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Defence: रिटायरमेंट तक सेवा से इस्तीफा नहीं देंगे 41 आयुध निर्माणियों के कर्मी, उपक्रमों में नहीं होंगे शामिल
सार
Defence: एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार ने कहा कि आयुध निर्माणियों के सभी कर्मचारियों ने पहले ही अपना निर्णय बता दिया है कि वे केंद्र सरकार की सेवा से इस्तीफा नहीं देना चाहते हैं। वे सात नए डीपीएसयू में शामिल नहीं होंगे।
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आयुध निर्माणी फैक्टरी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फेसबुक/आयुध निर्माणी फैक्टरी वारंगांव
विस्तार
आयुध निर्माणियों के कर्मचारी और अधिकारी संगठनों ने यह बात साफ कर दी है कि वे अपनी रिटायरमेंट तक केंद्र सरकार की सेवा में बने रहना चाहते हैं। वे न तो केंद्र सरकार की सेवा से त्यागपत्र देंगे और न ही सात रक्षा उपक्रमों में शामिल होंगे। इन संगठनों ने रक्षा मंत्रालय के सचिव (डीपी) को 13 नवंबर को पत्र के द्वारा सूचित कर दिया है। कर्मचारियों और अधिकारियों को विश्वास है कि वे उनकी स्थिति को समझेंगे। रक्षा मंत्री तथा अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह को इससे अवगत कराएंगे। सात नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में मानद प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रक्षा असैन्य कर्मचारियों का दर्जा उनकी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी के रूप में बनाए रखने के लिए एक अधिसूचना जारी करने की व्यवस्था करेंगे।
आयुध निर्माणियों के कर्मचारी और अधिकारी संगठनों, एआईडीईएफ, बीपीएमएस, सीडीआरए (आईओएफजीओए, एआईएएनजीओ, एआईएसीईओएफ, आईओएफएनटीटीएसए, और डीजीओएफईए), आईओएफएसओए, एनडीजीबीजीओए और एनडीएनजीएसए से मिलकर बने संयुक्त आयुध कर्मचारियों के मंच (यूएफओई) ने 10 नवंबर को संयुक्त सचिव (एलएस) और सात नए डीपीएसयू के सभी सीएमडी की उपस्थिति में आयोजित बैठक में यह बात स्पष्ट तौर पर बता दी है। एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार के मुताबिक, आयुध निर्माणियों के सभी कर्मचारियों ने पहले ही अपना निर्णय बता दिया है कि वे केंद्र सरकार की सेवा से इस्तीफा नहीं देना चाहते हैं। वे सात नए डीपीएसयू में शामिल नहीं होंगे। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक आयुध निर्माणियों में केंद्र सरकार की सेवा में बने रहना चाहते हैं, इसलिए वे डीपीएसयू में शामिल होने के लिए 'आमेलन पैकेज' पर चर्चा करने के लिए किसी भी बैठक का बहिष्कार करेंगे। कर्मचारी व अधिकारी, केवल 41 आयुध कारखानों / 7 नए डीपीएसयू में सेवा से सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए बैठकों में भाग लेंगे।
यूएफओई के पत्र पर एआईडीईएफ के अध्यक्ष एसएन पाठक, महासचिव सी श्रीकुमार, बीपीएमएस के महासचिव मुकेश सिंह और रवींद्र कुमार मिश्रा, सीडीआरए के अध्यक्ष एसबी चौबे व महासचिव अजय, आईओएफएसओए के सचिव रोहित कुमार, एनडीजीबीजीओए के अध्यक्ष एस प्रभाकरण और एनडीएनजीएसए के महासचिव आनंद प्रकाश सिंह के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र की कॉपी रक्षा सचिव, जेएस (एलएस), डीजी आयुद्ध (सीएंडएस) और सातों निगमों के सीएमडी एवीएनएल, एमआईएल, एडब्लूईआईएल, वाईआईएल, टीसीएल, आईओएल एंड जीआईएल को भेजी गई है।
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श्रीकुमार ने बताया कि सात नवंबर को हमें डीडीपी से एक सूचना प्राप्त हुई कि सचिव, डीपीएस 10 नवंबर को फेडरेशन और एसोसिएशन के साथ एक बैठक करेंगे। इसमें सात नए डीपीएसयू की उत्पादकता में सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। आपस में विचार-विमर्श के बाद, बैठक में भाग लेने और सचिव डीपी द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने से पहले यूएफओई की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। दस नवंबर को दोपहर दो बजे यूएफओई की एक बैठक हुई। उसमें सचिव डीपी के साथ होने वाली बैठक में चर्चा की जाने वाली रणनीतियों पर चर्चा हुई। सर्वसम्मति से कई निर्णय लिए गए। यदि बैठक में सचिव डीपी अवशोषण पैकेज का मुद्दा उठाते हैं तो कर्मचारी और अधिकारी संगठन उसका विरोध करेंगे। उनसे केवल उत्पादकता संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने का अनुरोध करेंगे। यदि वह उसी मुद्दे पर चर्चा जारी रखते हैं, तो हम विरोध स्वरूप बैठक से वॉकआउट कर देंगे।
हमें सचिव डीपी को सूचित करना चाहिए कि हम बैठकों में केवल आयुध कारखानों के कर्मचारियों की सेवा, सेवानिवृत्ति तक आयुध कारखानों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के रूप में बनाए रखने के तौर-तरीकों पर चर्चा और निर्णय लेने के लिए ही भाग लेंगे। उत्पादकता में सुधार के संबंध में, प्रत्येक संगठन अपने विचार प्रस्तुत करेगा।
दस नवंबर को सचिव, रक्षा मंत्रालय के साथ कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों की चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए, सचिव, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह बैठक आयुध कारखानों / सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में उत्पादकता में सुधार पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई है। हालांकि, उन्होंने महासंघों और संघों से अपील की कि वे बैठकों में शामिल हों, ताकि अवशोषण पैकेज पर चर्चा की जा सके। यूएफओई के प्रतिनिधियों ने कहा, वे केंद्र सरकार की सेवा न छोड़ने और सात डीपीएसयू में शामिल नहीं होने का दृढ़ निर्णय ले चुके हैं।
आयुध कारखानों के 80 प्रतिशत कर्मचारियों ने पहले ही केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने के लिए अपना उन्नत विकल्प फॉर्म जमा कर दिया है। उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति तक आयुध कारखानों में बतौर केंद्रीय कर्मचारी ही बने रहना है। इस मामले में जो बीस प्रतिशत कर्मचारी बचे हैं, उन्होंने भी केंद्र सरकार में बने रहने के लिए उन्नत विकल्प फॉर्म जमा करना शुरू कर दिया है। ये सभी वे कर्मचारी हैं, जो विभिन्न त्योहारों के कारण छुट्टी पर थे। बैठक में सातों सीएमडी ने अपनी कंपनियों के प्रदर्शन पर चर्चा की। उन्होंने आयुध कारखानों में उत्पादकता में सुधार के लिए अपने सुझाव दिए।
कर्मचारी महासंघों ने भी सात सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात कही। महासंघों के प्रतिनिधियों ने कहा, आयुध कारखानों का निगमीकरण, केवल एक विफलता है, क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाए कि निगमीकरण सफल है। जब सरकार ने आयुध कारखानों का निगमीकरण किया था, तो कहा गया था कि इसका लक्ष्य पांच वर्षों के भीतर 30,000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचना है।
हालाँकि, पिछले वर्ष सभी सातों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का संयुक्त कारोबार 21,821 करोड़ रुपये था। अगर यह ओएफबी भी होता, तो यह आसानी से हासिल किया जा सकता था। वास्तव में, ओएफबी ने जीएसटी को छोड़कर 17,000 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। ऐसे में यह स्वीकार करना कठिन है कि निगमीकरण सफल है। महासंघों ने निगमीकरण को वापस लेने की अपनी मांग दोहराई। सरकार, सशस्त्र बलों से सीधे आयुध कारखानों को मांगपत्र देने के लिए कहे, क्योंकि निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा करके खुली निविदा के माध्यम से कार्यभार प्राप्त करना मुश्किल होगा।
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औद्योगिक उत्पादन (आईआर) से जुड़ी समस्याओं, जैसे एसएमएच में कमी, गारंटीशुदा वेतन का भुगतान न होने के कारण वेतन में कमी, ओटी का काम रुकना, विभिन्न संवर्ग संबंधी मुद्दे और अनुकंपा नियुक्ति पर प्रतिबंध हटाने में हो रही अनुचित देरी, आदि मुद्दे भी डीडीपी के समक्ष रखे गए। खाली पदों को स्थायी रोजगार के माध्यम से भरने की मांग की गई। डीडीपी स्तर पर एक शीर्ष उत्पादकता परिषद का गठन किया जाए। भविष्य में फेडरेशनों और एसोसिएशनों के साथ नियमित बैठकें की जाएं।
संयुक्त सचिव (लोक सेवा) ने आश्वासन दिया कि इन बातों पर गौर किया जाएगा और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। जहां तक अनुकंपा नियुक्ति का प्रश्न है, यह मामला कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को उनकी सहमति के लिए भेज दिया गया है। यूएफओई एक बार फिर सभी रक्षा असैन्य कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील करता है कि वे सात रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) में शामिल न हों और अपनी सेवानिवृत्ति तक सभी लाभों और सेवा शर्तों की सुरक्षा के साथ केंद्र सरकार की सेवा में बने रहें।
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आयुध निर्माणियों के कर्मचारी और अधिकारी संगठनों, एआईडीईएफ, बीपीएमएस, सीडीआरए (आईओएफजीओए, एआईएएनजीओ, एआईएसीईओएफ, आईओएफएनटीटीएसए, और डीजीओएफईए), आईओएफएसओए, एनडीजीबीजीओए और एनडीएनजीएसए से मिलकर बने संयुक्त आयुध कर्मचारियों के मंच (यूएफओई) ने 10 नवंबर को संयुक्त सचिव (एलएस) और सात नए डीपीएसयू के सभी सीएमडी की उपस्थिति में आयोजित बैठक में यह बात स्पष्ट तौर पर बता दी है। एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार के मुताबिक, आयुध निर्माणियों के सभी कर्मचारियों ने पहले ही अपना निर्णय बता दिया है कि वे केंद्र सरकार की सेवा से इस्तीफा नहीं देना चाहते हैं। वे सात नए डीपीएसयू में शामिल नहीं होंगे। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक आयुध निर्माणियों में केंद्र सरकार की सेवा में बने रहना चाहते हैं, इसलिए वे डीपीएसयू में शामिल होने के लिए 'आमेलन पैकेज' पर चर्चा करने के लिए किसी भी बैठक का बहिष्कार करेंगे। कर्मचारी व अधिकारी, केवल 41 आयुध कारखानों / 7 नए डीपीएसयू में सेवा से सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए बैठकों में भाग लेंगे।
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यूएफओई के पत्र पर एआईडीईएफ के अध्यक्ष एसएन पाठक, महासचिव सी श्रीकुमार, बीपीएमएस के महासचिव मुकेश सिंह और रवींद्र कुमार मिश्रा, सीडीआरए के अध्यक्ष एसबी चौबे व महासचिव अजय, आईओएफएसओए के सचिव रोहित कुमार, एनडीजीबीजीओए के अध्यक्ष एस प्रभाकरण और एनडीएनजीएसए के महासचिव आनंद प्रकाश सिंह के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र की कॉपी रक्षा सचिव, जेएस (एलएस), डीजी आयुद्ध (सीएंडएस) और सातों निगमों के सीएमडी एवीएनएल, एमआईएल, एडब्लूईआईएल, वाईआईएल, टीसीएल, आईओएल एंड जीआईएल को भेजी गई है।
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श्रीकुमार ने बताया कि सात नवंबर को हमें डीडीपी से एक सूचना प्राप्त हुई कि सचिव, डीपीएस 10 नवंबर को फेडरेशन और एसोसिएशन के साथ एक बैठक करेंगे। इसमें सात नए डीपीएसयू की उत्पादकता में सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। आपस में विचार-विमर्श के बाद, बैठक में भाग लेने और सचिव डीपी द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने से पहले यूएफओई की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। दस नवंबर को दोपहर दो बजे यूएफओई की एक बैठक हुई। उसमें सचिव डीपी के साथ होने वाली बैठक में चर्चा की जाने वाली रणनीतियों पर चर्चा हुई। सर्वसम्मति से कई निर्णय लिए गए। यदि बैठक में सचिव डीपी अवशोषण पैकेज का मुद्दा उठाते हैं तो कर्मचारी और अधिकारी संगठन उसका विरोध करेंगे। उनसे केवल उत्पादकता संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने का अनुरोध करेंगे। यदि वह उसी मुद्दे पर चर्चा जारी रखते हैं, तो हम विरोध स्वरूप बैठक से वॉकआउट कर देंगे।
हमें सचिव डीपी को सूचित करना चाहिए कि हम बैठकों में केवल आयुध कारखानों के कर्मचारियों की सेवा, सेवानिवृत्ति तक आयुध कारखानों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के रूप में बनाए रखने के तौर-तरीकों पर चर्चा और निर्णय लेने के लिए ही भाग लेंगे। उत्पादकता में सुधार के संबंध में, प्रत्येक संगठन अपने विचार प्रस्तुत करेगा।
दस नवंबर को सचिव, रक्षा मंत्रालय के साथ कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों की चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए, सचिव, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह बैठक आयुध कारखानों / सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में उत्पादकता में सुधार पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई है। हालांकि, उन्होंने महासंघों और संघों से अपील की कि वे बैठकों में शामिल हों, ताकि अवशोषण पैकेज पर चर्चा की जा सके। यूएफओई के प्रतिनिधियों ने कहा, वे केंद्र सरकार की सेवा न छोड़ने और सात डीपीएसयू में शामिल नहीं होने का दृढ़ निर्णय ले चुके हैं।
आयुध कारखानों के 80 प्रतिशत कर्मचारियों ने पहले ही केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने के लिए अपना उन्नत विकल्प फॉर्म जमा कर दिया है। उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति तक आयुध कारखानों में बतौर केंद्रीय कर्मचारी ही बने रहना है। इस मामले में जो बीस प्रतिशत कर्मचारी बचे हैं, उन्होंने भी केंद्र सरकार में बने रहने के लिए उन्नत विकल्प फॉर्म जमा करना शुरू कर दिया है। ये सभी वे कर्मचारी हैं, जो विभिन्न त्योहारों के कारण छुट्टी पर थे। बैठक में सातों सीएमडी ने अपनी कंपनियों के प्रदर्शन पर चर्चा की। उन्होंने आयुध कारखानों में उत्पादकता में सुधार के लिए अपने सुझाव दिए।
कर्मचारी महासंघों ने भी सात सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात कही। महासंघों के प्रतिनिधियों ने कहा, आयुध कारखानों का निगमीकरण, केवल एक विफलता है, क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाए कि निगमीकरण सफल है। जब सरकार ने आयुध कारखानों का निगमीकरण किया था, तो कहा गया था कि इसका लक्ष्य पांच वर्षों के भीतर 30,000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचना है।
हालाँकि, पिछले वर्ष सभी सातों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का संयुक्त कारोबार 21,821 करोड़ रुपये था। अगर यह ओएफबी भी होता, तो यह आसानी से हासिल किया जा सकता था। वास्तव में, ओएफबी ने जीएसटी को छोड़कर 17,000 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। ऐसे में यह स्वीकार करना कठिन है कि निगमीकरण सफल है। महासंघों ने निगमीकरण को वापस लेने की अपनी मांग दोहराई। सरकार, सशस्त्र बलों से सीधे आयुध कारखानों को मांगपत्र देने के लिए कहे, क्योंकि निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा करके खुली निविदा के माध्यम से कार्यभार प्राप्त करना मुश्किल होगा।
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औद्योगिक उत्पादन (आईआर) से जुड़ी समस्याओं, जैसे एसएमएच में कमी, गारंटीशुदा वेतन का भुगतान न होने के कारण वेतन में कमी, ओटी का काम रुकना, विभिन्न संवर्ग संबंधी मुद्दे और अनुकंपा नियुक्ति पर प्रतिबंध हटाने में हो रही अनुचित देरी, आदि मुद्दे भी डीडीपी के समक्ष रखे गए। खाली पदों को स्थायी रोजगार के माध्यम से भरने की मांग की गई। डीडीपी स्तर पर एक शीर्ष उत्पादकता परिषद का गठन किया जाए। भविष्य में फेडरेशनों और एसोसिएशनों के साथ नियमित बैठकें की जाएं।
संयुक्त सचिव (लोक सेवा) ने आश्वासन दिया कि इन बातों पर गौर किया जाएगा और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। जहां तक अनुकंपा नियुक्ति का प्रश्न है, यह मामला कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को उनकी सहमति के लिए भेज दिया गया है। यूएफओई एक बार फिर सभी रक्षा असैन्य कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील करता है कि वे सात रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) में शामिल न हों और अपनी सेवानिवृत्ति तक सभी लाभों और सेवा शर्तों की सुरक्षा के साथ केंद्र सरकार की सेवा में बने रहें।
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