Kisan Andolan: अमित शाह और किसानों के बीच बातचीत बेनतीजा, बुधवार की बैठक स्थगित
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कृषि सुधार कानूनों के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के बीच किसानों और सरकार के बीच छठे दौर की वार्ता स्थगित हो गई है। ये बैठक कल यानी बुधवार को होनी थी। गृहमंत्री अमित शाह और किसान नेताओं के बीच बैठक बेनतीजा रहने के बाद ये बैठक स्थगित हो गई है।
अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद एआईकेएस नेता एवं माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सरकार कृषि कानून वापस लेने को तैयार नहीं है। हम बुधवार को सरकार के साथ होने वाली वार्ता में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर दोपहर 12 बजे किसान नेताओं की बैठक होगी।
ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि बुधवार हो सरकार और किसान संगठनों के बीच बैठक नहीं होगी। मंत्री (अमित शाह) ने कहा है कि बुधवार को किसान नेताओं को प्रस्ताव दिया जाएगा। बुधवार को किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर इस प्रस्ताव को लेकर बैठक करेंगे।
The Government is not ready to take back the farm laws: Hannan Mollah, General Secretary, All India Kisan Sabha https://t.co/APu8ws5eWS
— ANI (@ANI) December 8, 2020
कृषि सुधार कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों से छठे दौर की वार्ता से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गतिरोध समाप्त करने के प्रयासों के तहत किसान नेताओं के एक समूह से मुलाकात की। 13 किसान नेताओं को शाह के साथ इस बैठक के लिए बुलाया गया था। बैठक रात आठ बजे आरंभ हुई। किसान नेताओं में आठ पंजाब से थे जबकि पांच देश भर के अन्य किसान संगठनों से संबंधित थे।
बैठक में शामिल नेताओं में अखिल भारतीय किसान सभा के हन्नान मोल्लाह और भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत भी शामिल रहे। कुछ किसान नेताओं ने बताया कि उन्हें पहले इस बैठक के शाह के आवास पर होने की उम्मीद थी, लेकिन यह राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा में हुई।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। हालांकि बैठक को लेकर किसान संगठनों के बीच असंतोष के स्वर उभरने लगे। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने निर्धारित वार्ता से एक दिन पहले शाह के साथ बैठक को लेकर सवाल उठाया। प्रदर्शनरत किसान संगठनों में यह सबसे बड़ा संगठन है।
सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि आधिकारिक वार्ता से पहले इस वार्ता की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक में शामिल होने वाले नेता सबसे बड़े संगठन के विचार को जरूर ध्यान में रखेंगे। बता दें कि उगराहां को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। उल्लेखनीय है कि सिंघु बार्डर पर हजारों की संख्या में किसान पिछले 12 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस बैठक में 13 किसान नेताओं ने भाग लिया। किसान नेता रुलदू सिंह मानसा और भोग सिंह मानसा बैठक स्थल को लेकर दुविधा के चलते वापस सिंघु बॉर्डर लौट गए थे। बाद में उन्हें मनाया गया और वह बैठक में शामिल हुए। बैठक का स्थान पहले नॉर्थ ब्लॉक तय किया गया था। लेकिन, बाद में इसे बदल कर अमित शाह के आवास पर आयोजित करने का फैसला लिया गया था। वहीं, अंतिम समय में बैठक के स्थान को लेकर फिर बदलाव किया गया।
शाह से केवल हां या ना में जवाब मांगेंगे: किसान नेता
किसान नेताओं ने कहा है कि जब वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे तो अपनी मांगों पर केवल ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब मांगेंगे। किसान नेता आरएस मनसा ने सिंघु बॉर्डर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'बीच का कोई रास्ता नहीं है। हम आज की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह से केवल हां या नहीं में जवाब देने को कहेंगे।'
इससे पहले राकेश टिकैत ने कहा था, 'आज शाम सात बजे हमारी गृह मंत्री के साथ बैठक होगी। हम अभी सिंघु बॉर्डर जा रहे हैं और वहां से हम गृह मंत्री के पास जाएंगे।' शाह से किसानों का 13 सदस्यीय दल मुलाकात करने वाला था। उल्लेखनीय है कि गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार किसानों को मिलने के लिए बुलाया है।
We have a meeting with the Home Minister at 7 pm today. We are going to Singhu Border now and from there we will go to the Home Minister: Rakesh Tikait, Spokesperson, Bharatiya Kisan Union pic.twitter.com/IWY2G1rMzZ
— ANI UP (@ANINewsUP) December 8, 2020
किसान नेता आरएस मनसा ने दावा किया कि केंद्र सरकार ‘भारत बंद’ के सामने झुक गई है। एक अन्य नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि ‘भारत बंद’ सफल रहा और केंद्र सरकार को अब पता है कि उसके पास कोई रास्ता नहीं है। स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि 25 राज्यों में करीब 10,000 जगहों पर बंद आहूत किया गया।
किसान नेताओं ने कहा कि प्रदर्शनकारी बुराड़ी के मैदान नहीं जाएंगे क्योंकि यह एक ‘खुली जेल’ है। उन्होंने रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि वे दिल्ली और हरियाणा की जनता को परेशान नहीं करना चाहते। बता दें कि बुधवार को किसानों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ छठे दौर की वार्ता होगी।
शाह के साथ बैठक में शामिल हुए ये किसान नेता
1. राकेश टिकैत
2. गुरनाम चढूनी
3. हनन मोल्लाह
4. शिवकुमार हक्का
5. बलबिर सिंह
6. जगजीत सिंह
7. रुलदू सिंह मानसा
8. मंजीत सिंह राय
9. बुट्टा सिंह बुरूजगिल
10. हरिंदर सिंह लखोवाल
11. दर्शन पाल
12. कुलवंत सिंह संधू
13. भोग सिंह मानसा