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महामारी: उद्योग जगत लॉकडाउन के पक्ष में, डॉक्टरों की राय-बिगड़ जाएगी अस्पतालों की व्यवस्था  

Tue, 04 May 2021 08:16 PM IST
सुरेंद्र जोशी राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 04 May 2021 08:16 PM IST
सार

देश में संपूर्ण लॉकडाउन की बढ़ती मांग पर उद्योग जगत व डॉक्टरों की अलग-अलग राय सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट भी इसके पक्ष में राय दी है, लेकिन सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं किया है। 
 

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Epidemic: industry In favour of  lockdown, doctors opinion- conditions of hospitals will deteriorate
lockdown - फोटो : ANI

विस्तार

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हाहाकार मचा हुआ है। रोजाना संक्रमण के लाखों नए मामले सामने आ रहे हैं। हजारों मौतें हो रही हैं। ऐसे में देश में फिर से संपूर्ण लॉकडाउन की मांग के बीच उस पर बहस छिड़ गई है।

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सीआईआई ने सरकार से कहा-सीमित करें आर्थिक गतिविधियां
सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर ये मुद्दा गर्माया हुआ है कि ऐसी स्थिति में देश में फिर से पूरी तरह लॉकडाउन लगा देनी चाहिए। एक तरफ देश के सबसे बड़े उद्योग चैंबर सीआईआई ने भी सरकार से कहा है कि आम लोगों की परेशानी को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को सीमित करने का कदम उठाएं। 
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डॉक्टरों की यह है दलील-संपूर्ण लॉकडाउन प्रभावी नहीं
वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर्स संपूर्ण लॉकडाउन लगाने को उचित नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि, अगर हम युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाएं और लोगों को टीका दें तो इस महामारी पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। संपूर्ण लॉकडाउन जैसे विकल्प अब प्रभावी नहीं हैं।
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पिछले साल हुई थी कड़ी आलोचना
पिछले वर्ष लगाए गए कोरोना लॉकडाउन के फैसले की कड़ी अलोचना हुई थी, लेकिन इस बार सरकार पर फिर से संपूर्ण लॉकडाउन लगाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि है कि हम केंद्र और राज्य सरकारों से गंभीरता से आग्रह करते हैं कि वे किसी भी तरह की भीड़ एकत्रित होने या सुपर स्प्रेडर समारोहों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करें। 

पिछले साल हालात अलग थे : डॉ. जुगल किशोर
सफदरजंग अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के डायरेक्टर, प्रोफेसर और हेड डॉ.जुगल किशोर का कहना है कि पिछले वर्ष संपूर्ण लॉकडाउन का मुख्य उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना था। आज हमारे पास वैक्सीन है। जरुरत के अनुसार पीपीई किट, मास्क और वेंटिलेटर्स हैं। 

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन जैसे कदम उठाने के बजाए सरकार युवाओं के टीकाकरण अभियान तेजी से चलाए तो कुछ माह में ही इस बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है। पहले लॉकडाउन ने देश को बदतर हालत से बचा लिया, लेकिन अब उस विकल्प को फिर से चुनेंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा।
 

फैसला राज्य सरकारों को लेना है: डॉ. श्रीवास्तव

दिल्ली आईसीएमआर में शोध प्रबंधन, नीति योजना और संचार विभाग के प्रमुख डॉ रजनीकांत श्रीवास्तव ने अमर उजाला से कहा कि लॉकडाउन लगाना है या नहीं, ये पूरी तरह से राज्य सरकार पर निर्भर करता है। राज्य सरकार को पता है कि लॉकडाउन लगाने से उनके राज्य की अर्थव्यवस्था कितनी प्रभावित होने वाली है। या अगर वे लॉकडाउन लगाने का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कितनी सुरक्षा मिलती है। 

ऐसे भी तोड़ सकते हैं कोरोना चेन
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार की परिस्थितियों में बहुत फर्क है। पिछले वर्ष हमारे पास संसाधनों की कमी थी। लोगों को पता ही नहीं था कि कोरोना कितनी खतरनाक बीमारी है। आज लोगों को पता है और लोग डर भी रहे हैं। सरकार लॉकडाउन की बजाए सोशल गैदरिंग कम करके भी कोरोना को रोक सकती है। लोगों में वन-टू-वन कनेक्शन जितना कम होगा उतना कोरोना की चेन टूटने की संभावना होती है।
 

अब लॉकडाउन अच्छा विचार नहीं

डॉ.जुगल किशोर ने कहा कि आज कई रिसर्च में सामने आ रहा है कि वायरस हवा के साथ पर्सनल टच से भी बढ़ रहा है। ऐसे में अगर संपूर्ण लॉकडाउन लगता भी है तो इसका ज्यादा फर्क नहीं होगा। बीते दस से 15 दिनों में जो लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं, उनके केस तो सामने आएंगे ही। लॉकडाउन लगाने के कारण सब कुछ बंद हो जाएगा। ऐसे में मरीजों को घरों से अस्पताल लाने में बेहद दिक्कत होगी। जिससे अस्पताल का प्रबंधन ओर बिगड़ जाएगा। अब लॉकडाउन लगाना अच्छा विचार नहीं है। इसके बजाए हमें अस्पतालों में संसाधन जुटाने पर फोकस करना चाहिए। 

सबको पता था दूसरी लहर आएगी
डॉ. जुगल किशोर ने कहा कि देश में कोरोना की दूसरी लहर आएगी ये विशेषज्ञों और केंद्र-राज्य सरकार सभी को पता था। हमारे पास स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय भी था, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शहरों में जो भी अस्थाई हॉस्पिटल शुरु हुए थे वो थोड़े समय बाद ही बंद कर दिए गए। इन सेंटर को बंद करने से बहुत नुकसान हुआ है क्योंकि अब हम उतनी तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं कर पा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीआईआई ने रविवार रात एक बयान जारी कर सरकार से आग्रह किया है कि वह लॉकडाउन को लेकर कोई कदम उठाए। महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोगों का जीवन बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर वायरस के विस्तार पर रोक लगाने के लिए अधिकतम कार्रवाई की जरुरत है।
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