नई बिजली नीति: किसानों को बिजली पर सब्सिडी खत्म होने की आशंका, संसद को फिर लग सकता है करंट
सरकार का तर्क है कि इससे जो लोग असली किसान या गरीब नागरिक होंगे, उन्हें ही मुफ्त बिजली का लाभ मिल पाएगा, जबकि जो लोग इसके असली हकदार नहीं होंगे, उन्हें बिजली बिल का भुगतान करना होगा...
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संसद का मानसून सत्र पेगासस जासूसी विवाद, मंहगाई और नए कृषि कानूनों के विरोध की भेंट चढ़ता जा रहा है। इससे सरकार के सामने प्रस्तावित 17 बिलों को पारित कराने की चुनौती बढ़ गई है। इसमें बिजली (संशोधन) विधेयक, 2021 को पास कराना भी शामिल है, जिसे केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में पेश करती रही है। लेकिन इस विधेयक के संसद के पटल पर पहुंचने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। किसानों को आशंका है कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद उन्हें बिजली पर मिल रही सब्सिडी खत्म हो जाएगी, लिहाजा वे इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। वर्तमान में हरियाणा और पंजाब में किसानों को बहुत सस्ती दरों पर बिजली मिलती है।
क्या है सरकार की योजना
'लोकप्रियता की राजनीति' के चक्कर में कई राज्य सरकारें चुनाव के समय किसानों, आम नागरिकों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा करती हैं। इससे उन्हें चुनावी लाभ मिलता है। लेकिन भारी मात्रा में मुफ्त बिजली देने से बिजली उत्पादन कंपनियों को समय से भुगतान मिलने में बाधा पहुंचती है। इससे कई बार बिजली उत्पादन के काम में गतिरोध पैदा हो जाता है क्योंकि बिजली कंपनियों को कोयले सहित अनेक मदों में भारी नकद निवेश करना पड़ता है।
कथित तौर पर नई बिजली नीति में राज्यों के लिए यह अनिवार्य किया जा सकता है कि वे किसानों-आम नागरिकों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा नहीं कर सकेंगी। बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से तय दरों पर बिजली बिल लेने के लिए स्वतंत्र होंगी। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि राज्य अपने किसानों या आम नागरिकों को मुफ्त बिजली नहीं दे सकेंगे। वे सीधे बिजली मुफ्त देने की बजाय किसानों के खाते में नकद धन जमा कर उनके बिजली बिल के असर को खत्म कर सकेंगे।
सरकार का तर्क है कि इससे जो लोग असली किसान या गरीब नागरिक होंगे, उन्हें ही मुफ्त बिजली का लाभ मिल पाएगा, जबकि जो लोग इसके असली हकदार नहीं होंगे, उन्हें बिजली बिल का भुगतान करना होगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे बिजली उत्पादन और उपलब्धता को बेहतर किया जा सकेगा। मुफ्त बिजली के कारण अकसर इसकी बर्बादी होती है। लेकिन अगर किसानों को इसके लिए मूल्य देना होगा तो बिजली के गैर-जरूरी उपयोग को रोका जा सकेगा।
नई नीति लागू होने के बाद राज्य यह तय कर सकेंगे कि कितनी ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से लेना अनिवार्य होगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश को शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर आगे ले जाया जा सकेगा। इससे भविष्य में लोगों को रहने के लिए एक बेहतर वातावरण मिल सकेगा। आवश्यक सेवा देने का वादा कर कॉंन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनियां अगर अपने वायदे पर खरी नहीं उतर पाएंगी तो राज्य उन पर आर्थिक दंड लगा सकेंगे।
वर्तमान बिजली व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी यह है कि बिजली का एक स्थान पर उत्पादन होता है और उसे बहुत दूर ले जाकर उपयोग किया जाता है। बिजली उत्पादन केंद्रों से ग्राहकों तक बिजली पहुंचाने में बहुत सारी ऊर्जा का नुकसान होता है। लेकिन नई व्यवस्था में स्थानीय ग्रिड्स को विकसित करने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को सही समय पर भुगतान न करना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। नई व्यवस्था के बाद समय से भुगतान न होने की स्थिति में बिजली उत्पादन कर रही कंपनियों के पास बिजली देने से इनकार करने का अधिकार होगा।