पड़ताल: क्या वाकई पैरासिटामॉल टैबलेट खाने से हो रही हैं भयंकर बीमारियां?
आम तौर पर हम सामान्य सर्दी-बुखार या अन्य मौसमी बीमारियों के समय मेडिकल की दुकान से फर्स्ट एड के तौर पर बिना डॉक्टरी सलाह के कुछ दवाएं ले लेते हैं। पैरासिटामॉल के टैबलेट उनमें से प्रमुख हैं। अगर आप भी मेडिकल की दुकान से पैरासिटामॉल के टैबलेट लेकर बेहिचक उनका सेवन कर लेते हैं तो यह खबर आपके लिए भी बेहद जरूरी है।
'ध्यान रखें कि P-500 लिखा हुआ पैरासिटामॉल न लें। यह नया, बहुत सफेद और चमकदार पैरासिटामॉल है। डॉक्टरों ने “माचुपो” वायरस — जिसे उच्च मृत्यु दर के साथ दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में से एक माना जाता है — इसमें होना साबित किया है। कृपया इस संदेश को सभी लोगों और परिवारों के लिए साझा करें और उनसे जीवन बचाएं।'- इस तरह के अन्य कई मेसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें पैरासिटामॉल लेने से मना किया जा रहा है।
इन मेसेजों के साथ ही कई फोटोज भी शेयर किए जा रहे हैं। इनमें यह दिखाया गया है कि इस टैबलेट का सेवन करने वाले लोगों को शरीर में तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं और तकलीफ इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि इंसान की मौत तक हो जाती है।
कई जगह तो ऐसे मेसेज भी लिखे जा रहे हैं कि "कृप्या ये पैरासिटामॉल न खाएं न खरीदें जिसपे P /500 लिखा हो इसमें एक वाइरस पाया गया है जो विश्व के सबसे खतरनाक में से एक है। यह जानकारी सभी को भेजो।"
क्या कहती है पड़ताल?
अमर उजाला ने जब पैरासिटामॉल टैबलेटों को लेकर विश्वसनीयता की जांच पड़ताल की तो पता चला कि इस तरह की अफवाहें पहले भी फैलाई जा चुकी हैं। इन दावों में किसी तरह की सच्चाई नहीं है। वायरल खबरों के मुताबिक पैरासिटामॉल टैबलेट में माचुपो नाम का एक घातक वायरस है, जिसके कारण लोगों को खतरनाक बीमारियां हो रही हैं।
जबकि सच यह है कि माचुपो वायरस के कारण बोलिवियन रक्तस्रावी बुखार होता है जो दक्षिण अमेरिका तक ही सीमित है। भारत में अब तक माचुपो वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस अफवाह को कई प्रतिष्ठित अखबारों ने भी खारिज किया है।
इसके अलावा मलेशिया सरकार ने भी इसे अफवाह घोषित करते हुए आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की और कहा कि टैबलेट में कोई वायरस नहीं है।
साथ ही इंडोनेशियाई फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी इस मामले में आधिकारिक बयान दिया और कहा है कि दवा और खाद्य नियामक एजेंसी पूर्व बाजार मूल्यांकन की सुरक्षा, प्रभावकारिता, गुणवत्ता और लेबलिंग / लेबलिंग का मूल्यांकन करती है और नियमित रूप से इंडोनेशिया में उत्पादन और वितरण सुविधाओं और उत्पादों का पर्यवेक्षण करती है। सोशल मीडिया पर जो बातें वायरल हो रही हैं उसके संबंध में एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार पैरासिटामॉल में माचूपो वायरस नहीं पाया गया है।