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सूखे का सितम! पहले माथे का सिंदूर मिटा, फिर गोद भी हुई सूनी
कपिल नायक/अमर उजाला, ललितपुर
Updated Sat, 30 Apr 2016 05:13 AM IST
सार
- कर्ज से परेशान होकर पति ने 2014 में दी थी जान
- बेटा भी कर्ज का बोझ नहीं सह सका, की खुदकुशी
- शासन-प्रशासन ने नहीं ली पीड़ितों की कोई सुध
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शासन-प्रशासन ने नहीं ली पीड़ितों की कोई सुध
- फोटो : Demo pic
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विस्तार
ललितपुर के खेतों से सूखे के कारण भले ही फसलें पैदा न हो पाई हों, लेकिन हर सूखे खेत से कर्ज की बेल जरूर निकली, जिसमें फंसकर किसानों का दम निकल गया। ग्राम खड़ोवरा की नन्हीं दुलैया ने अपने सुहाग को खोकर अभी हिम्मत जुटाकर जीना शुरू किया था कि उसका जवान बेटा भी साहूकारों के तकादे व सूखी फसल का दबाव नहीं झेल पाया और उसने आत्महत्या कर ली। इतना सब होने के बाद भी प्रशासन ने पीड़ितों की सुध नहीं ली है। पीड़ित ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
उस महिला की स्थिति किस तरह से बयां की जाए, जिसने एक साल में ही पहले अपना सुहाग खोया था। अब उसका जवान बेटा संसार छोड़कर चला गया। जिला मुख्यालय से 12 किमी. दूर स्थित ग्राम खड़ोवरा की नन्हीं दुलैया बताती हैं कि लगातार पड़ रहे सूखे ने उनके पूरे परिवार को ही निगल लिया। लगातार फसल बर्बादी के कारण उनके पति जंडैल सिंह ने केसीसी से एक लाख रुपए कर्ज लिया और साहूकारों से डेढ़ लाख रुपए कर्ज लिया। लगातार ब्याज बढ़ने से कर्ज चार लाख रुपए हो गया। चौथी बेटी की शादी व दो बेटों के भविष्य की चिंता ने चिता का रूप रख लिया।
तंगहाली में भी परिवार को ढांढस बंधाने वाले जंडैल सिंह 12 जून 2014 को हिम्मत हार बैठे और आत्महत्या कर जीवन खत्म कर लिया। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी बड़े पुत्र गजेंद्र पर आ गई। गजेंद्र ने परिवार को संभालने की कोशिश की और पिता का लिया गया कर्ज काफी हद तक चुका दिया। लेकिन चौथी बहन की शादी के लिए उसे भी कर्जदार बनना पड़ गया।
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बहन की शादी निपटाकर उसने किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए साहूकारों से कर्ज लिया। उसे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी फसल की पैदावार से कुछ कर्ज चुका पाएगा, लेकिन मौसम की मार ने उसकी मटर की फसल को बर्बाद कर दिया। बर्बाद फसल और कर्ज के बोझ से दबे गजेंद्र ने इसी साल फरवरी 2016 में आत्महत्या कर ली।
पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव के साहूकार सांत्वना जताने आते तो हैं, लेकिन अपने कर्ज के बारे में पूछना नहीं भूलते। पिछले चार महीने से उनका राशन कार्ड भी जमा है और कोई सरकारी मदद भी नहीं मिली है। नन्हीं दुलैया कहतीं है कि सरकार कुछ रहम करे, प्रशासन उनकी सहायता करे। अब केवल एक बेटा ही बचा है, जिसकी उम्र अभी खेतों पर काम करने लायक नहीं है।
किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट खत्म होने के बाद साहूकारों का सहारा ही किसानों के लिए आखिरी सहारा बन रहा है। साहूकार भी दस से बीस फीसदी ब्याज दर का कर्ज वसूलने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं।
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उस महिला की स्थिति किस तरह से बयां की जाए, जिसने एक साल में ही पहले अपना सुहाग खोया था। अब उसका जवान बेटा संसार छोड़कर चला गया। जिला मुख्यालय से 12 किमी. दूर स्थित ग्राम खड़ोवरा की नन्हीं दुलैया बताती हैं कि लगातार पड़ रहे सूखे ने उनके पूरे परिवार को ही निगल लिया। लगातार फसल बर्बादी के कारण उनके पति जंडैल सिंह ने केसीसी से एक लाख रुपए कर्ज लिया और साहूकारों से डेढ़ लाख रुपए कर्ज लिया। लगातार ब्याज बढ़ने से कर्ज चार लाख रुपए हो गया। चौथी बेटी की शादी व दो बेटों के भविष्य की चिंता ने चिता का रूप रख लिया।
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तंगहाली में भी परिवार को ढांढस बंधाने वाले जंडैल सिंह 12 जून 2014 को हिम्मत हार बैठे और आत्महत्या कर जीवन खत्म कर लिया। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी बड़े पुत्र गजेंद्र पर आ गई। गजेंद्र ने परिवार को संभालने की कोशिश की और पिता का लिया गया कर्ज काफी हद तक चुका दिया। लेकिन चौथी बहन की शादी के लिए उसे भी कर्जदार बनना पड़ गया।
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बहन की शादी निपटाकर उसने किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए साहूकारों से कर्ज लिया। उसे उम्मीद थी कि इस बार अच्छी फसल की पैदावार से कुछ कर्ज चुका पाएगा, लेकिन मौसम की मार ने उसकी मटर की फसल को बर्बाद कर दिया। बर्बाद फसल और कर्ज के बोझ से दबे गजेंद्र ने इसी साल फरवरी 2016 में आत्महत्या कर ली।
पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव के साहूकार सांत्वना जताने आते तो हैं, लेकिन अपने कर्ज के बारे में पूछना नहीं भूलते। पिछले चार महीने से उनका राशन कार्ड भी जमा है और कोई सरकारी मदद भी नहीं मिली है। नन्हीं दुलैया कहतीं है कि सरकार कुछ रहम करे, प्रशासन उनकी सहायता करे। अब केवल एक बेटा ही बचा है, जिसकी उम्र अभी खेतों पर काम करने लायक नहीं है।
किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट खत्म होने के बाद साहूकारों का सहारा ही किसानों के लिए आखिरी सहारा बन रहा है। साहूकार भी दस से बीस फीसदी ब्याज दर का कर्ज वसूलने के लिए हर रास्ता अपनाने को तैयार हैं।
गेहूं की पैदावार कम होने से टूटी हिम्मत, दे दी जान
मौसम की मार से नहीं उबर पा रहे किसान
- फोटो : getty
मौसम की मार से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। कम उत्पादन के बाद कर्ज चुकाने और रोजमर्रा की जरूरतों की चिंता उनकी हिम्मत को तोड़ रही है। इसी का नतीजा है कि अमरोहा के हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दीपुर में शुक्रवार सुबह कर्ज में डूबे एक किसान ने शहतूत के पेड़ से लटककर जान दे दी। मुख्य रूप से गेहूं पर आश्रित किसान के तीन बीघे की निकासी में सिर्फ दो क्विंटल गेहूं ही मिले थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौका मुआयना कर पीड़ित परिवार को सरकारी मदद का आश्वासन दिया है।
गांव अब्दीपुर के रहने वाले यशपाल यादव (38) पुत्र दिलीप सिंह की गांव के पास ही अलग-अलग स्थानों पर तीन बीघा और सात बीघा जमीन है। यशपाल ने इसमें से आठ बीघा में गेहूं और दो बीघा में ईख बो रखी थी। गुरुवार को यशपाल ने अपने तीन बीघा खेत के गेहूं की निकासी कराई थी। इसमें उसे मात्र पौने दो क्विंटल ही गेहूं मिले। इधर, साहूकार घर के चक्कर लगा रहे थे, जिससे यशपाल चिंतित था।
शुक्रवार सुबह यशपाल, पत्नी लोकेश के साथ दूसरे खेत पर कटे पड़े गेहूं की पुली बनाने पहुंचा। यहां भी गेहूं के दाने की खराब हालत देख परेशान हो गया। करीब नौ बजे तक आधे से ज्यादा खेत की पुली बंध चुकी थीं। इसी बीच यशपाल ने लोकेश को भोजन लेने के लिए घर भेज दिया। करीब 10 बजे जब लोकेश खेत पर पहुंची तो वहीं शहतूत के पेड़ से यशपाल की लाश लटकी थी। गले में दुपट्टे का फंदा कसा था। पास ही स्टूल भी पड़ा था।
शोर सुनकर वहां भीड़ लग गई। सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पूछताछ कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इधर, जानकारी मिलने पर उप जिलाधिकारी अशोक मौर्य ने नायब तहसीलदार देवेंद्र सिंह के साथ मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की। मृतक की पत्नी ने बताया कि, यशपाल ने डेढ़ साल पहले किसान क्रेडिट कार्ड पर 60 हजार रुपये का कर्ज लिया था। उस पर साहूकारों का भी करीब ढाई लाख रुपया कर्ज था। गेहूं की उपज से ही कर्ज चुकाने की योजना थी। जीरा के बराबर गेहूं देख कर वह परेशान हो गया था। आज सुबह ही साहूकार कर्ज का तगादा करने भी आए थे।
गांव अब्दीपुर के रहने वाले यशपाल यादव (38) पुत्र दिलीप सिंह की गांव के पास ही अलग-अलग स्थानों पर तीन बीघा और सात बीघा जमीन है। यशपाल ने इसमें से आठ बीघा में गेहूं और दो बीघा में ईख बो रखी थी। गुरुवार को यशपाल ने अपने तीन बीघा खेत के गेहूं की निकासी कराई थी। इसमें उसे मात्र पौने दो क्विंटल ही गेहूं मिले। इधर, साहूकार घर के चक्कर लगा रहे थे, जिससे यशपाल चिंतित था।
शुक्रवार सुबह यशपाल, पत्नी लोकेश के साथ दूसरे खेत पर कटे पड़े गेहूं की पुली बनाने पहुंचा। यहां भी गेहूं के दाने की खराब हालत देख परेशान हो गया। करीब नौ बजे तक आधे से ज्यादा खेत की पुली बंध चुकी थीं। इसी बीच यशपाल ने लोकेश को भोजन लेने के लिए घर भेज दिया। करीब 10 बजे जब लोकेश खेत पर पहुंची तो वहीं शहतूत के पेड़ से यशपाल की लाश लटकी थी। गले में दुपट्टे का फंदा कसा था। पास ही स्टूल भी पड़ा था।
शोर सुनकर वहां भीड़ लग गई। सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और पूछताछ कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इधर, जानकारी मिलने पर उप जिलाधिकारी अशोक मौर्य ने नायब तहसीलदार देवेंद्र सिंह के साथ मौके पर पहुंच जांच पड़ताल की। मृतक की पत्नी ने बताया कि, यशपाल ने डेढ़ साल पहले किसान क्रेडिट कार्ड पर 60 हजार रुपये का कर्ज लिया था। उस पर साहूकारों का भी करीब ढाई लाख रुपया कर्ज था। गेहूं की उपज से ही कर्ज चुकाने की योजना थी। जीरा के बराबर गेहूं देख कर वह परेशान हो गया था। आज सुबह ही साहूकार कर्ज का तगादा करने भी आए थे।
फसल चौपट होने से नहीं चुका पाया बैंक का कर्ज, दी जान
कर्ज अदायगी का नहीं मिला कोई जरिया
कर्ज के बोझ तले दबे हाथरस के सासनी में ग्राम ततारपुर-छौंक में एक किसान ने फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जिंदगी खत्म कर दी। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कमरा की कुंडी तोड़कर शव को बाहर निकला। पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है, लेकिन प्रशासन का कोई भी अफसर पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने नहीं पहुंचा है।
बताते हैं कि ग्राम ततारपुर निवासी करीब 54 वर्षीय रूपकिशोर पुत्र ख्यालीराम के पास 25 बीघा कृषि भूमि थी। वह खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक रूपकिशोर ने ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की शाखा सलेमपुर से करीब चार लाख रुपये कृषि ऋण ले रखा था। परिजनों का कहना है कि लगातार दो साल से फसल चौपट हो जाने के कारण वह बैंक लोन अदा नहीं कर पाए थे, जबकि बैंक से उन पर कर्ज अदायगी के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पिछले साल उसने अपनी पुत्री की शादी भी की थी।
परिजनों के मुताबिक खेती के अलावा परिवार की आय का दूसरा कोई साधन नहीं था। इस कारण उसे कर्ज अदायगी का कोई दूसरा जरिया नजर नहीं आ रहा था। परिजनों ने बताया कि कर्ज के कारण रूप किशोर कई दिन से मानसिक रूप से परेशान था। रोजाना की भांति गुरुवार की देर रात परिजन खाना खाने के बाद सो गए।
शुक्रवार की सुबह जागने पर देखा तो अंदर से कमरा बंद था। कमरे के अंदर पंखे पर रूपकिशोर का शव लटका हुआ था। शव लटका देख परिजनों की चीख निकल गई। शोरगुल सुनकर ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। घटना से पुलिस को अवगत कराया। पुलिस ने गांव पहुंचकर शव फंदे से उतरवाकर कमरे से बाहर निकाला। पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
बताते हैं कि ग्राम ततारपुर निवासी करीब 54 वर्षीय रूपकिशोर पुत्र ख्यालीराम के पास 25 बीघा कृषि भूमि थी। वह खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक रूपकिशोर ने ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की शाखा सलेमपुर से करीब चार लाख रुपये कृषि ऋण ले रखा था। परिजनों का कहना है कि लगातार दो साल से फसल चौपट हो जाने के कारण वह बैंक लोन अदा नहीं कर पाए थे, जबकि बैंक से उन पर कर्ज अदायगी के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पिछले साल उसने अपनी पुत्री की शादी भी की थी।
परिजनों के मुताबिक खेती के अलावा परिवार की आय का दूसरा कोई साधन नहीं था। इस कारण उसे कर्ज अदायगी का कोई दूसरा जरिया नजर नहीं आ रहा था। परिजनों ने बताया कि कर्ज के कारण रूप किशोर कई दिन से मानसिक रूप से परेशान था। रोजाना की भांति गुरुवार की देर रात परिजन खाना खाने के बाद सो गए।
शुक्रवार की सुबह जागने पर देखा तो अंदर से कमरा बंद था। कमरे के अंदर पंखे पर रूपकिशोर का शव लटका हुआ था। शव लटका देख परिजनों की चीख निकल गई। शोरगुल सुनकर ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। घटना से पुलिस को अवगत कराया। पुलिस ने गांव पहुंचकर शव फंदे से उतरवाकर कमरे से बाहर निकाला। पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।