{"_id":"67a33c75f01605edf4017b3d","slug":"failure-of-democratic-system-if-governor-doesn-t-grant-assent-to-bills-second-time-tn-to-sc-2025-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: 'यह लोकतांत्रिक प्रणाली की विफलता', राज्यपाल से टकराव पर सुप्रीम कोर्ट में बोली तमिलनाडु सरकार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: 'यह लोकतांत्रिक प्रणाली की विफलता', राज्यपाल से टकराव पर सुप्रीम कोर्ट में बोली तमिलनाडु सरकार
Wed, 05 Feb 2025 03:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 05 Feb 2025 03:54 PM IST
सार
Supreme Court: तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर राज्यपाल आर.एन. रवि विधानसभा से पारित विधेयकों को दूसरी बार मंजूरी नहीं देते, तो यह लोकतांत्रिक प्रणाली की विफलता होगी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच विवाद से राज्य और जनता को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अगर राज्यपाल आर.एन. रवि विधानसभा से पारित विधेयकों को दूसरी बार मंजूरी नहीं देते हैं, तो यह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली की विफलता की वजह बनेगा। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही।
विज्ञापन
सरकार और राज्यपाल के विवाद से जनता को नुकसान: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो विधानसभा में पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी को लेकर राज्यपाल के साथ चल रहे टकराव को लेकर दायर की गई थीं। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच विवाद से जनता और राज्य को नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
मंगलवार को तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से कहा कि कानून के अमुताबिक जब राज्य की विधानसभा कोई विधेयक पारित करती है, तो राज्यपाल उसे दोबारा विचार करने के लिए भेज सकते हैं। लेकिन अगर वही विधेयक फिर से विधानसभा से पारित होकर राज्यपाल को भेजा जाता है, तो राज्यपाल के पास मंजूरी देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। यह हमारे सांविधानिक ढांचे में तय प्रक्रिया है। अगर वे फिर भी मंजूरी नहीं देते हैं या असहमति जताते हैं, तो यह हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विफलता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान हैं कि राज्य पाल दूसरी बार विधेयक पर मंजूरी देने के लिए बाध्य होते हैं।
विज्ञापन
'राज्यपाल के पास विधेयकों को मंजूरी देने के अलावा कोई विकल्प नहीं'
वहीं, तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने भी यही दलील दी कि विधेयकों को राष्ट्रपति को भेजने का विकल्प पहली बार में ही किया जाना था और बाद में ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विधेयक के दोबारा पारित होने के बाद राज्यपाल के पास मंजूरी देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होता और वह इसे राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकते।
छह फरवरी को मामले पर फिर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय नहीं दिया। हालांकि, मामले को अगली सुनवाई छह फरवरी को तय की है, जिसमें पहले तमिलनाडु सरकार के वकील की दलीलें सुनी जाएंगी और फिर राज्यपाल के वकील, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की दलीलें सुनी जाएंगी। तमिलनाडु सरकार ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और आरोप लगाया था कि राज्यपाल की ओर से विधेयकों को मंजूरी देने में देरी की जा रही है।