फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Emphasis on finding out the long term effects of Corona, emphasis on health sector in G20

G20: कोरोना के दीर्घकालीन प्रभावों का पता लगाने पर जोर, जी20 में स्वास्थ्य क्षेत्र के इन मुद्दों पर जोर

Sun, 10 Sep 2023 06:47 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 10 Sep 2023 06:47 AM IST
सार

भारत के एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल में कमी लाने के प्रस्ताव को समर्थन मिला है। भारत ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन काफी तेजी से दुनिया भर में बढ़ा है। इसे नियंत्रण में लाना आवश्यक है। इसलिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के लिए नीतियां लागू होनी चाहिए।
 

विज्ञापन
Emphasis on finding out the long term effects of Corona, emphasis on health sector in G20
जी20 सम्मेलन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण के साथ भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन में अपने सभी स्वास्थ्य प्रस्तावों को राष्ट्राध्यक्षों के सामने रखा है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि कोरोना के लंबे समय तक प्रभावों का पता लगाने पर मिलकर काम किया जाना चाहिए। इसके लिए शोधों को बढ़ावा दिया जाएगा।
विज्ञापन


पिछले वर्ष दिसंबर से भारत में बीते आठ महीने के दौरान चार बार जी-20 के स्वास्थ्य कार्यसमूह की बैठकें हुई हैं, जिनमें 17 प्रस्तावों पर चर्चा की गई। सभी प्रस्तावों को घोषणा पत्र में स्थान मिला है। घोषणा पत्र को रविवार को स्वीकृति के लिए राष्ट्राध्यक्षों के आगे रखा जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रविवार दोपहर तीसरे चरण की बैठक के बाद सभी देश घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।
विज्ञापन


घोषणा पत्र में सभी देशों के आगे यह भी कहा है कि दो से तीन वर्ष के लिए देश अपने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में काम करें। इतना ही नहीं भारत के एक स्वास्थ्य आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर फिलहाल सभी देशों ने मौखिक रुप से सहमति दी है और 2026 तक के लिए संयुक्त कार्य योजना तैयार करने का समर्थन किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डब्ल्यूएचओ के अटैच गठबंधन को समर्थन
हेपेटाइटिस, संचारी और गैर संचारी रोग, पोलियो, एड्स, तपेदिक, मलेरिया सहित महामारी के उन्मूलन में प्रगति जारी रहेगी। भारत, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य देशों ने तय किया है कि जलवायु और स्वास्थ्य पर परिवर्तनकारी कार्यवाही के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व वाले गठबंधन (अटैच) का समर्थन किया जाएगा।

एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ करेंगे काम
भारत के एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल में कमी लाने के प्रस्ताव को समर्थन मिला है। भारत ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन काफी तेजी से दुनिया भर में बढ़ा है। इसे नियंत्रण में लाना आवश्यक है। इसलिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के लिए नीतियां लागू होनी चाहिए।

महामारी कोष का दूसरा प्रस्ताव इसी साल
इसी साल दिसंबर में महामारी कोष का दूसरा प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें दाता और सह निवेश पर ध्यान देने को जरूरी बताया है। 25 हजार करोड़ रुपये वाले इस कोष में कुछ समय पहले विश्व बैंक ने 1500 करोड़ रुपये दान में दिए। अब तक तीन हजार करोड़ रुपये एकत्रित हुए हैं। 


मानसिक स्वास्थ्य
मानसिक स्वास्थ्य को जन स्वास्थ्य का अहम विषय बताते हुए इस प्रयास को गति देने के लिए कहा है। भारत ने कुछ ही समय पहले राष्ट्रीय नीति जारी कर लोगों की निशुल्क काउंसलिंग शुरू की थी। अंतिम छोर के व्यक्ति तक मानसिक स्वास्थ्य सेवा और मनो सामाजिक सहायता की पहुंच पर काम होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed