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किसान आंदोलन: पुलिसकर्मी रहे 'राकेश टिकैत' पलट रहे हैं सरकार की पुलिसिया थ्योरी, अगले माह हो सकते हैं आमने-सामने
Sat, 10 Apr 2021 04:48 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 10 Apr 2021 04:48 PM IST
सार
किसान नेता अविक साहा बताते हैं, सरकार के दिमाग में अभी यह चल रहा है कि बंगाल का चुनाव जीत गए तो किसानों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। यह सरकार की गलतफहमी है। किसान आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते...
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केएमपी टोल पर धरना देते किसान
- फोटो : Agency
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विस्तार
किसान आंदोलन को लेकर भले ही अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि धरना स्थलों पर पहले जैसी भीड़ नहीं है। कहीं पर सैकड़ों तो कहीं दर्जनों किसान ही जुट पा रहे हैं। इसके बावजूद राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार की उस पुलिसिया थ्योरी को पलट दिया है, जिसमें किसी आंदोलन या प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए जानबूझकर समय बर्बाद किया जाता है।
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किसान नेता सत्यवान बताते हैं कि केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन में वही थ्योरी अपनाई है। सरकार ने जोर लगा लिया कि पुलिस थ्योरी के आधार पर किसान हार-थक कर अपने घर लौट जाएंगे। चूंकि राकेश टिकैत खुद एक पुलिसकर्मी रह चुके हैं, इसलिए वे इस थ्योरी को अच्छी तरह समझते हैं। अभी तक का किसान आंदोलन बता रहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार की वह थ्योरी पलट दी है।
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किसान नेता सत्यवान बताते हैं, केंद्र सरकार ने आंदोलन शुरू होने के पहले सप्ताह से ही पुलिसिया थ्योरी पर चलना आरंभ कर दिया था। सरकार यह सोच रही थी कि जिस तरह से छात्र, श्रमिक, व्यापारी, बेरोजगार और कर्मचारी संगठनों का आंदोलन दो-चार दिन में खत्म हो जाता है, वैसे ही किसानों का आंदोलन भी उठ जाएगा।
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सरकार ने यहां पर बड़ी गलती कर दी। धरना-प्रदर्शन खत्म कराने की पुलिसिया थ्योरी को किसानों पर लागू कर दिया। यानी हराओ, थकाओ और उसके बाद दूसरे तरीकों से प्रदर्शनकारियों को इतना परेशान कर दो कि वे धीरे-धीरे वहां से सरकने लग जाएं। किसान आंदोलन में इस थ्योरी को कामयाब करने के लिए सरकार से पूरी ताकत लगा दी, लेकिन आंदोलन नहीं टूट सका।
किसानों की कम संख्या के बारे में सत्यवान बताते हैं, अभी फसल कटाई का सीजन है। बहुत से किसानों को कटाई करनी है। कोरोना के चलते मजदूर भी नहीं मिल पा रहे हैं। अन्नदाता अपने परिजनों के साथ ही कटाई में जुटा है। अब जैसे-जैसे फसल कटाई का सीजन खत्म होता जाएगा, वैसे ही धरना स्थलों पर किसानों की तादाद बढ़ती जाएगी।
किसान नेता अविक साहा बताते हैं, सरकार के दिमाग में अभी यह चल रहा है कि बंगाल का चुनाव जीत गए तो किसानों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। यह सरकार की गलतफहमी है। किसान आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते। शनिवार को कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे 24 घंटे के लिए जाम कर दिया है। सरकार जिस पुलिसिया थ्योरी पर कूद रही थी, उसे किसानों ने रैली, महापंचायत, नुक्कड़ सभाएं, रोड जाम, भारत बंद, किसान पत्र और दूसरे साधनों के जरिए फेल कर दिया है।