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आने वाला दशक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाएगा : जावड़ेकर
Thu, 10 Sep 2020 03:07 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 10 Sep 2020 03:07 AM IST
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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
- फोटो : ANI
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तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत मुहिम के बावजूद आने वाले दस सालों में भारत कार्बन उत्सर्जन को 35 फीसदी कम करने के लिए तत्पर है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को नई दिल्ली में 15 वें स्थिरता शिखर सम्मेलन 2020 के दौरान सतत और विश्वसनीय इंडिया पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।
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उन्होंने कहा, देश की सौर ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए 68 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन समझौता किया गया है। भारत ने आयात को कम करने और निर्यात को बढ़ाने के लिए अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया है। इनके लिए देश अपनी पर्यावरणीय जरूरतों के साथ कोई समझौता नहीं कर रहा है।
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यही वजह है कि देश में किए जा रहे नवाचार और अनुसंधान को देखकर वह कह सकते हैं कि आने वाले एक दशक में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण और वायु प्रदूषण के लिहाज से भी कई नए मुकाम हासिल करेगा ऐसा उनका विश्वास है।
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पर्यावरण मंत्री ने कहा स्वच्छ हवा और नीला आकाश देश की प्राथमिकताओं में है। यही वजह है कि कोरोना की तमाम बाधाओं के बावजूद वर्तमान में औद्योगिक गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय हितों की भी पूर्ति की जा रही है।
भारत में दुनिया के मुकाबले में केवल 2.5 फीसदी जमीन और केवल 4 फीसदी ऐसा पानी है, जिसे हम पीने के काम के साथ अन्य उपयोग में लाते हैं। इन सबके साथ दुनिया की 20 फीसदी आबादी भारत में निवास करती है। इन सबके मध्य भी दुनिया की आठ फीसदी जैव विविधता जीव जंतु भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बने हुए हैं।
इसलिए आज जरूरत है जैव विविधता में स्थिरता लाई जाए क्योंकि यही मानव जाति को प्रकृति के रोष से बचा सकती है। इसके लिए दुनिया के देशों को अपने अनुभव साझा करने का भी केंद्रीय मंत्री ने आह्वान किया।