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Extortion Case: 'वानखेड़े के खिलाफ जांच टीम का हिस्सा नहीं हो सकते थे NCB डिप्टी डीजी', ट्रिब्यूनल की टिप्पणी

Tue, 05 Sep 2023 10:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 05 Sep 2023 10:47 PM IST
सार

Extortion Case: केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने माना है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह कार्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में उस जांच दल का हिस्सा नहीं हो सकते थे, जिसे भारतीय राजस्व सेवा (आईआरस) के अधिकारी समीर वानखेड़े की कथित प्रक्रियागत खामियों की जांच के लिए गठित किया गया था। 

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Extortion and bribery case: Tribunal says NCB's deputy DG could not have been part of enquiry team against Wan
एनसीबी के डीडीजी ज्ञानेश्वर सिंह - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने माना है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह कार्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में उस जांच दल का हिस्सा नहीं हो सकते थे, जिसे भारतीय राजस्व सेवा (आईआरस) के अधिकारी समीर वानखेड़े की कथित प्रक्रियागत खामियों की जांच के लिए गठित किया गया था। 

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न्यायाधिकरण ने कहा कि ज्ञानेश्वर सिंह वानखेड़े को ड्रग्स-ऑन-क्रूज मामले की जांच के संबंध में दिए थे, इसलिए वह जांच टीम का हिस्सा नहीं हो सकते थे। अधिकरण ने  21 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि जांच दल द्वारा सौंपे गए निष्कर्ष प्रारंभिक प्रकृति के हैं, इसलिए केंद्र सरकार और एनसीबी रिपोर्ट के आधार पर वानखेड़े के खिलाफ कोई कार्रवाई कनरे से पहले उनका व्यक्तिगत पक्ष सुनेंगे। 
 

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वानखेड़े ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय को न्यायाधिकरण के आदेश के बारे में सूचित किया। न्यायमूर्ति नितिन सांबरे और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ वानखेड़े की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनके खिलाफ दर्ज जबरन वसूली और रिश्वतखोरी के मामले को रद्द करने की मांग की गई थी।

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सीबीआई का मामलायह है कि वानखेड़े और चार अन्य ने अभिनेता शाहरुख खान से 2021 में कॉर्डेलिया क्रूज जहाज से ड्रग्स की कथित जब्ती के बाद अपने बेटे आर्यन को न फंसाने के लिए 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। जमानत मिलने से पहले आर्यन खान ने लगभग एक महीने जेल में बिताए।
 

पीठ ने कहा कि वानखेड़े अगर चाहें तो कैट के आदेश को रिकॉर्ड पर रखते हुए हलफनामा दायर कर सकते हैं। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और सदस्य आनंद माथुर ने 21 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि एनसीबी अधिकारी ज्ञानेश्वर सिंह विशेष जांच दल (एसईटी) का हिस्सा नहीं हो सकते थे जो वानखेड़े में कथित प्रक्रियागत खामियों की जांच कर रहे थे। 

आईआरएस अधिकारी वानखेड़े कथित क्रूज ड्रग के भंडाफोड़ के समय एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक थे। न्यायाधिकरण ने कहा कि मादक पदार्थ का मामला दर्ज होने के बाद ज्ञानेश्वर सिंह ने न केवल जांच की निगरानी की और वानखेड़े को निर्देश दिए बल्कि उन्हें कार्ययोजना भी दी।

अधिकरण ने अपने आदेश में कहा, हमारी राय में प्रतिवादी संख्या चार (ज्ञानेश्वर सिंह) जांच में सक्रिय रूप से शामिल होने के कारण एसईटी का हिस्सा नहीं हो सकते थे, जिसका गठन जब्ती के दौरान अधिकारियों की ओर से कथित प्रक्रियागत चूक की जांच करने और उपरोक्त अपराध के संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए किया गया था। हालांकि, कैट ने एनसीबी की इस दलील पर गौर किया कि एसईटी रिपोर्ट प्रारंभिक प्रकृति की है और वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में केंद्र सरकार और एनसीबी द्वारा स्वतंत्र निर्णय लिया जाएगा। 

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