कानों देखी: राहुल गांधी के सिवा सब चुप, कभी-कभार बस पवार बोल देते हैं
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केंद्र सरकार के मंत्रियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बजट 2021 आए दो दिन हो गए, लेकिन अभी उन्हें ढंग से यही नहीं पता चल पा रहा है कि उनके मंत्रालय को और किस विभाग को किस मद में कितना बजट मिला है। बुधवार को सुबह एक केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों से ये जानने के लिए परेशान थे। दरअसल वित्त मंत्री की तरफ से डिजिटल बजट की प्रति वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों को उपलब्ध कराई गई है। लेकिन कई केंद्रीय मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय की जिम्मेदारी है। इन मंत्रालयों में कैबिनेट मंत्री की मदद के लिए राज्यमंत्री भी हैं। लेकिन राज्यमंत्रियों को जानकारी ही नहीं मिल पा रही है। इसके चलते वह मीडिया में 2021-22 के बजट की न तो खूबियां गिना पा रहे हैं और और न ही भावी योजनाओं को लेकर तेजी दिखा पा रहे हैं।
राहुल गांधी के सिवा सब चुप, कभी कभार बस पवार बोल देते हैं
भाजपा के नेता बड़े खुश हैं। उनके खुश होने की दो बड़ी वजहें हैं। पहली यह कि कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर काफी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। दूसरी बड़ी वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के ऊपर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कोई हमला नहीं बोलता। कभी-कभार राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेताओं में शरद पवार हैं जो केंद्र सरकार को आईना दिखा देते हैं, लेकिन राजनीति के चतुर खिलाड़ी पवार की भाषा पूरी तरह राजनीति में पिरोई और मर्यादित रहती है। इसलिए राहुल गांधी को जवाब देने में भाजपा को कोई परेशानी नहीं होती। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि भले ही कांग्रेस का अंदरूनी मामला हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर खुद राहुल गांधी को लेकर खींचतान मची है। उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने के लिए फिर से मनाया जा रहा है। इसलिए मजबूत विपक्ष की स्थिति है ही नहीं। पार्टी महासचिव का कहना है कि केंद्र सरकार और भाजपा की चाहे कोई जितनी भी आलोचना कर ले, लेकिन विपक्ष के पास तो अब मुकाबले में कोई नेता ही नहीं है। उनके मुताबिक यही स्थिति करीब-करीब कई प्रदेशों में है। उ.प्र. में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुकाबले में न तो समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव हैं और न ही बसपा प्रमुख मायावती। इसलिए लंबे समय तक सत्ता में बने रहने को लेकर भाजपा पूरे आत्मविश्वास से भरी नजर आती है।
किसान आंदोलन को लेकर सरकार के रणनीतिकारों की जुदा हैं राहें
किसान आंदोलन से निबटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने संवेदनशील हैं, उतनी ही रह-रहकर गाड़ी पटरी से उतर जा रही है। सरकार के रणनीतिकारों की भी राहें जुदा-जुदा हैं। मंत्रालय के अधिकारियों को भी केंद्र सरकार की रणनीति जरा कम समझ में आ रही है। वाणिज्य मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव को समझ में ही नहीं आ रहा है कि सरकार क्या चाहती है और इसे कैसे हल करना चाहती है? कानून मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि किसानों का आंदोलन लाल किला की घटना के बाद 26 जनवरी की रात और 27 जनवरी की सुबह तक खत्म किया जा सकता था। इसके बाद यह आंदोलन अपने आप कमजोर पड़ जाता। यही स्थिति भाजपा के कुछ सांसदों और मंत्रियों की भी है। अधिकांश तो इस मामले में कोई चर्चा ही नहीं करना चाहते। एक राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का कहना है कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ऊपर आंदोलन को छोड़ दिया जाए तो वह आसानी से इसका समाधान निकाल लेंगे। वह बयानों में भी संजीदा हैं और खेती, किसानी को भी समझते हैं।
अपनी ही सुरक्षा के लिए परेशान है दिल्ली पुलिस, दूसरों की सुरक्षा कैसे करे?
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव टीवी पर लाइव थे। वह बता रहे थे कि दिल्ली में सीमा पर किसान आंदोलन को देखते हुए क्यों कील, कांटे और दीवार खड़ी कर रही है। वह बता रहे थे तो इसे शास्त्री भवन में एक एडिशनल सेक्रेटरी के दफ्तर में कुछ अफसर टीवी पर देख रहे थे। जैसे ही एसएन श्रीवास्तव ने घायल पुलिस कर्मियों की संख्या गिनाई, स्क्रीन पर देख रहे साहब को भी हंसी आ गई। कारण पूछने पर इंडियन लीगल सर्विस कॉडर के अफसर ने कहा कि बताइए यह भी कोई तर्क है। जो पुलिस आंतरिक मामले में लोगों की सुरक्षा के लिए है, अब वह इतना घबरा गई है कि उसे अपनी ही सुरक्षा खतरे में दिखाई पड़ रही है। लोग यह भी नहीं सोचते कि इस तरह के तर्क का जनता के बीच में क्या संदेश जाएगा। इस मामले में जब विदेश सेवा के अधिकारियों से जानने की कोशिश हुई तो उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर विदेशी मीडिया में खबरें बढ़-चढ़ कर आ रही हैं। इससे अधिक कुछ भी कहना ठीक नहीं है।
हर जगह हाई डिमांड में हैं योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाई डिमांड में हैं। एक अच्छे मुख्यमंत्री के साथ-साथ स्टार प्रचारक के रूप में लगातार उनकी मांग बढ़ रही है। पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भी राज्य में ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की जरूरत है तो असम में सर्बानंद सोनवाल की टीम भी प्रचार अभियान में योगी की मांग कर रही है। भाजपा की आईटी सेल से जुड़े एक सूत्र की मानें तो योगी आदित्यनाथ के प्रचार के बाद सोशल मीडिया में भाजपा के पक्ष में काफी तेजी नजर आती है। बताते हैं इसका कारण दो है। पहला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है। दूसरे वह हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के चेहरे के तौर पर लगातार स्थापित होते जा रहे हैं।
कहां खो गए किसान नेता सरदार वीएम सिंह?
सरदार वीएम सिंह की भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत से निभती है, लेकिन राकेश टिकैत से नहीं बनती। बताते हैं गाजीपुर बार्डर पर किसानों के समर्थन में आंदोलन खत्म करने के पहले वीएम सिंह की नरेश टिकैत से भी फोन पर बात हुई थी। उन्होंने आंदोलन से उठने के दौरान राकेश टिकैत पर कई आरोप भी लगाए थे, लेकिन अब वीएम सिंह के करीबियों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है। वीएम सिंह से लोगों का न तो संपर्क हो पा रहा है और अब न उनका कोई बयान आ रहा है। इसके सामानांतर राकेश टिकैत बड़े किसान नेता बनते जा रहे हैं। वह पश्चिमी उ.प्र. से लेकर हरियाणा तक खाप, पंचायतों को संबोधित करने में व्यस्त हैं। बताते हैं राकेश टिकैत की मांग भी बढ़ रही है।