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महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन हिंसा की पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Aug 2018 09:34 AM IST
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देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के अपराध पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। साथ ही अदालत ने इस मुद्दे की पड़ताल करने और इसके खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों का सुझाव देने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। दो स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह बात कही।
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दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर गौर करने और इस तरह के अपराधों पर नियंत्रण के लिए ऐहतियाती उपाय और उचित सजा सुझाने के लिए एक समिति गठित करने पर संभवत: कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। साथ ही कोर्ट का यह भी कहना है कि इस तरह के अपराधों का मुख्य पहलू दोषी व्यक्तियों में सुधार किया जाना है, क्योंकि दोषियों का सुधार ही समाज की असली आवश्यकता है।
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हाईकोर्ट ने जो समिति गठित करने का फैसला किया है, उसमें विद्या रेड्डी, एडवोकेट वृंदा भंडारी और स्वागत राहा शामिल होंगे। न्याय मित्र अपर्णा चंद्रा ने समिति के लिए ये नाम सुझाए थे, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
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बता दें कि समिति के ये तीनों सदस्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मुद्दे पर विशेषज्ञ हैं। इनमें विद्या रेड्डी, भारत में यौन शोषण को रोकने की दिशा में काम करने वाले संगठन (टीयूएलआईआर) के सदस्य हैं, जबकि वृंदा भंडारी एडवोकेट होने के साथ-साथ यौन हिंसा जैसे मुद्दों के विशेषज्ञ हैं और स्वागत राहा, सेंटर फॉर चाइल्ड एंड लॉ के सदस्य हैं। हालांकि इस समिति में और भी सदस्य शामिल होंगे, जिसपर अभी विचार किया जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।