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फैक्ट चेक: क्या बारिश से कमजोर पड़ेगा कोरोना वायरस, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Fri, 21 May 2021 03:31 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 21 May 2021 03:31 PM IST
सार

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी के अध्ययन के अनुसार, ऐसा माना जा रहा है कि बारिश में मौजूद नमी के कारण वायरस अधिक सक्रिय हो जाएंगे जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बरसात के मौसम में विशेषज्ञ लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं...

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Fact Check: Can climate change and rain really reduce the speed of coronavirus infection
दिल्ली में बारिश - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच चक्रवाती तूफान ताउते ने कई राज्यों के मौसम को बदल दिया है। कई शहरों में प्री-मानसून की बौछारें भी शुरू हो गई हैं। बदलते मौसम के चलते दिल्ली समेत कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मौसम में आए बदलाव के बीच ये दावा किया जाने लगा है कि बारिश होने से कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो जाएगी। हालांकि एक्सपर्ट इसे गलत क़रार दे रहे हैं। उनकी लोगों से अपील है कि वे बारिश के मौसम में कोरोना वायरस को लेकर अतिरिक्त सावधानियां बरतें। क्योंकि नमी के कारण हवा में कोरोना वायरस काफी देर तक ठहर सकता है। इससे संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

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कोरोना और मौसम का नहीं है कोई संबंध: रिसर्च

कोरोना पर किसी भी मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस बारे में स्पष्ट कर चुका है कि मौसम और कोरोना का आपस में कोई भी लेना-देना नहीं है। इस बारे में कई रिसर्च और स्टडीज भी सामने आ चुकी है।

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी के अध्ययन के अनुसार, ऐसा माना जा रहा है कि बारिश में मौजूद नमी के कारण वायरस अधिक सक्रिय हो जाएंगे जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बरसात के मौसम में विशेषज्ञ लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

वही, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एक शोध के अनुसार, वायरस से जुड़े कई मामलों में 17 दिनों के बाद भी सतह पर कोरोना वायरस पाया गया है। रिसर्च के मुताबिक इन हालात में ये कहना मुश्किल है कि बारिश के पानी के संपर्क में आने से कोरोना वायरस खत्म या कमजोर हो जाएगा।

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आईसीएमआर द्वारा कोविड-19 के लिए बनाई गई रिसर्च एवं ऑपरेशन टीम भी बता चुकी है, किसी भी मौसम का प्रभाव कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर नहीं पड़ता। टीम के सदस्यों का कहना है कि बारिश में कोरोना के मामले कम होने की संभावना इसलिए भी नहीं है क्योंकि सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देशों में जहां पूरे साल बारिश होती है, इस घातक वायरस के संक्रमण के मामले वहां भी मौजूद हैं।


कुछ दिन पूर्व ही सरकारी सूचना एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक विंग ने भी मौसम और कोरोना के प्रभाव पर साफ करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार बारिश होने या मौसम बदलने के कारण नहीं कम होने वाली है, बल्कि यह स्थिति कंट्रोल होगी तो हमारे-आपके व्यवहार से यानी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने से। कोरोना संक्रमण की रफ्तार रुक सकती है। अगर हम सही तरह से मास्क का प्रयोग करें। हर कोई दो गज की दूरी बनाकर रखें और अपने हाथ समय-समय पर धोते रहें व सैनेटाइज करते रहें।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही सोशल मीडिया और लोगों द्वारा कई तरह के गलत दावे किए जा रहे हैं। इसी तरह का दावा पिछले साल भी किया था कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही वायरस खत्म हो जाएगा। फिर बारिश को लेकर दावा किए जाने लगे। मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वायरस की रफ्तार ओर बढ़ गई और दूसरी लहर से देश में हालात ज़्यादा खराब हो गए। इसलिए मौसम में बदलाव से वायरस पर कुछ असर नहीं पड़ता है।

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