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तकनीक बनी परेशानी: पेटेंट और पेशेंट के कंफ्यूजन में आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर का फेसबुक ब्लॉक
Fri, 26 Mar 2021 06:16 AM IST
Kuldeep Singh
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 26 Mar 2021 06:16 AM IST
सार
- प्रो. राव ने पेटेंट लिखा और मशीन लर्निंग ने पेशेंट समझा, कोविड-19 की अफवाह समझकर अकांउट 48 घंटे ब्लॉक
- फेसबुक की मशीन लर्निंग ने उस पेटेंट को पेशेंट समझ लिया
- 48 घंटों के बाद जाकर फेसबुक प्रबंधन को जब जानकारी मिली तब जाकर अकाउंट अनब्लॉक हो पाया
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
तकनीक के इस युग में जहां मशीनों ने इंसान का काम आसान बना दिया। ऐसे में यह मशीन दिक्कत का सबब भी बन रही है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. रामगोपाल राव ने कोरोना काल के दौरान रिसर्च पब्लिकेशन में भारत के विश्व में तीसरे स्थान पर आने की जानकारी अपने फेसबुक वॉल पर साझा की।
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प्रो. राव ने पेटेंट लिखा और मशीन लर्निंग ने पेशेंट समझा, कोविड-19 की अफवाह समझकर अकांउट 48 घंटे ब्लॉक
इसमें प्रो. राव ने आईआईटी दिल्ली में साल दर साल बढ़ रहे पेटेंट के बारे में लिखा था। फेसबुक की मशीन लर्निंग ने उस पेटेंट को पेशेंट समझ लिया। मशीन को लगा कि प्रो. राव कोविड-19 को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह फैला रहे हैं। मशीन लर्निंग की ऑटोमेटकली अफवाह से बचने की कमांड के चलते अकाउंट ब्लॉक हो गया। खैर... 48 घंटों के बाद जाकर फेसबुक प्रबंधन को जब जानकारी मिली तब जाकर अकाउंट अनब्लॉक हो पाया।
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आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. राव छात्रों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों से अक्सर सोशल मीडिया पर शोध, इनोवेशन और पढ़ाई को लेकर चर्चा करते हैं। कोरोना काल में भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च के चलते ही चीन और यूएसए के बाद अब भारत का नाम जुड़ गया है। इसमें लिखा था कि 2019 में भारत के पास नैनोटेक्नोलॉजी में सिर्फ 54 पेटेंट थे। उसका पेटेंट शेयर 0.52 फीसदी था। जबकि वैश्विक महामारी कोविड-19 में सीमित संस्थानों केबीच भारत के पास 15083 पेटेंट हो गए हैं। जबकि दुनियाभर के पब्लिकेशन में भारत को तीसरा स्थान मिला है।
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पेटेंट को आईपी लिखने से कंफ्यूजन
प्रो. राव ने अपने आर्टिकल में पेटेंट को ट्विटर लैंग्वेज के आधार पर आईपी लिख दिया था। इसी आईपी को मशीन ने पेशेंट समझ लिया।
रिसर्च और पेटेंट से पांच गुना कमाई में बढ़ोतरी
फेसबुक वॉल पर कोविड-19 के दौरान रिसर्च पर बात लिखी थी। इसे मशीन ने कंफ्यूज कर लिया। खैर बाद में अनब्लॉक कर दिया गया है। भारत के पेटेंट बढ़ने में आईआईटी का भी सहयोग है। आईआईटी दिल्ली ने वर्ष 2016 से 2020 के बीच अपनी रिसर्च और पेंटेट पर लगातार सुधार किया है। पहले 50 रिसर्च पेपरों के बाद सिर्फ एक पेटेंट हो पाता था। वहीं, अब 17 रिसर्च पेपर पर एक पेटेंट मिल जाता है। ऐसे ही स्टार्टअप में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे आईआईटी दिल्ली की कमाई का जरिया पांच गुना तक बढ़ा है।
-प्रो. रामगोपाल राव, डायरेक्टर, आईआईटी दिल्ली।