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किसान के बेटे ने सड़े आलू से पैदा की बिजली

Mon, 05 Dec 2016 04:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर Updated Mon, 05 Dec 2016 04:09 AM IST
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farmer's son produce electricity from potatoes

क्षेत्र के बरईपार गांव निवासी किसान राजेंद्र यादव के बेटे सतीश यादव ने सड़े आलू से बिजली पैदा की। उसने बीएचयू और फिर चेन्नई में इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च के वैज्ञानिकों के सामने बल्ब जलाकर दिखाया। रिसर्च सेंटर के निदेशक ने उसको इस बाबत प्रमाणपत्र भी दिया।

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सतीश अपनी सफलता का श्रेय सर्वोदय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य सुधाकर उपाध्याय को देता है, जिन्होंने उसकी हौसला अफजाई के साथ-साथ मदद भी की।

सतीश ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में अमर उजाला को बताया कि वह सर्वोदय इंटर कालेज शाहपुर में पढ़ रहा था। साथ ही साथ किशुनी पुर में कोचिंग में भी क्लास लेता था । वहीं के शिक्षक राकेश यादय ने कुछ अलग करने की प्रेरणा मिली।
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12 जुलाई 2014 को उसकी मां फूलदेई ने घर में रखे सड़े आलू फेंकने को दिए। वह आलू फेंक कर वापस आ रहा था कि अचानक उसकी अंगुली होठों पर पड़ने से कुछ अम्लीय स्वाद महसूस हुआ। 

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आलू में हाइड्रोजन क्लोराइड, मिथेन गैस पाई जाती है

farmer's son produce electricity from potatoes

यहीं से उसके मस्तिष्क में इस प्रोजेक्ट की नीव पड़ी। सतीश ने बताया कि उसे पता था कि सड़े आलू में हाइड्रोजन क्लोराइड, मिथेन गैस पाई जाती है। ऐसे में यदि उसमें एनोड कैथोड प्लेट लगाकर रासायनिक क्रिया करायी जाय तो इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होने लगेगा। यह तत्व कहीं भी सक्रिय हो तो उससे ऊर्जा उत्पन्न हो जायेगी। यह ऊर्जा किसी भी रूप में हो सकती है। 

उसने कहा कि मैने अपने प्रोजेक्ट के बारे में प्रधानाचार्य सुधाकर उपाध्याय से चर्चा की तो उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए आर्थिक मदद भी की। इसके बाद वह अपने प्रोजेक्ट पर काम करता रहा। अपनी कोचिंग के शिक्षक राकेश के साथ बीएचयू के आईआईटी में चार जून 2016 को निदेशक प्रो. मनोज सिन्हा के सामने अपना प्रोजेक्ट दिखाया।

निदेशक ने उसे इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च चेन्नई में भेजा। उसने 23 अगस्त को उक्त केंद्र पर पहुंच कर पांच दिन में प्रोजेक्ट पूरा किया। 28 अगस्त को केंद्र के निदेशक डा. माधुरी द्विवेदी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. राकेश कुमार के सामने बल्ब जलाकर दिखाया। वहां उसे केंद्र के निदेशक ने इस प्रयोग को मान्यता देते हुये प्रमाण पत्र भी दिया।

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