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फलसफा: 'जिंदगी ब्लैक होती है या व्हाइट, यहां 50-60 फीसदी जैसा कुछ नहीं' एवरेस्ट फतह कर चुके रोमिल बर्थवाल ने बताया जीने का फंडा

Thu, 16 Dec 2021 06:27 PM IST
kumar sambhava कुमार संभव
Updated Thu, 16 Dec 2021 06:27 PM IST
सार

एवरेस्ट फतह करने वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल ने अमर उजाला के दफ्तर में कहा कि अगर आप जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो उसे पूरी शिद्दत से करना चाहिए। 

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Everest Winner Retired Lieutenant Colonel Romil Barthwal Life Story says life is black or white there is no scope for 50 or 60 percent
रोमिल बर्थवाल ने सुनाई आपबीती। - फोटो : अमर उजाला

जिंदगी में अनुशासन बेहद जरूरी है। अगर आपका कोई भी लक्ष्य है तो उसे हर हाल में पूरा करें। उसे अधूरा कतई न छोड़ें, क्योंकि जिंदगी या तो ब्लैक होती है या व्हाइट। यहां 50-60 फीसदी जैसा कुछ भी नहीं होता। ये बातें एवरेस्ट फतह करने वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल ने अमर उजाला के दफ्तर में कहीं। दरअसल, उन्होंने अपनी बातों के माध्यम से जिंदगी जीने का फलसफा समझाया। 

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Everest Winner Retired Lieutenant Colonel Romil Barthwal Life Story says life is black or white there is no scope for 50 or 60 percent
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल - फोटो : सोशल मीडिया

...जब अफसर की डांट से सीखा नया पाठ

बातचीत के दौरान रोमिल बर्थवाल ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह सेना में थे तो एक बार उनके सीनियर ने उन्हें बुलाया और उन्हें सौंपे गए काम की स्टेटस रिपोर्ट मांगी। रोमिल ने जवाब दिया कि वह काम करीब 60 फीसदी पूरा हो चुका है। इस पर सीनियर नाराज हो गए और उन्हें तगड़ी फटकार लगाई। इसके बाद रोमिल को जिंदगी की एक और सीख मिली कि जीवन में 50 या 60 फीसदी कुछ नहीं होता है। यहां या तो ब्लैक होता है या व्हाइट। इसका मतलब यह था कि जिंदगी में या तो काम पूरा होना चाहिए या उस काम को नहीं करना चाहिए, लेकिन आधा अधूरा काम कभी नहीं करना चाहिए। 
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Everest Winner Retired Lieutenant Colonel Romil Barthwal Life Story says life is black or white there is no scope for 50 or 60 percent
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल - फोटो : सोशल मीडिया

काफी देर तक मुर्दे से करते रहे बातें

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल ने एवरेस्ट फतह के बाद लौटते वक्त खुद के साथ बीती एक ऐसी घटना भी बताई, जिसने मीटिंग हॉल में मौजूद हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। रोमिल ने बताया कि एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के बाद वह अपने साथियों के साथ लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें एक युवक बर्फ में बैठा नजर आया। रोमिल को लगा कि वह युवक थककर बैठ गया है। ऐसे में वह उस युवक के पास पहुंचे और समझाने लगे कि ज्यादा देर बर्फ में बैठना उसके लिए घातक हो सकता है। उसका शरीर काम करना बंद कर सकता है। सलाह देने के बावजूद वह युवक नहीं उठा तो रोमिल ने उसे ध्यान से देखा तो पता लगा कि वह दम तोड़ चुका है। दरअसल, वह युवक तीन दिन पहले वहां बैठा था और भीषण ठंड की वजह से उसकी मौत हो गई थी। रोमिल ने बताया कि एवरेस्ट पर चढ़ाई करते और उतरते वक्त चारों तरफ शव नजर आए थे। उस दौरान उन्होंने करीब 250 लाशें देखी थीं। 
Everest Winner Retired Lieutenant Colonel Romil Barthwal Life Story says life is black or white there is no scope for 50 or 60 percent
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल - फोटो : सोशल मीडिया

जिंदगी में अनुशासन बेहद जरूरी

रोमिल के मुताबिक, अगर आप जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं तो उसे पूरी शिद्दत से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे मेरा सपना एवरेस्ट फतह करना था, लेकिन यह बेहद मुश्किल था। घरवाले तैयार नहीं थे। यहां तक कि जब मैं एवरेस्ट के लिए जा रहा था तो मेरी मां रो रही थीं, लेकिन मैंने अपने सपने पर फोकस किया और परिवार को समझाया। इसी तरह अब मैं अपने बच्चों को भी अनुशासन के बारे में समझाता हूं। इसका नतीजा यह है कि मेरे घर में फास्ट फूड आदि पर पूरी तरह प्रतिबंध है। हालांकि, बच्चों की पसंद को देखते हुए हर महीने की छह तारीख को चीट डे के रूप में रखा गया है। एवरेस्ट फतह के बारे में रोमिल ने कहा कि मैं एवरेस्ट पर चढ़ चुका हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैंने कभी असफलता का सामना नहीं किया। मैं अपने करियर में कई बार असफलता से रूबरू हुआ, लेकिन अपने मकसद को हमेशा ध्यान में रखा और आगे बढ़ता गया। 
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रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल - फोटो : सोशल मीडिया

लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल बर्थवाल ने दिए सफलता के मंत्र

  • फिल्मों में भले ही ऐसा नजर आता हो, लेकिन एवरेस्ट फतह करना ग्लैमरस बिल्कुल नहीं होता। जैसे जिंदगी में कुछ आसान नहीं होता, वैसे ही किसी भी पर्वत की चढ़ाई आसान नहीं होती।
  • कोई सफर आसान नहीं, आपको सीमाओं से आगे जाना होता है, खुद के लिए ज्यादा प्रयास करने होते हैं।
  • सफलता में 80% योगदान मानसिक मजबूती का होता है। महज 20% योगदान आपकी शारीरिक मजबूती का होता है। जैसे एवरेस्ट फतह करने के 60 दिन के सफर में शारीरिक मजबूती 20 दिन में जवाब दे जाती है। बाद के 40 दिन का सफर आप मानसिक मजबूती से ही तय कर सकते हैं।
  • जिंदगी में कामयाबी चाहिए तो असहज कर देने वाले लक्ष्य रखिए। इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता रखिए। हां या ना के बारे में ही सोचिए। बीच का कोई रास्ता नहीं होता।

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