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ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे: राइफल से लेकर भारी भरकम टैंक बनाने वाले फौलादी 'हाथ' कैसे मनाएंगे शान और बलिदान दिवस

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 14 Mar 2022 07:43 PM IST
सार

इस बार आधिकारिक तौर से 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' नहीं मनेगा, क्योंकि अब ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड ही नहीं रहा। राइफल से लेकर हैवी टैंक बनाने वाले फौलादी 'हाथ' इस बात को लेकर चिंता में हैं कि वे शान और बलिदान दिवस कैसे मनाएंगे। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ ने रक्षा मंत्री राजनाथ को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की है...

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employees will celebrate Ordnance Factory Day on 18th March, workers union will issue notice on March 17
ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश की 41 आयुध निर्माणियां, जो अभी तक ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) के तहत संचालित होती रही हैं, गत वर्ष एक अक्तूबर से इसे भंग कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने इसकी संपत्तियां, कर्मचारियों और मैनेजमेंट को सात सरकारी कंपनियों को ट्रांसफर किया है। 220 साल पुराने आयुध कारखानों में हर साल 18 मार्च को 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' मनाए जाने की परंपरा रही है। इस दिन ऑर्डिनेंस फैक्टरी के अधिकारी व कर्मचारी अपने गौरवपूर्ण अतीत को याद करते हैं। इन आयुध निर्माणियां को खड़ा करने में कई कर्मचारियों ने अपना बलिदान दिया है। इस दिन उन्हें याद किया जाता है। कर्मियों के लिए ये एक गौरव का दिन होता है कि वे किस तरह से सैन्य दलों के साथ अपने देश की रक्षा करते हैं।

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लेकिन इस बार आधिकारिक तौर से 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' नहीं मनेगा, क्योंकि अब ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड ही नहीं रहा। राइफल से लेकर हैवी टैंक बनाने वाले फौलादी 'हाथ' इस बात को लेकर चिंता में हैं कि वे शान और बलिदान दिवस कैसे मनाएंगे। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ ने रक्षा मंत्री राजनाथ को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव श्रीकुमार ने बताया, सरकार ने गत वर्ष जब इन कारखानों को कंपनी में तब्दील किया, तभी से यह बात समझ आ गई थी कि भारतीय आयुध कारखानों के गौरवशाली इतिहास को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन कारखानों के निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, देश के पूर्व पांच रक्षा मंत्री और लाखों गरीब किसान व आदिवासियों का भी योगदान है। हर साल 41 आयुध निर्माणियों में 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' मनाया जाता रहा है। ये दिन कर्मियों के लिए अपनी प्रतिभा, बलिदान देने वाले सह कर्मियों और गौरवशाली अतीत को याद करने का दिन होता है। कर्मियों में इस दिन को लेकर खासा उत्साह रहता है। 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' मनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से आग्रह किया गया है कि वे संबंधित अधिकृत प्राधिकरण को निर्देश दें। हालांकि अब कर्मी संगठनों ने इस दिन को मनाने का निर्णय लिया है।
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श्रीकुमार का कहना है कि एआईडीईएफ, बीपीएमएस और सीडीआरए जैसे मान्यता प्राप्त कर्मी संगठनों ने तय किया है कि वे 18 मार्च को 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' मनाएंगे। इसके लिए 17 मार्च को नोटिस जारी होगा। 18 मार्च को सभी कर्मी 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' बैज पहनेंगे। बतौर श्रीकुमार, देश के पांच पूर्व रक्षा मंत्रियों ने कहा था, आयुध कारखानों का निजीकरण नहीं होगा। अब इन्हें क्या जवाब दें। सेना का साजो सामान अब निजी कंपनियां तैयार करेंगी। बतौर सी. श्रीकुमार, निजीकरण की ये राह भारतीय सेना के लिए जोखिम का कारण बन सकती है।


केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले साल 16 जून को हुई बैठक में 220 साल पुराने आयुध कारखानों को सात कंपनियों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना था कि यह सब कारखानों को आधुनिक बनाने के लिए किया गया है। इनका निजीकरण नहीं हो रहा है, बल्कि ये इनकी तरक्की की राह है। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने कहा था कि सरकार के प्रतिनिधि झूठ बोल रहे हैं। सरकार ने इन कारखानों को बेचने का निर्णय कर लिया है। अभी तो इन्हें कंपनी बनाया गया है, कुछ समय बाद इन्हें निजी हाथों में सौंपा जा सकता है।

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