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मनी लॉन्ड्रिंग : एनएच-74 विस्तार घोटाले में ईडी ने जब्त की 22 करोड़ की संपत्ति
Wed, 20 Nov 2019 05:42 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 20 Nov 2019 05:42 AM IST
सार
- देहरादून, ऊधम सिंह नगर और यूपी के रामपुर में की गई कार्रवाई
- मुख्य आरोपी डीपी सिंह समेत कई आरोपियों की संपत्ति अटैच हुई
- साल 2017 में पकड़ा गया था राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में घोटाला
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एनएच-74 घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह समेत कई आरोपियों की 21.96 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर दी है। एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग में की है। संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई देहरादून, ऊधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के रामपुर में की गई है। अटैच की गई संपत्ति में इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल प्लॉट, बिल्डिंग, बैंकों में जमा नकदी, म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इन संपत्तियों की कीमत 21.96 करोड़ रुपये है। ईडी ने ट्वीट कर इस कार्रवाई की जानकारी साझा की है।
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वर्ष 2017 में कुमाऊं के तत्कालीन आयुक्त ने एनएच निर्माण में घोटाला पकड़ा था। 2015 में एनएच-74 का निर्माण शुरू हुआ था। हेराफेरी कर रुद्रपुर, गदरपुर बाजपुर और काशीपुर के किसानों को कई गुना मुआवजा दिया गया था। इसमें 200 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ था। मामले में 17 मार्च को तत्कालीन एडीएम प्रताप सिंह साह की तहरीर पर सिडकुल चौकी में केस दर्ज किया गया था। 15 मार्च को शासन ने घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
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25 मार्च को सीएम ने छह पीसीएस अधिकारियों को निलंबित कर सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। आईएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव को भी निलंबित कर दिया था। मामले में तत्कालीन भू अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह, एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला, भगत सिंह फोनिया, तीरथपाल सिंह, एनएस नगन्याल आदि जेल भेजे गए थे। सभी निलंबित अधिकारियों को बाद में बहाल कर दिया था। वहीं, राजस्व विभाग के कर्मचारियों समेत कुल 32 लोगों को जेल की हवा खानी पड़ी। घोटाले में अभी 30 आरोपी किसान फरार हैं।
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