CBI: सीमा पार बैठे आकाओं के इशारे पर गढ़ी गई दुष्कर्म और हत्या की झूठी कहानी, सीबीआई जांच में खुलासा
CBI: सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि 2009 में शोपियां में 17 साल की आसिया और निलोफर की दुष्कर्म के बाद हत्या नहीं हुई थी। बल्कि दोनों की मौत पानी में डूबने से हुई थी। इन दोनों के शव रामबियारा नदी की धारा में तैरते हुए पाए गए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सीबीआई ने 14 साल पहले के एक बड़े मामले में जो खुलासा किया है उससे सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं की भारतीय सुरक्षा बलों को बदनाम करने की खतरनाक साजिश सामने आ गई है। जम्मू कश्मीर के शोपियां में 2009 में दो लड़कियों की दुष्कर्म के बाद हत्या का जो मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा था और जिसे लेकर घाटी में जिस तरह 42 दिनों तक सुरक्षाबलों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए, उसके पीछे की साजिश से पर्दा उठ गया है। इस बारे में सीमा पार के इशारे पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी करने वाले दो डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया है।
सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि 2009 में शोपियां में 17 साल की आसिया और निलोफर की दुष्कर्म के बाद हत्या नहीं हुई थी। बल्कि दोनों की मौत पानी में डूबने से हुई थी। इन दोनों के शव रामबियारा नदी की धारा में तैरते हुए पाए गए थे। यह खुलासा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और जम्मू-कश्मीर घाटी में अस्थिरता पैदा करने की ताक में सीमा पार बैठे आकाओं के बड़े षडयंत्र का भंडाफोड़ कर रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर इस षडयंत्र में शामिल डा. बिलाल अहमद दलाल और डा. निघत शाहीन चिल्लू को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
दोनों चिकित्सकों पर आरोप है कि इन्होंने सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर दुष्कर्म के बाद हत्या की संभावना का षडयंत्र रचने में मदद की। इन दोनों चिकित्सकों के अलावा डा. नाजिया, डा. गुलाम अहमद कादिर सोफी और डा. मकबूल मीर ने अपनी अलग अलग पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म के बाद हत्या की संभावना का समर्थन किया। सूत्र बताते हैं कि अभी इस मामले की जांच चल रही है। इसमें बड़े रैकेट के शामिल और तमाम बड़े अफसरों तथा लोगों का नाम आने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि इस षडयंत्र के घेरे में जम्मू-कश्मीर के कुछ बड़े नेता भी आ सकते हैं। तब जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला की सरकार थी।
क्या है पूरा मामला?
30 मई 2009 को शोपियां की राम बियारा नदी से 17 साल की में आसिया और निलोफर नाम की दो युवतियों के शव पानी में तैरते मिले थे। 29 मई को ये दोनों युवतियां अपने घर से गायब हुई थीं। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों द्वारा इन महिलाओं का दुष्कर्म और इनकी हत्या कर पानी में फेंक देने का आरोप लगाया था। इस घटना ने काफी तूल पकड़ा और कश्मीर घाटी में इसको लेकर उग्र प्रदर्शन हुए थे। पूरे 42 दिन प्रदर्शन और बंद जारी रहा। बाद में सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। अब सीबीआई ने अपनी पड़ताल में खुलासा किया है कि इन दोनों युवतियों के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था। बल्कि इन युवतियों की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। दोनों युवतियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की संभावना तथा आरोप को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने मुजफ्फर जान आयोग का गठन भी किया था। इस आयोग ने भी तब युवतियों के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टि की थी। मुजफ्फर जान आयोग की सिफारिश पर कुछ पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों तथा अन्य के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
लेकिन अब सीबीआई की ताजा जांच ने दुष्कर्म की संभावना को ही खारिज कर दिया है। एजेंसी ने एम्स, दिल्ली और फारेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से जांच को आगे बढ़ाया था। आसिया और निलोफर के शव को कब्र से निकालकर जांच पड़ताल की गई थी। विसरा, मौत के बाद की फोटोग्राफी आदि की जांच के बाद सीबीआई ने इनके साथ दुष्कर्म के आरोप को गलत पाया है। जांच ऐजेंसी के निष्कर्ष एक बड़े षडयंत्र की तरफ इशारा कर रहे हैं। इसके बाद सरकार ने दो चिकित्सकों को बर्खास्त कर दिया है और गहन विभागीय जांच के भी निर्देश दे दिए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सीबीआई जांच और कार्रवाई के दायरे में मुजफ्फर जान आयोग से जुड़े सदस्य समेत कई बड़ी हस्तियां आ सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है शोपियां की यह घटना?
सुरक्षा बलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में 2007-08 के बाद से अलगाववादी और आतंकी ताकतें कमजोर पड़ने लगी थीं। लिहाजा सीमापार की ताकतें घाटी को अस्थिर करने तथा सुरक्षा बलों को घेरने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही थी। 29 मई को अपने घर से गायब हुई इन दोनों युवतियों का 30 मई को पानी में शव मिलने के बाद इसे आधार बनाकर सुरक्षा बलों पर बलात्कार के बाद हत्या का आरोप लगा दिया गया था। जबकि सुरक्षा बलों की जांच में इस तरह की कोई स्थिति सामने नहीं आई थी। लेकिन इसे लेकर अलगाववादियों ने स्थानीय लोगों को न केवल भड़काया बल्कि बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन को हवा दी । घाटी में करीब 42 दिनों तक बंद रहा। प्रदर्शन हुए। सीआरपीएफ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की जांच के बाद सच सामने आया और एक बड़ा षडयंत्र नाकाम हो गया है।
अभी कई लोगों पर हो सकती है कार्रवाई, जांच जारी
श्रीनगर प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि शोपियां दुष्कर्म एवं हत्या मामले में दो चिकित्सकों डा. बिलाल अहमद दलाल और डा. निघत शाहीन चिल्लू को बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई सीबीआई की जांच रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म की पुष्टि न होने और उनकी मौत पानी में डूबने के कारण होने का तथ्य सामने आने के बाद हुई है। अभी तमाम बड़े लोगों के इस षडयंत्र में शामिल होने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की संभावना है। बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन इसे लेकर काफी संवेदनशील है। उक्त अधिकारी का कहना है कि हमारा मकसद इस तरह के षडयंत्र का पता लगाना तथा घाटी को अस्थिर करने वाली ताकतों को न्याय के कठघरे में लाना है।