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ओडिशा: SCERT पूर्व निदेशक पाढ़ी गिरफ्तार, स्कूली किताबों में मिलीं 1600 गलतियां; कैसे हुआ मामले का पर्दाफाश?

Tue, 14 Jul 2026 11:09 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, भुवनेश्वर।
पीटीआई, भुवनेश्वर। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 14 Jul 2026 11:09 PM IST
सार

ओडिशा में कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली किताबों में मिली 1600 से ज्यादा गलतियों के मामले में पूर्व एससीईआरटी निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच एजेंसी ने उन पर किताबों की जांच और मंजूरी प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाया है। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-

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Ex-SCERT director Manoj Padhy arrested, sent to jail in Odisha school textbook error case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ओडिशा के राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी को मंगलवार को जेल भेज दिया गया। उन्हें कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए तैयार की गई स्कूली किताबों में बड़ी संख्या में मिली गलतियों के मामले में गिरफ्तार किया गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
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मनोज पाढ़ी पर कार्रवाई क्यों हुई?
पाढ़ी ओडिशा प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इससे पहले विकास आयुक्त डीके सिंह की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें निलंबित किया गया था। इस मामले में परिषद के तीन अन्य सहायक निदेशकों को भी निलंबित किया गया था।
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पुलिस ने बताया कि सरकारी स्कूलों की किताबों में हुई इन गलतियों से सरकारी खजाने को करीब 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

गिरफ्तारी के बाद अदालत ने क्या फैसला दिया?
सरकारी वकील नित्यानंद पांडा ने बताया कि पुलिस की अपराध शाखा के कर्मियों ने चार घंटे तक पूछताछ के बाद पाढ़ी को गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें कटक के जेएमएफसी-3 की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पांडा ने कहा, राज्य सरकार ने पाढ़ी की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि जांच एजेंसी को उनके खिलाफ पहली नजर में पर्याप्त सबूत मिले हैं।
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हालांकि, पाढ़ी के वकील सुभाषीष मिश्रा ने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है। 

किताबों की गलतियों में क्या था मामला?
इससे पहले किताबों में मिली गलतियों को लेकर हुई व्यापक आलोचना के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने  उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इन गलतियों में वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को पायलट बताने वाला संदर्भ भी शामिल था। 

जांच कैसे शुरू हुई?
सोमवार को ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने स्कूली किताबों में मिली अलग-अलग गलतियों की जांच के लिए कई टीमें बनाई थीं। अपराध शाखा ने शिक्षा निदेशक और राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक मधुस्मिता साहू की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया।

अपराध शाखा के अपराध जांच विभाग ने एक बयान में कहा, मनोज कुमार पाढ़ी (57 वर्षीय) के खिलाफ पहली नजर में सबूत पूरी तरह स्थापित होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि एससीईआरटी के तत्कालीन निदेशक के रूप में पाढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत किताबों को तैयार करने की प्रक्रिया की पूरी निगरानी, तालमेल, निरीक्षण और मंजूरी की जिम्मेदारी दी गई थी।

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लापरवाही के आरोप क्या हैं?
एक अधिकारी ने कहा, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा नहीं किया और तथ्यों, वैज्ञानिक जानकारी, भौगोलिक जानकारी, अनुवाद और चित्रों की सामग्री की जांच सुनिश्चित किए बिना ही छपाई के लिए तैयार पांडुलिपियों को मंजूरी दे दी और प्रकाशन के लिए भेज दिया। यह आपराधिक लापरवाही के बराबर है। यह मामला तब सामने आया, जब कुछ शिक्षकों ने राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई किताबों में 1600 से अधिक गलतियां पाईं। 

इस बीच, विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस ने मामले की अपराध शाखा से जांच शुरू होने में हुई 'देरी' पर सवाल उठाए। बीजेडी की युवा शाखा के अध्यक्ष चिन्मय साहू ने आरोप लगाया, मामले में देरी सबूतों को नष्ट करने के लिए की गई। उन्होंने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
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