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एक्सप्लेनर: सियासत में उतरेगा एक और आईएएस अफसर, दिव्या मित्तल से पहले इस्तीफा देने वाले क्या कर रहे?

Tue, 29 Sep 2026 12:33 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 29 Sep 2026 12:33 PM IST
सार

करीब 13 साल तक आईएएस की जिम्मेदारी संभालने के बाद दिव्या मित्तल ने अब नई राह चुन ली है। इस्तीफे के बाद उन्होंने अपने अगले कदम से पर्दा उठाते हुए बताया कि वह उत्तर प्रदेश में रहकर राजनीति में सक्रिय होंगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि आईएएस अधिकारी के इस्तीफा देने की प्रक्रिया क्या है?

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Explainer: Divya Mittal Enters Politics; What Are Former IAS Officers Doing Now?
आईएएस अफसर का इस्तीफा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा देने की घोषणा पहले ही कर दी थी। उनके इस्तीफे में पारिवारिक और निजी कारणों का उल्लेख किया गया था। अब उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद के अगले कदम को भी साफ कर दिया है। अब उन्होंने बताया है कि वह राजनीति में सक्रिय होंगी, लेकिन फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। उनका कहना है कि वह उत्तर प्रदेश में ही सक्रिय रहेंगी और जनता के साथ मिलकर आगे की राह तय करेंगी। मंगलवार को एक्स पर वीडियो जारी कर उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने सरकार और नौकरशाही को लेकर भी सवाल उठाए।

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दिव्या मित्तल ने अपने अंतिम फैसले की घोषणा से एक दिन पहले सोमवार को एक्स पर अपने भविष्य को लेकर चार संभावित विकल्प साझा किए थे। उन्होंने लिखा था- बच्चे छोटे हैं, अब घर। इसके बाद उन्होंने विदेश में नौकरी का विकल्प बताया और अच्छे पैकेज के साथ विदेश लौटने की बात कही। उन्होंने आईएएस के अनुभव और अपनी किताब का भी जिक्र किया था।
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इन विकल्पों के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चा थी। अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आईएएस की सेवा छोड़ने के बाद वह उत्तर प्रदेश में रहकर राजनीति में सक्रिय होंगी, हालांकि फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। यह पहली बार नहीं है जब किसी आईएएस अधिकारी ने सेवा पूरी होने से पहले इस्तीफा दिया हो। इससे पहले भी कई अधिकारी इस्तीफे के बाद राजनीति में सक्रिय हुए हैं।
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ऐसे में सवाल उठता है कि दिव्या मित्तल कौन हैं? आईएएस अधिकारी के समय से पहले इस्तीफा देने को लेकर नियम क्या कहता है? समय पूर्व इस्तीफे पर इन अधिकारियों को क्या पेंशन जैसी सुविधाओं लाभ मिलता है? क्या दिव्या मित्तल पर वीआरएस लागू होगा? पहले कौन-कौन से अधिकारी अपने इस्तीफे की वजह से चर्चा में रहे? आइये जानते हैं...

Explainer: Divya Mittal Enters Politics; What Are Former IAS Officers Doing Now?
दिव्या मित्तल - फोटो : Amar Ujala

दिव्या मित्तल का सफर

दिव्या मित्तल 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 23 नवंबर 1983 को दिल्ली में हुआ था और वह मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बंगलूरू से एमबीए किया। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने लंदन में एक्सॉटिक डेरिवेटिव्स ट्रेडर के रूप में काम किया था।

सितंबर 2013 को वह आईएएस में नियुक्त हुईं। प्रशिक्षण के दौरान मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में उन्हें अशोक बंबावले पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार दो साल के पूरे प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैच के एक आईएएस प्रशिक्षु को दिया जाता है। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में मवाना (मेरठ), मेरठ और सिधौली (सीतापुर) में एसडीएम के तौर पर काम किया। बाद में वह गोंडा की मुख्य विकास अधिकारी, यूपीएसआईडीए की संयुक्त प्रबंध निदेशक और बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष रहीं।

इसके बाद मित्तल ने नीति आयोग में सहायक सचिव के रूप में भी काम किया। वहां उनके एक प्रस्तुतीकरण का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली पांच प्रस्तुतियों में हुआ था। इसके बाद वह संत कबीर नगर की जिलाधिकारी बनीं और फिर मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में तैनात हुईं। मिर्जापुर के बाद वह यूपी ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहीं और इसके बाद देवरिया की जिलाधिकारी के पद पर तैनात हुईं। मई 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया।

मिर्जापुर की जिलाधिकारी के तौर पर उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चा में रहा। उनके कार्यकाल में पहाड़ी क्षेत्र के लहुरियादह गांव में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल हुई। इसके अलावा उनके प्रशासनिक कार्यों के कारण भी वह चर्चा में रहीं।

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क्या है प्रक्रिया? - फोटो : Amar Ujala

समय से पहले इस्तीफा देने का नियम क्या हैं?

आईएएस अधिकारी सेवा पूरी होने से पहले इस्तीफा दे सकता है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के इस्तीफे अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 5 के तहत आते हैं। इस्तीफे के मामलों को निपटाने के लिए 16 अगस्त 2011 को दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।

इस्तीफा कैसे दिया जाता है?

अधिकारी को अपना इस्तीफा लिखित रूप में देना होता है। उसमें सेवा छोड़ने की इच्छा और इस्तीफा प्रभावी होने की तारीख स्पष्ट होनी चाहिए।

  • राज्य कैडर में तैनात अधिकारी अपना इस्तीफा मुख्य सचिव को देता है।
  • केंद्र में प्रतिनियुक्त अधिकारी संबंधित मंत्रालय या विभाग के सचिव को इस्तीफा देता है।
  • इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामला संबंधित कैडर और केंद्र सरकार को भेजा जाता है।

इस्तीफा स्वीकार करने से पहले क्या जांच होती है?

इस्तीफे पर फैसला लेने से पहले अधिकारी के बारे में मुख्य रूप से यह देखा जाता है;

  • उसके खिलाफ कोई सतर्कता मामला लंबित है या नहीं,
  • कोई विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है या नहीं
  • अधिकारी निलंबित है या नहीं
  • उस पर सरकार का कोई बकाया है या नहीं
  • सरकार के साथ कोई बांड है या नहीं
  • विशेष प्रशिक्षण, अध्ययन या छात्रवृत्ति के बदले सेवा करने की कोई बाध्यता है या नहीं

इसके बाद संबंधित कैडर अपनी टिप्पणी और सिफारिश के साथ मामला केंद्र सरकार को भेजता है।

क्या हर इस्तीफा स्वीकार होता है?

नहीं। सामान्य तौर पर इस्तीफा स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन अगर अधिकारी के खिलाफ गंभीर विभागीय या सतर्कता मामला चल रहा हो या वह निलंबित हो, तो इस्तीफा स्वीकार करने से पहले मामले की गंभीरता और जनहित को देखा जाता है।

इस्तीफा वापस लेने का नियम
अगर सक्षम प्राधिकारी ने अभी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है, तो अधिकारी लिखित रूप में अपना इस्तीफा वापस ले सकता है। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद भी कुछ विशेष परिस्थितियों में उसे वापस लेने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए मुख्य शर्तें हैं;

  • इस्तीफा किसी मजबूर करने वाली परिस्थिति में दिया गया हो।
  • उस परिस्थिति से अधिकारी की ईमानदारी, कार्यक्षमता या आचरण पर सवाल न उठता हो।
  • बाद में परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव आया हो।
  • इस्तीफा प्रभावी होने के बाद अधिकारी का आचरण उचित रहा हो।
  • इस्तीफा प्रभावी होने और दोबारा सेवा में लौटने के बीच की अवधि 90 दिन से अधिक न हो।
  • अधिकारी का पुराना या उसके बराबर का पद उपलब्ध हो।

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इस्तीफा बनाम वीआरएस - फोटो : Amar Ujala

किन मामलों में इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता?

अगर इस्तीफा देने का उद्देश्य;

  • निजी कंपनी में नौकरी करना,
  • सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कंपनी या संस्था में जाना,
  • राजनीतिक दल या राजनीतिक संगठन से जुड़ना,
  • राजनीतिक गतिविधि या आंदोलन में शामिल होना,
  • चुनाव लड़ना या चुनाव संबंधी राजनीतिक गतिविधि करना है, तो इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाता।

अगर इस्तीफा वापस लेने की अनुमति मिलती है और अधिकारी सेवा में लौटता है, तो बीच की सेवा-विच्छेद अवधि को माफ किया जा सकता है। लेकिन इस्तीफा प्रभावी होने से दोबारा सेवा में लौटने तक की अवधि को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में नहीं गिना जाता।

इस्तीफा देने पर पेंशन का क्या होगा?

नियम 5 का मुख्य प्रावधान है कि सेवा से इस्तीफा देने वाले व्यक्ति को सामान्य तौर पर सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाते।  हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में नियमों के तहत अपवाद हो सकते हैं। 

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस क्या है?

आईएएस अधिकारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रावधान अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16 में है। इसके तहत अधिकारी सामान्य सेवानिवृत्ति की उम्र से पहले भी सेवा छोड़कर सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन इसके लिए तय अर्हकारी सेवा पूरी करना जरूरी है। नियम 16(2) के तहत अधिकारी 30 साल की अर्हकारी सेवा पूरी करने के बाद या 50 साल की उम्र पूरी करने के बाद कम से कम तीन महीने की लिखित सूचना देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकता है। वहीं नियम 16(2ए) के तहत 20 साल की अर्हकारी सेवा पूरी करने वाला अधिकारी भी तीन महीने की लिखित सूचना देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले सकता है।

दिव्या मित्तल पर वीआरएस क्यों लागू नहीं होगा?

दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और करीब 13 साल की सेवा के बाद उन्होंने इस्तीफा देने की घोषणा की है। इसलिए उनके मामले में वीआरएस लागू नहीं होता। 

  • इसकी दो वजह हैं, पहली, वीआरएस के लिए 20 साल की अर्हकारी सेवा वाला प्रावधान भी उनकी करीब 13 साल की सेवा से पूरा नहीं होता। 
  • दूसरी, उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन नहीं किया, बल्कि इस्तीफा दिया है। इसलिए उनका मामला नियम 16 की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बजाय नियम 5 के तहत इस्तीफे का है।

किन अधिकारियों ने इस्तीफा देकर वापस लिया?

तमिलनाडु कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी अनीश शेखर ने 29 फरवरी 2024 को निजी कारणों से इस्तीफा दिया। उसी साल मई महीने में वह दोबारा भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस में लौट आए। आईएएस टॉपर शाह फैसल इस्तीफा देकर राजनीति में सक्रिय हो गए और जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी बनाई। इस पर राजनीतिक विवाद भी हुआ। लेकिन इस बीच उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था। बाद में उन्होंने फिर से सेवा में वापस आने का आवेदन दिया। तीन साल बाद वह वापस आईएएस सेवा में लौट आए।

किन का इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं हुआ?

कन्नन गोपीनाथन ने 2019 में आईएएस से इस्तीफा दिया। उन्होंने यह निर्णय जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में लिया। पिछले साल 13 अक्तूबर को वह कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए। लेकिन उनका इस्तीफा केंद्र ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने हाल में सोशल मीडिया पर लिखा, शायद मैं सबसे विशेषाधिकार प्राप्त सरकारी कर्मचारी हूं। मैं जब चाहूं अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर सकता हूं, जब चाहूं विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले सकता हूं और सरकार ने मुझे पूरी आजादी दे रखी है। न वेतन, न निलंबन, कुछ भी नहीं। इस्तीफा दिए सात साल हो गए हैं।

महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा व औषधि विभाग में संयुक्त सचिव व 2008 बैच के आईएएस अफसर दौलत देसाई ने इस्तीफा दिया। लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ।

1984 बैच के झारखंड कैडर के आईएस अधिकारी आरके श्रीवास्तव ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में स्थायी नियुक्ति के लिए आईएएस से इस्तीफा दिया था, लेकिन झारखंड सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इसके कारण उन्हें वापस उनके मूल कैडर में भेज दिया गया।

कौन-कौन से अधिकारी इस्तीफा देकर राजनीति में शामिल हो गए?

  • शशिकांत सेंथिल: तमिलनाडु कैडर के आईएएएस अधिकारी ने 2019 में इस्तीफा दिया था। सेंथिल बाद में कांग्रेस में शामिल होकर तमिलनाडु के तिरुवल्लूर से पिछला लोकसभा चुनाव लड़े और जीतकर संसद पहुंच गए। 
  • ओ.पी. चौधरी: छत्तीसगढ़ कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी थे। रायपुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने 2018 में आईएएस सेवा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। चौधरी इस वक्त छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री हैं। 
  • अजीत जोगी: 1968 बैच के आईएएस अधिकारी थे। जिला कलेक्टर रहते हुए उन्होंने आईएएस सेवा छोड़कर कांग्रेस में प्रवेश किया। आगे चलकर वे छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने।
  • यशवंत सिन्हा: 1960 में आईएएस में शामिल हुए और 1984 तक नौकरशाह रहे। इसके बाद राजनीति में आए। उन्होंने जनता दल के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया और बाद में भाजपा में शामिल हुए। वे केंद्र में वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी रहे।

कौन से अधिकारी कॉर्पोरेट में शामिल हो गए?

  • राजकमल: 1994 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने आईएएस से इस्तीफा देकर मैकिंजी एंड कंपनी जॉइन की।
  • धीरज माथुर: मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे और बाद में पीडब्ल्यूसी से जुड़े।
  • जयंत पारिमल: गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी थे और रिलायंस इंडस्ट्रीज में गए।
  • रवि कांत: पश्चिम बंगाल कैडर के अधिकारी थे। उन्होंने सरकारी सेवा छोड़ी और रामकी समूह में गए, जहां बाद में रामकी एनवायरो इंजीनियर्स के प्रबंध निदेशक बने।
  • ओ.पी. अग्रवाल: 1979 बैच के असम कैडर के आईएएस  अधिकारी थे और बाद में आईडीएफसी से जुड़े।
  • राजीव तलवार: आईएएस सेवा छोड़कर डीएलएफ से जुड़े थे।
  • प्रकाश कुमार: 1985 बैच के अधिकारी थे। उन्होंने 2008 में सेवा छोड़ी और सिस्को सिस्टम्स इंडिया में इंटरनेट बिजनेस सॉल्यूशंस समूह के निदेशक बने।
  • अनुराग श्रीवास्तव: करीब 16 साल आईएएस अधिकारी के तौर पर सेवा देने के बाद निजी क्षेत्र में गए और बाद में पीडब्ल्यूसी में पार्टनर बने।
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