजूद रहते थे, जो कि इस घटना के बाद से लगातार घट रहे हैं, अब इन दोनों ही मोर्चों पर महज पांच से सात हजार किसान रह गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed