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सुप्रीम कोर्ट: कर्ज चुकाने से राहत देना नीतिगत फैसला, केंद्र सरकार पर निर्भर, याचिका पर सुनवाई

Mon, 24 May 2021 09:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 24 May 2021 09:55 PM IST
सार

कोरोना काल में देश के कई लोग आर्थिक मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में कर्ज वसूली व ब्याज से राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। 
 

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Epidemic: Supreme Court said - policy decision to give relief from repayment of debt depends on the government, a petition filed
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 संकट के कारण वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों की क्या मदद दी जा सकती है, यह केंद्र सरकार के नीतिगत फैसले पर निर्भर है। शीर्ष अदालत ने इस बात के संकेत दिए कि वह ब्याज मुक्त लोन मोरेटोरियम का आदेश देने की स्थिति में नहीं है।

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जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की दूसरी लहर के दौरान कर्जदारों को राहत देने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता वकील विशाल तिवारी को केंद्र सरकार को एक प्रतिनिधित्व देने के लिए कहा है।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के संपर्क साधने के दौरान पीठ ने कहा, 'अधिक से अधिक हम याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार को अपना प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दे सकते हैं।' कई प्रयासों के बावजूद याचिकाकर्ता से संपर्क न  कर पाने के बाद पीठ ने कहा कि वह याचिका पर 11 जून को विचार करेगी।
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याचिका में यह मांगें की गईं हैं
इस जनहित याचिका में केंद्र को सभी ऋण के लिए छह महीने की अवधि या कोविड -19 की स्थिति जारी रहने तक मोरेटोरियम देने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि बैंक या वित्तीय संस्थान छह महीने की अवधि के लिए किसी भी नागरिक या व्यक्ति या किसी कॉरपोरेट निकाय की संपत्ति की नीलामी को लेकर कोई कार्रवाई नहीं करें। याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि कोविड-19 महामारी में दूसरी लहर को देखते हुए छह महीने की अवधि के लिए किसी भी खाते को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित नहीं किया जाना चाहिए।

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