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सोशल साइट्स और मैसेजिंग एप से फैल रही फेक न्यूज, भारत में व्हाट्सएप के 20 करोड़ यूजर्स

Sat, 06 Apr 2019 05:40 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 06 Apr 2019 05:40 PM IST
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Fake News spreading via social sites and messaging apps in India
सोशल मीडिया
लोकसभा चुनाव का बिगुल बजते ही राजनैतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप चरम पर है। इसी के साथ बड़ी संख्या में सोशल मीडिया के द्वारा फेक न्यूज को भी फैलाया जा रहा है। लोग वर्तमान में सोशल साइट्स को छोड़ मैसेजिंग ऐप पर ज्यादा समय दे रहे हैं। सोशल नेटवर्किंग एप व्हाट्सएप ने फेक न्यूज पर रोक लगाने के लिए चैकपॉइंट टिपलाइन सेवा शुरू की है। 
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इससे यूजर्स खबर की सत्यता को जांच सकते हैं। टिपलाइन की यह सुविधा इंग्लिश, हिंदी, बंगाली, तेलगु और मलयालम भाषा में उपलब्ध है।

मैसेजिंग एप व्हाट्सएप का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी फेसबुक ने कहा, ‘इस सेवा को भारत के मीडिया स्किल्स स्टार्ट अप ‘प्रोटो’ ने पेश किया है। यह टिपलाइन गलत जानकारियों एवं अफवाहों का डाटाबेस तैयार करने में मदद करेगी। इससे चुनाव के दौरान ‘चेकप्वाइंट’ के लिए इन जानकारियों का अध्ययन किया जा सकेगा। यह सेवा एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की गई है, जिसमें व्हाट्सएप की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।’
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इस नंबर से जानें संदेश की प्रमाणिकता 

Fake News spreading via social sites and messaging apps in India
facebook fake news
फेसबुक ने कहा कि देश में लोग उन्हें मिलने वाली गलत जानकारियों या अफवाहों को व्हाट्सएप के +919643000888 नंबर पर चेकप्वाइंट टिपलाइन को भेज सकते हैं। एक बार जब कोई यूजर टिपलाइन को यह सूचना भेज देगा तब प्रोटो अपने प्रमाणन केंद्र पर जानकारी के सही या गलत होने की पुष्टि कर यूजर को सूचित करेगा। इस पुष्टि से यूजर को पता चल जाएगा कि उसे मिला संदेश सही, गलत, भ्रामक या विवादित में से क्या है।

फेक न्यूज को लेकर पहले भी उठाए कदम 

पिछले साल हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद फेसबुक ने अफवाहों और फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए किसी संदेश को एक बार में केवल पांच लोगों तक फॉरवर्ड करने तक सीमित कर दिया था। इसके अलावा कंपनी ने अखबारों, टीवी और रेडियो में भी लोगों को फर्जी खबरों को लेकर जागरूक किया था। 

हर दिन इतने व्हाट्सएप मैसेज होते हैं फारवर्ड

एक सर्वे के अनुसार दुनिया भर में लगभग 65 अरब मैसेज रोज भेजे जाते हैं। वहीं प्रतिदिन लगभग 2 अरब मिनट वीडियो कॉल और वॉयस मैसेज पर खर्च होते हैं। 
 

तो इस कारण मैसेंजिंग एप पर बढ़ रहे हैं यूजर

Fake News spreading via social sites and messaging apps in India
whatsapp fake news
इसका सबसे बड़ा कारण प्राइवेसी है। कम उम्र के यूजर्स अपने निजी चैट को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स को छोड़कर मैसेजिंग एप की ओर रूख कर रहे हैं। इस बात को फेसबुक ने भी स्वीकारा है कि हाल के दिनों में उनके यूजर्स की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। यही कारण है कि फेसबुक अपने मैसेजिंग एप को और आधुनिक करने में लगा है।

63 फीसदी यूजर सोशल साइट का करते हैं प्रयोग

एक सर्वे के अनुसार दुनिया के लगभग 63.1 फीसदी इंटरनेट यूजर्स सोशल नेटवर्किंग साइट्स और एप का प्रयोग करते हैं। इनकी संख्या साल 2018 में 2.62 अरब था। जिसको 2020 तक 3 अरब से ज्यादा होने का अनुमान जताया गया है।

आधे से ज्यादा यूजर केवल व्हाट्सएप के

सोशल नेटवर्किंग एप व्हॉट्सएप के ही 1.5 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं। यह संख्या दुनिया के 180 देशों के लोगों का है। जिसमें भारतीयों की संख्या बहुत ज्यादा है। 
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यहां जानिए दुनिया भर में किसके कितने यूजर्स

Fake News spreading via social sites and messaging apps in India
social media
  • व्हाट्सएप  150 करोड़
  • फेसबुक मैसेंजर 130 करोड़
  • वीचैट 105 करोड़
  • क्यू क्यू मोबाइल 80 करोड़
  • स्काइप 30 करोड़
  • स्नैपचैट 29 करोड़
  • वीबर 26 करोड़
  • लाइन 20 करोड़
  • टेलीग्राम 20 करोड़

सोशल साइट्स बनाम मैसेजिंग एप

लड़ाई सोशल साइट्स और मैसेजिंग एप के बीच हो रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों की उपयोगिता बनी रहेगी। न तो मैसेजिंग ऐप सोशल साइट्स की जगह ले पाएंगे न ही सोशल साइट्स मैसेजिंग एप का। लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स की तुलना में मैसेजिंग एप पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं क्योंकि इसमें बातचीत का दायरा सीमित होता है।

आपके लिए क्यों जरूरी है जानना

विगत कुछ समय से फेक न्यूज के फैलने से कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जो सामाजिक दृषिकोण से अस्वीकार्य हैं। इन्हें रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रयास भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने टिपलाइन की सेवा प्रारंभ की है। जिससे फेक न्यूज पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।

चुनाव के समय फेक न्यूज पर लगाम लगाना जरुरी है, क्योंकि इसका दूरगामी असर भविष्य में देखने को मिल सकता है। अगर आप फेक न्यूज से संबंधित कुछ और जानना चाहते हैं तो हमको बताएं, हम वो खबरें भी आपके सामने रखेंगे। 

कृपया हमारी खबरों पर अपना फीडबैक नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर दें और बताएं कि दुनिया से जुड़ी कौन सी खबर आप पढ़ना चाहते हैं। हम आपके फीडबैक के अनुसार खबरों को प्रस्तुत करेंगे। 

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