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Supreme Court: विलंब पर छलका पूर्व जज का दर्द, जस्टिस लोकुर अनुच्छेद 370 और नोटबंदी से जुड़े इंसाफ पर बोले

Sat, 24 Feb 2024 07:47 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 24 Feb 2024 07:47 PM IST
सार

जस्टिस मदन बी लोकुर उन पांच जजों में शामिल रहे थे, जिन्होंने इतिहास में पहली बार सार्वजनिक प्रेस वार्ता कर सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक प्रणाली पर कुछ बातें कही थीं। न्यायिक सुधार की पैरोकारी करने वाले न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 और नोटबंदी जैसे जिंदगी से जुड़े मसलों पर फैसला आने में देरी होना न्याय की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

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Ex Supreme Court judge Madan B Lokur Article 370 Demonetisation Live Issues Prolonged delay quality of justice
जस्टिस मदन बी लोकुर सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

देश की अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं। दुर्भाग्य से कई बार जिंदगी और मौत से जुड़े मामले पर फैसला आने में भी देरी होती है। अदालतों में लंबित मामलों को लेकर शीर्ष अदालत की न्यायिक प्रणाली का अंग रहे जस्टिस मदन बी लोकुर ने अहम बयान दिया है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि कुछ ज्वलंत मुद्दों पर फैसला आने में बहुत अधिक देरी होना, अदालतों की साख के लिए अच्छी बात नहीं। जस्टिस लोकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना या नोटबंदी जैसी संवेदनशील मुद्दा आम जनता की जिंदगी से जुड़ा है।
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न्याय की गुणवत्ता प्रभावित, प्रणाली में गड़बड़ी की आशंका
उन्होंने कहा, इन मुद्दों का शीर्ष अदालत में पहले तो सूचीबद्ध होने में विलंब होना, उसके बाद अदालत से फैसला आने में भी देरी होने से न्याय की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सेवानिवृत्त जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि नोटबंदी और संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने जैसे ‘ज्वलंत मुद्दों’ को सूचीबद्ध करने में लंबे समय तक देरी और पूर्वानुमानित घोषणाएं न्याय की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इससे यह धारणा पैदा होती है कि न्यायिक प्रणाली में ‘कुछ गड़बड़’ है।
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नोटबंदी और चुनावी बॉन्ड जैसे मुद्दों पर भी बोले
जस्टिस लोकुर ने कहा, मामलों को सूचीबद्ध करने की समस्या कोई नई बात नहीं है और यह बहुत लंबे समय से है, खासकर सुप्रीम कोर्ट में। लेकिन आज हम इसके बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि आज दांव कई साल पहले की तुलना में बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी, अनुच्छेद 370 और राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड जैसे मामले कई वर्षों के बाद शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए गए थे। हमारे पास नोटबंदी से संबंधित मुद्दे हैं, जो मेरे विचार से चार या पांच साल बाद सूचीबद्ध हुए हैं। ऐसे ही चुनावी बॉन्ड से जुड़े मुद्दे पांच साल बाद सूचीबद्ध हुए
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