Exclusive: पाकिस्तानी चुनाव में मिलकर कश्मीर का ऐसे राग अलाप रहे छह पाक दूतावास, 14 संगठन और 'लंदन प्लान'
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विस्तार
पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव होने हैं। इन चुनावों में माहौल बनाने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर से भारत के नाम का इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसके लिए बाकायदा पाकिस्तान सरकार ने कश्मीर पर अपना पुराना प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू किया है। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने दुनिया के छह अलग-अलग दूतावासों और 14 पाकिस्तानी संगठनों के माध्यम से पांच फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाने की तैयारी की है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में होने वाले चुनाव में जब तक भारत और कश्मीर का जिक्र न हो, तब तक उनके चुनावों में माहौल ही नहीं बनता है। यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना ने 'लंदन प्लान' के बाद भी अपना प्रोपेगंडा फैलाना जारी रखा। इसके लिए बाकायदा पाकिस्तानी सेना ने अपने सोशल मीडिया हैंडलर्स का इस्तेमाल करना शुरू किया है।
पाकिस्तान में होने वाले चुनाव से तीन दिन पहले आईएसआई और पाकिस्तानी सेना ने भारत को लेकर एक बार फिर से साजिश रचनी शुरू की हैं। खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने पांच फरवरी को कश्मीर एकजुटता दिवस मनाने के नाम पर माहौल बनाना शुरू किया है। ताकि 8 फरवरी को होने वाले पाकिस्तान के चुनाव में उसको फायदा मिल सके। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने छह दूतावासों को भी इसमें शामिल किया है। एक दूतावास में तो पाकिस्तान के मंत्री भी भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने वाले कार्यक्रम में शरीक हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के अमेरिकी दूतावास ने तो 5 फरवरी को अधिकारिक तौर पर छुट्टी की घोषणा तक कर दी। अमेरिका के लॉस एंजिल्स स्थित पाकिस्तान काउंसलेट जनरल में भी पाकिस्तान में आयोजित होने वाले चुनाव के मद्देनजर भारत का नाम लेकर अपनी अवाम को चुनावी माहौल में सक्रिय होने का प्लान बनाया है।
अमेरिका के अलावा कजाकिस्तान में भी पाकिस्तानी एंबेसी ने भारत और कश्मीर का नाम लेकर अपने देश में हो रहे चुनाव का माहौल बनाया है। खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बेल्जियम, प्राग और हंगरी में भी भारत और कश्मीर का जिक्र करके पाकिस्तानी चुनाव में पाकिस्तान सेना का एजेंडा आगे बढ़ाया है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में होने वाले चुनावों में पाकिस्तान सेना का एजेंडा तब तक नहीं सधता, जब तक वह भारत और कश्मीर का जिक्र न करें। रिटायर्ड कैप्टन बृजेश झा कहते हैं कि वैसे तो पाकिस्तान में इस बार 'लंदन प्लान' के तहत बड़ी सियासी पिच तैयार की है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सियासी मैदान में उतरने की रणनीति को ही लंदन प्लान कहा जा रहा है। इसी लंदन प्लान के तहत ही नवाज शरीफ पाकिस्तान के सियासी मैदान में डटे हैं। लेकिन पाकिस्तानी सेना और वहां की अवाम में चुनावी मोमेंटम तब तक नहीं आता, जब तक भारत और कश्मीर का जिक्र न हो।
कैप्टन झा कहते हैं कि पाकिस्तान में इस वक्त चार मोर्चे खुले हैं, जहां पर संघर्ष बना हुआ है। इसमें पहला मोर्चा पाकिस्तान और ईरान का खुला है। वह बताते हैं कि ईरान ने गुरुवार को नौ पाकिस्तानियों के शव पाकिस्तान को सौंपे हैं, जिससे पाकिस्तान सेना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि चुनाव से एन वक्त पहले इस तरीके से बने माहौल का असर पाकिस्तान सेना और अंदरूनी तौर पर उसकी ओर से समर्थित राजनीतिक दल के लिए नकारात्मक हो गया है। दूसरा मोर्चा पाकिस्तान के भीतर ही बलूचिस्तान को लेकर चल रहा है। इस मोर्चे पर भी पाकिस्तान की तत्कालीन केयरटेकर सरकार और सेना विफल है। जबकि तीसरा मोर्चा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर खुला हुआ है। चौथा और महत्वपूर्ण मोर्चा भारत को लेकर है। लेकिन बेवजह भारत इस तरह के किसी मामले में नहीं पड़ रहा है। यही वजह है कि हर मोर्चे पर फेल होने के बाद पाकिस्तानी सेना ने अपने चुनाव में भारत और कश्मीर का राग अलापना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने अपने 6 दूतावासों के साथ-साथ 14 पाकिस्तानी संगठनों को पाकिस्तान के भीतर हो रहे चुनाव में माहौल अपने पक्ष में करने का टास्क दिया है। इस कड़ी में पाकिस्तान के अमेरिकी स्थित फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर, कश्मीर पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट, वुमन यूनिवर्सिटी ऑफ पीओके, पश्बन ए हुर्रियत, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैरिटाइम, ह्यूमन राइट काउंसिल ऑफ़ पाकिस्तान समेत कई अलग-अलग संगठनों और संस्थाओं की ओर से सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाया जाने लगा है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की केयरटेकर सरकार और सेना की ओर से सभी यूनिवर्सिटी और मीडिया को भी कश्मीर के नाम पर सोशल मीडिया पर प्रचार करने के निर्देश दिए हैं।
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना ने जिन लोगों को कश्मीर पर माहौल बना कर सियासत को अपने पाले में करने की जिम्मेदारी दी है, उनमें ज्यादातर वही लोग हैं, जो पहले भी भारत के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक्टिव रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस बार भी पाकिस्तान में 31 जनवरी से लेकर 5 फरवरी तक इन्हीं हैंडलर को सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के हैशटैग के साथ आगे आने का पूरा प्लान समझाया है। खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक 11 तरह के टॉप ट्रेंडिंग हैशटैग को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों के हैंडलर्स को कहा गया है। पाकिस्तानी मामलों के जानकार और सेना के रिटायर्ड अधिकारी ब्रिगेडियर मलकीत चहल कहते हैं कि पाकिस्तान हमेशा से अपने चुनावों के समय इसी तरह की साजिश करता आया है। इस बार तो पाकिस्तान के भीतर भी अलग तरह की हवा बह रही है। इसलिए सेना और केयरटेकर सरकार भी परेशान है कि आखिर किस हथकंडे को अपनाकर चुनाव को अपने कब्जे में किया जाए।