राकेश अस्थाना के खिलाफ अब ईडी भी खंगाल रही कागजात
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दायर एफआईआर की जांच का दायरा बढ़ाते हुए संबंधित कागजात की पड़ताल शुरू कर दी है। ईडी यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दायर एफआईआर के आधार पर ही कर रही है। दो दिन पहले कार्मिक मंत्रालय की अनुशंसा पर नियुक्ति मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीए) ने अस्थाना को सीबीआई से बाहर कर दिया था। 24 जनवरी को सीबीआई के नए निदेशक पर फैसले के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली चयन समिति की बैठक से पहले सरकार सीबीआई को सभी विवादास्पद अधिकारियों और मुद्दों से मुक्त करना चाहती है।
उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अब तक की जांच में अस्थाना फिसलन भरी जमीन पर दिख रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थाना के खिलाफ मामले की जांच जारी रखने का आदेश दिया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने इस अंदरूनी जांच के आधार पर अस्थाना को हटाने का फैसला किया है। अस्थाना के साथ तीन और ऐसे अधिकारियों को भी हटाया गया है जो पिछले कुछ महीनों से नंबर 1 और नंबर 2 के बीच छिड़े घमासान के दौरान खेमों में बंटे हुए थे।
गौरतलब है कि निदेशक आलोक वर्मा ने अपने तबादले पर चयन समिति का फैसला सुनाए जाने के बाद इस्तीफा देकर सीबीआई में पहले ही अपना अध्याय समाप्त कर लिया है। सूत्रों ने बताया कि अगर अस्थाना सीबीआई में ही विशेष निदेशक यानी नंबर 2 के पद पर होते तो नए निदेशक की नियुक्ति के लिए बने पैनल में उनका नाम रखना होता। ऐसे में चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते।
सीबीआई निदेशक के लिए एनआईए डीजी वाईसी मोदी फ्रंट रनर
सीबीआई के नए निदेशक के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक (डीजी) वाईसी मोदी फ्रंट रनर माने जा रहे हैं। 1984 बैच के असम-मेघालय कैडर से आईपीएस अधिकारी मोदी 10 साल सीबीआई में बिता चुके हैं। जब उन्हें सीबीआई से एनआईए भेजा गया था तब वह विशेष निदेशक बन चुके थे। हालांकि इस पद के लिए बीएसएफ डीजी रजनीकांत मिश्रा और गृहमंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा विभाग की विशेष सचिव रीना मित्रा का भी नाम शामिल है। सूत्रों का कहना है कि मित्रा डार्क हॉर्स साबित हो सकती हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस पद से लिए 1982 से 1985 बैच तक के अधिकारी योग्य हैं। इन चार बैच के 17 अधिकारियों को पहले दौर में शामिल किया गया है। इनमें से डीओपीटी ने छह अधिकारियों की अंतिम सूची तैयार की है। 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और कांग्रेस नेता मल्लिर्जुन खरगे की बैठने वाली चयन समिति के सामने इनमें से चार के नाम भेजे जाएंगे।