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Health: स्वच्छ ईंधन में खाना पके तो हर साल बचेंगी 25 लाख जानें, आईईए ने भारत के प्रयासों को सराहा

Wed, 09 Aug 2023 06:02 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 09 Aug 2023 06:02 AM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, इंडोनेशिया ने दूषित साधनों पर निर्भरता को आधा कर दिया है। भारत में शुरू की गई उज्ज्वला योजना इसका एक उदाहरण है। इस योजना के तहत 21 मई 2023 तक करीब 9.6 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।

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every year 25 lakh lives will be saved with clean fuel cooking IEA appreciates India efforts
घरेलू एलपीजी सिलिंडर हुआ महंगा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर घरों में स्वच्छ ईंधन में खाना पकाया जाए तो हर साल वैश्विक स्तर पर 25 लाख जिंदगियां बचाई जा सकती है। साथ ही इससे वायु प्रदूषण के स्तर में होने वाली कमी करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगी। वहीं, खाना बनाने में होने वाली समय की बचत का उपयोग महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, रोजगार या मनोरंजन जैसी अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

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यह जानकारी और सुझाव इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) और अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक ग्रुप द्वारा जारी ‘विजन फॉर क्लीन कुकिंग एक्सेस फॉर ऑल 2030’ नामक रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट के उचित समाधान 2030 तक करोड़ों लोगों को खाना तैयार करने के आधुनिक साधनों तक पहुंच प्रदान कर सकते हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में आज भी हर तीसरा व्यक्ति यानी 230 करोड़ लोग अपना भोजन खुली आग, बुनियादी स्टोव या चूल्हों पर पकाते हैं। इसके लिए वे मिट्टी का तेल, लकड़ी, कोयला, कंडे या फसलों के बचे अवशेष जैसे साधनों का उपयोग करते हैं। इसके कारण बड़ी मात्रा में घरेलू वायु प्रदूषण होता है। यह पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

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भारत की उज्जवला योजना की सराहना
रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन, इंडोनेशिया ने दूषित साधनों पर निर्भरता को आधा कर दिया है। भारत में शुरू की गई उज्ज्वला योजना इसका एक उदाहरण है। इस योजना के तहत 21 मई 2023 तक करीब 9.6 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद भारत में अभी भी करीब 44.8 करोड़, चीन में 18.5 करोड़, बांग्लादेश में 12.8 करोड़ और पाकिस्तान में 11.7 करोड़ लोग खाना पकाने के लिए दूषित साधनों पर निर्भर हैं। हालांकि भारत में इस दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।

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वैश्विक स्तर पर यदि इस लक्ष्य को हासिल करना है तो 2030 तक हर साल करीब 30 करोड़ लोगों के लिए खाना पकाने के स्वच्छ साधनों की व्यवस्था करनी होगी। इसमें से करीब आधे प्रयास उप-सहारा अफ्रीका में करने होंगें।

असामयिक मौतों का तीसरा बड़ा कारण

  1. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार घरेलू वायु प्रदूषण हर साल करीब 32 लाख लोगों की जिंदगियां छीन रहा है। इसमें पांच वर्ष या उससे कम उम्र के 2.37 लाख बच्चे भी शामिल हैं।
  2. यह वैश्विक स्तर पर असामयिक होने वाली मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
  3. शहरी क्षेत्रों में केवल 14 फीसदी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 52 फीसदी आबादी इन प्रदूषण फैलाने वाली ईंधन और तकनीकों पर निर्भर है।
  4. भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी है समस्या काफी हद तक बरकरार है।
  5. इससे स्ट्रोक, हृदय रोग, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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